Class 8 Hindi Chapter 4 वही मनुष्य है Solutions | Assam Jatiya Bidyalaya
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৪ – वही मनुष्य है সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (অসম জাতীয় বিদ্যালয় – Assamese Medium)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ চতুৰ্থ অধ্যায় ‘वही मनुष्य है’ অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এটা অত্যন্ত অনুপ্ৰেৰণাদায়ক আৰু মানবতাবাদী কবিতা পাঠ। নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ শেহতীয়া নিৰ্দেশনা আৰু নতুন শৈক্ষিক নীতিৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 4 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন (Short Questions), দীঘলীয়া প্ৰশ্ন (Long Answers), MCQ আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
‘वही मनुष्य है’ নামৰ এই পাঠটিত প্ৰকৃত মানৱতা, উদাৰতা, পৰোপকাৰ আৰু নিঃস্বার্থভাৱে সমাজ আৰু দেশৰ সেৱা কৰাৰ বাৰ্তা সুন্দৰভাৱে বৰ্ণনা কৰা হৈছে। পৰীক্ষাৰ্থীসকলৰ বাবে এই কবিতাৰ সাৰাংশ, মূল ভাৱাৰ্থ আৰু শব্দাৰ্থ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই সমাধানসমূহত ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজতে বুজি পোৱাকৈ সৰল ৰূপত উত্তৰসমূহ প্ৰদান কৰা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- ‘वही मनुष्य है’ পাঠৰ মূল সাৰাংশ, মানৱতাবাদী বাৰ্তা আৰু কবিতাৰ তাৎপৰ্যৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, ১ নম্বৰৰ অতি চমু প্ৰশ্ন আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্ভুল উত্তৰ।
- ৪-৫ নম্বৰৰ দীঘলীয়া প্ৰশ্ন আৰু কবিতাৰ প্ৰসংগ সংগতি দৰশাই ব্যাখ্যা কৰা প্ৰশ্নসমূহৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহুবিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) সমাধান।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ অংশৰ সঠিক আৰু সহজ সমাধান।
আমাৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% শুদ্ধ আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ বা আয়ত্ত কৰিব পৰাকৈ প্ৰস্তুত কৰা নোটছ।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ পৰীক্ষাৰ আৰ্হিৰ সৈতে সংগতি ৰাখি প্ৰস্তুত কৰা বিশেষ সংকলন।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উন্নতিৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি এই বিশেষ সমাধান আগবঢ়োৱা হৈছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত উৎকৃষ্ট নম্বৰ লাভ কৰক।
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Class 8: Hindi Elective
वही मनुष्य है
TEXUAL SOLUTION
1. सपूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) कवि ने मृत्यु से डरने को क्यों मना किया है?
उत्तर : कवि का मानना है कि मृत्यु एक निश्चित सत्य है। जब सबको एक दिन मरना ही है, तो फिर उससे भयभीत क्यों होना? अतः मृत्यु का वरण ऐसे करो कि दुनिया तुम्हें हमेशा याद रखे।
(ख) कवि ने किस तरह की मृत्यु का आह्वान करने को कहा है?
उत्तर : कवि का स्पष्ट कहना है कि मृत्यु तो अटल है, इसलिए हमें सत्कर्म करते हुए प्राण त्यागने चाहिए ताकि लोग मृत्यु के बाद भी हमें सम्मान के साथ स्मरण करें।
(गं) कवि ने किस स्थिति में जीने-मरने को बूथा कहा है?
उत्तर : कवि के अनुसार यदि हम ऐसे अच्छे काम नहीं करते जिनसे हमारा नाम रौशन हो, तो जीवन व्यर्थ है। सिर्फ अपने लिए जीना पशुओं का स्वभाव है; परोपकार के बिना जीना और मरना दोनों बेकार है।
(घ) पशु-प्रवृत्ति क्या है?
उत्तर : पशु-प्रवृत्ति से तात्पर्य है केवल अपने स्वार्थ के लिए जीना। यदि हम दूसरों की भलाई के लिए कुछ नहीं करते और सिर्फ अपने में ही मग्न रहते हैं, तो यह पशुओं के समान आचरण है।
(ङ) सरस्वती किसे बखानती है?
उत्तर : सरस्वती उसी व्यक्ति का गुणगान करती है, जिसकी अपार उदारता से यह धरती धन्य हो जाती है। ऐसे महान लोग दूसरों की भलाई के लिए अपना जीवन भी त्याग देते हैं।
(च) कवि के अनुसार मनुष्य कहलाने का हक किसको है?
उत्तर : कवि के मत में सच्चा मनुष्य वही है जो अन्य मनुष्यों के हित में अपने प्राण न्योछावर करे। जिस प्रकार रंतिदेव, दधीचि, उशीनर और कर्ण ने परमार्थ के लिए बलिदान दिया, उसी प्रकार मानव कल्याण के लिए जीना ही सच्ची मनुष्यता है।
(छ) किसके हाथ विशाल हैं?
उत्तर : परम कृपालु दीनबंधु यानी ईश्वर के हाथ अत्यंत विशाल माने गए हैं।
(ज) गुप्तजी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर : गुप्तजी का जन्म वर्ष 1886 ई. में झाँसी जिले के अंतर्गत चिरगाँव नामक स्थान पर हुआ था।
(झ) कवि के मन में राष्ट्र-प्रेम की भावनाएँ किससे अंकुरित हुई थी ?
उत्तर : कवि के हृदय में बाल्यावस्था से ही बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोक महाकाव्य ‘आल्हा-खंड’ को सुनकर राष्ट्र-प्रेम तथा देश के उद्धार की भावनाएँ जाग्रत हुई थीं।
1. सही विकल्प चुनो :
(क) असली मनुष्य होने का हकदार वह है जो-
(अ) युद्ध में मरे
(आ) खुद के लिए मरे
(इ) मार कर मरे
(ई) मनुष्य के लिए मरे
उत्तर :(ई) मनुष्य के लिए मरे।
(ख) दधीचि ने देवताओं की रक्षा हेतु दान किया था
(अ) चक्षु
(आ) रुपया-पैसा
(इ) अस्थि
(ई) ब्रह्मास्त्र
उत्तर :(इ) अस्थि।
(ग) अपनी मृत्यु को निकट देखकर भी कर्ण ने दान स्वरूप दिया
(अ) धनुष
(आ) शरीर-चर्म
(इ) घोड़ा
(ई) राज्य
उत्तर : (आ) शरीर-चर्म।
(घ) गुप्तजी द्वारा रचित महाकाव्य का नाम है-
(अ) महाभारत
(आ) रामायण
(इ) साकेत
(ई) कामायनी
उत्तर : गुप्तजी की सुप्रसिद्ध महाकाव्य रचना का नाम है- (इ) साकेत।
3. 30-40 शब्दों में उत्तर लिखो :
(क) मैथिलीशरण गुप्तजी को राष्ट्रकवि क्यों कहा जाता है?
उत्तर : मैथिलीशरण गुप्त जी को राष्ट्रकवि की उपाधि उनके देशभक्ति पूर्ण विचारों के कारण मिली है। वे भारतीय संस्कृति के गौरव का गान करते थे और सामाजिक बुराइयों को मिटाना राष्ट्र-जागरण मानते थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता, समाज-सुधार, अछूतोद्धार और विश्व-बंधुत्व की भावनाएँ भरी हैं, इसलिए वे राष्ट्रकवि कहलाते हैं।
(ख) पीड़ित और उपेक्षित नारी के प्रति गुप्तजी एक विचार कैसा था ?
उत्तर : शोषित और उपेक्षित महिलाओं के प्रति गुप्तजी का दृष्टिकोण अत्यंत संवेदनशील व सहानुभूतिपूर्ण था। उनकी इस भावना का स्पष्ट प्रमाण हमें यशोधरा, उर्मिला, सीता, शकुंतला और सैरंध्री जैसे पात्रों पर रचित उनके उत्कृष्ट काव्यों में देखने को मिलता है।
(ग) गुप्तजी की काव्य की विषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर : गुप्तजी के काव्यों का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सभ्यता का बखान करना रहा है। वे समाज की बुराइयों को दूर करने को ही सच्चा राष्ट्र-जागरण समझते थे। राष्ट्रीयता, आस्तिकता, अछूतोद्धार, समाज-सुधार और विश्व-बंधुत्व जैसी महान भावनाएँ उनके काव्यों की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
(घ) अपने लिए जीने का क्या अभिप्राय है?
उत्तर : कवि का स्पष्ट मानना है कि हमारा जीवन और मृत्यु दोनों परमार्थ के लिए होना चाहिए। केवल अपने स्वार्थ के लिए जीना वास्तविक जीवन नहीं है; यह तो जानवरों की प्रवृत्ति है। सच्चा इंसान वही है जो अन्य इंसानों के भले के लिए अपना जीवन जीता और न्योछावर करता है।
(ङ) पशु और मनुष्य में क्या अन्तर है?
उत्तर : इंसान और जानवर में बहुत बड़ा फर्क होता है। जानवर सिर्फ अपने पेट भरने और शरीर के बारे में सोचता है, जबकि इंसान की सोच अपने तक सीमित नहीं होती। वह अपने साथ-साथ परिवार, समाज, राज्य और पूरे राष्ट्र की भलाई के बारे में विचार करता है, यही बात उसे मनुष्य बनाती है।
(च) समाज में कैसे व्यक्तियों का आदर होता है?
उत्तर : समाज हमेशा उन लोगों का सम्मान करता है जो खुद कष्ट सहकर भी उदारतापूर्वक दूसरों की सेवा करते हैं। ऐसे परोपकारी लोगों की महिमा सरस्वती भी गाती हैं और उनके जन्म से धरती धन्य हो जाती है। उनकी यशगाथा हर ओर गूँजती है और पूरी दुनिया उनका आदर-पूजन करती है।
4. 100 शब्दों के भीतर उत्तर लिखो :
(क) रंतिदेव, दधीचि, शिवि और कर्ण की दानवीरता का वर्णन करो।
उत्तर : रंतिदेव इतने बड़े दानी थे कि जब वे कई दिनों के उपवास के बाद भोजन करने बैठे, तो एक भूखे व्यक्ति के माँगने पर उन्होंने अपना थाल उसे सौंप दिया। महर्षि दधीचि ने असुरों के विनाश और देवताओं की रक्षा के लिए अपनी हड्डियों का दान कर दिया था। राजा उशीनर (शिवि) ने एक छोटे से कबूतर की जान बचाने के लिए अपने शरीर का मांस काटकर तराजू पर रख दिया था। वीर कर्ण की दानवीरता भी अद्वितीय है; उन्होंने जहाँ एक ओर यज्ञ के लिए अपना भवन दान कर दिया, वहीं देवराज इंद्र के माँगने पर अपने प्राण रक्षक कवच-कुंडल भी उतार कर दे दिए।
(ख) “जो दूसरों के लिए मरता है, वह अमर है।” प्रस्तुत कविता के आधआर पर स्पष्ट करो।
उत्तर : जब इंसान अपने निजी स्वार्थ को छोड़ देता है, तभी वह सच्ची मनुष्यता को प्राप्त करता है। यह सच है कि मृत्यु से कोई नहीं बच सकता, लेकिन अपने श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से हम मृत्यु पर भी विजय पा सकते हैं। जो लोग व्यक्तिगत स्वार्थ को त्यागकर समाज के हित को ही अपना धर्म और कर्म मान लेते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महान आदर्श बन जाते हैं। इसके विपरीत, केवल अपने लिए जीना पशुओं के समान है। जैसे महात्मा गाँधी जी ने दूसरों की भलाई के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया और इसी कारण वे आज भी हमारे बीच अमर हैं।
5. सप्रसंग व्याख्या करो :
(क) विचार लो कि …… जिया न आपके लिए।
उत्तर : ये काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आओ हिन्दी सीखें (भाग चार)’ के अध्याय ‘वही मनुष्य है’ से उद्धृत हैं, जिसके रचयिता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हैं। इन पंक्तियों में कवि का आशय है कि हमें यह मान लेना चाहिए कि मृत्यु अटल है, अतः इससे घबराना नहीं चाहिए। हमें ऐसे शानदार ढंग से अपना जीवन जीना और बलिदान देना चाहिए कि दुनिया हमें हमेशा याद रखे। यदि हम ऐसा नहीं कर पाते, तो हमारा जीना और मरना दोनों व्यर्थ है। जो इंसान परमार्थ के लिए अपने प्राण त्यागता है, वह मृत्यु के बाद भी अमर रहता है।
(ख) उसी उदार की कथा ….. समस्त सृष्टि पूजती।
उत्तर : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आओ हिन्दी सीखें (भाग चार)’ में संकलित मैथिलीशरण गुप्त जी की कविता ‘वही मनुष्य है’ से लिया गया है। यहाँ कवि एक उदार और परोपकारी व्यक्ति की महिमा का वर्णन कर रहे हैं। कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति दूसरों के लिए जीता है, उसकी प्रशंसा स्वयं विद्या की देवी सरस्वती करती हैं। ऐसे महान इंसान के जन्म से यह धरती कृतार्थ हो उठती है और उसकी यशगाथा हर दिशा में गूँजती है। उसकी इसी अपार उदारता के कारण पूरा संसार उसे पूजता है।
भाषा अध्ययन
क्रिया के काल
हम क्रिकेट खेलते हैं।
खिलाड़ी क्रिकेट खेल रहे हैं।
मधु पढ़ रही होगी।
वह आता होगा।
काल (विभाजन की रूप रेख)




