Class 8 Hindi Chapter 14 – महाभारत की एक सांझ (Mahabharat ki Ek Sanjh) – All Textual Solutions | AJB (Assamese Medium)

CLASS 8

Class 8 Hindi Chapter 14 महाभारत की एक सांझ Solutions | Assam Jatiya Bidyalaya

অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৪ – महाभारत की एक सांझ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (অসম জাতীয় বিদ্যালয় – Assamese Medium)

অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ চতুৰ্দশ অধ্যায় ‘महाभारत की एक सांझ’ অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে মহাভাৰতৰ পটভূমিত ৰচিত ঐতিহাসিক আৰু নাট্যধর্মী এটা অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ পাঠ। নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ শেহতীয়া নিৰ্দেশনা আৰু নতুন শৈক্ষিক নীতিৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 14 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন (Short Questions), দীঘলীয়া প্ৰশ্ন (Long Answers), MCQ আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।

‘महाभारत की एक सांझ’ নামৰ এই পাঠটিত কুৰুক্ষেত্ৰ যুদ্ধৰ পৰৱৰ্তী পৰ্যায়ৰ এক আৱেগিক দৃশ্য, মহাভাৰতৰ চৰিত্ৰসমূহৰ মানসিক অৱস্থা আৰু যুদ্ধৰ পৰিণতিৰ বিষয়ে সুন্দৰভাৱে বৰ্ণনা কৰা হৈছে। পৰীক্ষাৰ্থীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ সাৰাংশ, চৰিত্ৰ বিশ্লেষণ আৰু শব্দাৰ্থ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই সমাধানসমূহত ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজতে বুজি পোৱাকৈ সৰল ৰূপত উত্তৰসমূহ প্ৰদান কৰা হৈছে।

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এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:

  • ‘महाभारत की एक सांझ’ পাঠৰ মূল সাৰাংশ, যুদ্ধৰ পৰিণতি আৰু ঐতিহাসিক চৰিত্ৰসমূহৰ মনস্তাত্ত্বিক বিশ্লেষণ।
  • শব্দাৰ্থ, ১ নম্বৰৰ অতি চমু প্ৰশ্ন আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্ভুল উত্তৰ।
  • ৪-৫ নম্বৰৰ দীঘলীয়া প্ৰশ্ন আৰু নাটকীয় বা প্ৰসংগ সংগতি দৰশাই ব্যাখ্যা কৰা প্ৰশ্নসমূহৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
  • নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহুবিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) সমাধান।
  • পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ অংশৰ সঠিক আৰু সহজ সমাধান।

আমাৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:

  • নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
  • ১০০% শুদ্ধ আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ বা আয়ত্ত কৰিব পৰাকৈ প্ৰস্তুত কৰা নোটছ।
  • পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
  • অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ পৰীক্ষাৰ আৰ্হিৰ সৈতে সংগতি ৰাখি প্ৰস্তুত কৰা বিশেষ সংকলন।

ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উন্নতিৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি এই বিশেষ সমাধান আগবঢ়োৱা হৈছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত উৎকৃষ্ট নম্বৰ লাভ কৰক।

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Chapter 14 महाभारत की एक साझ –

 Class 8: Hindi Elective

Lesson-14                                                       Ospin Academ

महाभारत की एक साझ –

TEXUAL SOLUTION

1. सम्पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखो :

(क) ‘महाभारत की एक सांझ’ एकांकी के एकांकीकार कौन हैं?

उत्तर : ‘महाभारत की एक सांझ’ नामक एकांकी के रचनाकार श्री भारतभूषण अग्रवाल जी हैं।

(ख) धृतराष्ट्र को कौन युद्धवार्ता सुना रहे थे ?

उत्तर : संजय अपनी दिव्य दृष्टि से धृतराष्ट्र को युद्ध का आँखों-देखा हाल (युद्धवार्ता) सुना रहे थे।

(ग) पंच पाण्डव कौन-कौन थे ?

उत्तर : पाँच पाण्डवों के नाम हैं— युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव।

(घ) द्रोणाचार्य कौन थे ?

उत्तर : द्रोणाचार्य कौरवों और पाण्डवों के अस्त्र-शस्त्र के गुरु थे और वे अश्वत्थामा के पिता भी थे।

(ङ) कौरवों और पाँडवों के पितामह कौन थे ?

उत्तर : कौरवों और पाण्डवों के पितामह (दादा) ‘भीष्म’ थे।

(च) दुर्योधन कहाँ छिपे हुए थे ?

उत्तर : महाभारत युद्ध के अंतिम चरण में दुर्योधन द्वैतवन के एक सरोवर (तालाब) में जाकर छिप गए थे।

(छ) प्रस्तुत एकांकी के पात्र कितने हैं? यहाँ मुख्य पात्र कौन है?

उत्तर : इस एकांकी में कुल पाँच पात्र (धृतराष्ट्र, संजय, युधिष्ठिर, भीम और दुर्योधन) हैं। इसके मुख्य पात्र युधिष्ठिर और दुर्योधन हैं।

(ज) ‘केवल एक दुःख मेरे साथ जाएगा’। यहाँ दुर्योधन के साथ जानेवाला दुःख क्या है?

उत्तर : मृत्यु से पूर्व दुर्योधन का एकमात्र दुःख यह था कि उनके पिता धृतराष्ट्र अंधे क्यों हुए।

2. सही उत्तर चुनकर लिखो :

(क) धृतराष्ट्र के कितने बेटे थे ?

(अ) पाँच

(आ) दश

(इ) सौ

(ई) पचास

उत्तर : (इ) सौ बेटे थे।

(ख) पांडवों के पिता कौन थे ?

(अ) धृतराष्ट्र

(आ) पाण्डु

(इ) संजय

(ई) भीष्म

उत्तर : (आ) पाण्डु थे।

(ग) दुर्योधन की मृत्यु किसके हाथ हुई ?

(अ) युधिष्ठिर के हाथ में

(आ) अर्जुन के हाथ में

(इ) भीम के हाथ में

(ई) कर्ण के हाथ में

उत्तर : (इ) भीम के हाथों हुई।

(घ) कौरवों और पांडवों में से किसको धर्मराज कहा जाता है?

(अ) युधिष्ठिर को

(आ) दुर्योधन को

(इ) दुःशासन को

(ई) सहदेव को

उत्तर : (अ) युधिष्ठिर को धर्मराज कहा जाता है।

(ङ) श्रीकृष्ण किसके रथ के सारथी थे ?

(अ) दुर्योधन के

(आ) भीम के

(इ) धृतराष्ट्र के

(ई) अर्जुन के

उत्तर :(ई) अर्जुन के रथ के सारथी थे।

(च) द्रौपदी को किस खेल में युधिष्ठिर ने दाँव पर लगाया था ?

(अ) क्रिकेट में

(आ) ताश खेल में

(इ) पासाखेल में

(ई) जुए में

उत्तर : (इ) पासाखेल (चौपड़) में दाँव पर लगाया था।

3. किसने किससे कहा था ?

(क) “मेरे इतने उत्कट स्नेह का ऐसा अन्त। ओह! मैं नहीं सह सकता। मैं नहीं सह सकता…”

उत्तर : यह मार्मिक कथन धृतराष्ट्र ने संजय से कहा था।

(ख) “पहले वीरता का दंभ और अंत में करुणा की भीख । कायरों का यही नियम है।”

उत्तर: यह वाक्य युधिष्ठिर ने दुर्योधन को संबोधित करते हुए कहा था।

(ग) “मेरे मन में कोई पश्चताप नहीं है। मैंने कोई भूल नहीं की। मैंने भय से तुम्हारी शरण नहीं माँगी।”

उत्तर : यह बात घायल दुर्योधन ने युधिष्ठिर से कही थी।

(घ) “जो अपने भाइयों को जीवित जलवा देने में भी नहीं हिचकिचाता, जो अपनी भाभी को भी भरी सभा में अपमानित करने में आनन्द ले सकता है, उसका लज्जा से क्या परिचयः।

उत्तर : यह तीखा कथन युधिष्ठिर ने भीम से कहा था।

4. सप्रसंग व्याख्या करो :

(क) “सच है कायर और पराजित ही अंत में धर्म का स्मरण कर लेते हैं।”

उत्तर : प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘आओ हिन्दी सीखें (भाग चार)’ में संकलित ‘महाभारत की एक सांझ’ नामक एकांकी से अवतरित है। यह प्रसंग उस समय का है जब दुर्योधन युद्धभूमि से भागकर द्वैतवन के सरोवर में छिप गया था और भीम-युधिष्ठिर उसे बाहर निकालने का प्रयत्न कर रहे थे। उसी दौरान जब दुर्योधन ने धर्म और अधर्म की दुहाई दी, तो भीम ने व्यंग्य करते हुए हँसकर कहा था कि यह बात बिल्कुल सच है कि कायर और हारे हुए लोग ही अंत समय में धर्म को याद करते हैं।

(ख) “विफलता के इस मरुस्थल में अब एक बूंद आवेगी भी तो सूखकर खो जाएगी। यदि तुम्हें इसमें संतोष हो कि तुम्हारी महत्वाकांक्षा मेरी मृत देह पर ही अपना जय स्तम्भ उठाए तो फिर यही सही।”

उत्तर : ये पंक्तियाँ ‘आओ हिन्दी सीखें (भाग चार)’ की एकांकी ‘महाभारत की एक सांझ’ से उद्धृत हैं। सरोवर में छिपे हुए घायल दुर्योधन को जब युधिष्ठिर युद्ध के लिए अस्त्र देने का प्रस्ताव रखते हैं, तब दुर्योधन अपनी विवशता और हताशा व्यक्त करते हुए यह वाक्य कहता है। वह कहता है कि अब उसकी हार निश्चित है और यह मदद मरुस्थल में पानी की एक बूँद के समान व्यर्थ है। यदि युधिष्ठिर उसकी लाश पर ही अपनी जीत का परचम लहराकर खुश होना चाहते हैं, तो उसे यह भी स्वीकार है।

(ग) “यही तो मुझे दुःख है युधिष्ठिर कि तथ्य तक पहुँचने की किसी ने भी चेष्टा नहीं की। एक अन्याय की प्रतिष्ठा के लिए इतना ध्वंस किया गया, और सब अंधों की भाँति उसे स्वीकार करते गए।”

उत्तर : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आओ हिन्दी सीखें (भाग चार)’ के पाठ ‘महाभारत की एक सांझ’ से लिया गया है। यह प्रसंग तब आता है जब युधिष्ठिर और दुर्योधन के बीच राज्य के उत्तराधिकार को लेकर तर्क-वितर्क चल रहा होता है। युधिष्ठिर कहते हैं कि भीष्म, विदुर, कृपाचार्य या स्वयं महाराज धृतराष्ट्र ने कभी दुर्योधन को असली उत्तराधिकारी नहीं माना। इस पर दुर्योधन आहत होकर कहता है कि उसे इसी बात का दुःख है कि किसी ने भी सच्चाई को समझने की कोशिश नहीं की और पांडवों के पक्ष में हुए अन्याय को सबने आँख मूँदकर स्वीकार कर लिया।

5. उत्तर लिखो:

(क) श्रीकृष्ण कौन थे? उन्होंने पांडवों का पक्ष क्यों लिया ?

उत्तर : श्रीकृष्ण वसुदेव और देवकी के पुत्र तथा मथुरा और द्वारका के राजा थे। रिश्ते में वे पांडवों और कौरवों दोनों के फुफेरे भाई लगते थे। महाभारत युद्ध से पूर्व, सहायता माँगने के लिए दुर्योधन और अर्जुन दोनों उनके पास पहुँचे। दुर्योधन पहले पहुँचा और सोते हुए श्रीकृष्ण के सिरहाने बैठ गया, जबकि अर्जुन उनके पैरों के पास खड़े रहे। जागने पर श्रीकृष्ण की पहली दृष्टि अर्जुन पर पड़ी। इसलिए उन्होंने पहला अधिकार अर्जुन को दिया। अर्जुन ने निहत्थे श्रीकृष्ण को चुना, जबकि दुर्योधन ने उनकी विशाल नारायणी सेना माँगी। इस प्रकार, श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने और उन्होंने पांडवों का पक्ष लिया।

(ख) दुर्योधन के पतन का क्या कारण था ? सम्यक उत्तर दो।

उत्तर : दुर्योधन के पतन का मुख्य कारण उसका अहंकार, ईर्ष्या, स्वार्थ, कपट और अदूरदर्शिता थी। इसके अतिरिक्त, मामा शकुनि की कुटिल सलाहों पर चलना और शूरवीर कर्ण की शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता भी उसके विनाश का कारण बनी। पांडवों के प्रति लगातार किए गए अन्याय के कारण उसका पतन होना निश्चित था।

(ग) संजय ने धृतराष्ट्र के समक्ष दुर्योधन की मृत्यु का वर्णन किस तरह पेश किया ? संक्षेप में लिखो।

उत्तर : संजय ने धृतराष्ट्र को युद्ध का आँखों-देखा हाल सुनाते हुए कहा, “महाराज! पांडवों ने विरक्त होकर सरोवर में बैठे सुयोधन (दुर्योधन) को युद्ध के लिए विवश कर दिया। पांडवों की ओर से भीम गदा लेकर मैदान में आए। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। सुयोधन का पराक्रम इतना अद्भुत था कि लग रहा था अंततः जीत उसी की होगी। परंतु तभी श्रीकृष्ण के इशारे पर भीम ने गदा से सुयोधन की जाँघ (जंघा) पर अनुचित प्रहार किया। इस भीषण प्रहार से कुरुराज आहत होकर चीत्कार करते हुए गिर पड़े और अंततः उनके प्राण पखेरू उड़ गए।”

(घ) मृत्यु के समय युधिष्ठिर ने दुर्योधन को क्या सलाह दी ? वर्णन करो।

उत्तर : मरणासन्न दुर्योधन को देखकर युधिष्ठिर ने सांत्वना देते हुए कहा कि वह सुध-बुध खोकर व्यर्थ का प्रलाप कर रहा है। युधिष्ठिर ने स्पष्ट किया कि वे विवाद करने नहीं, बल्कि उसकी पीड़ा बाँटने आए हैं। उन्होंने कहा, “तुम विश्वास करो कि मैं इस भयानक रक्तपात के लिए कदापि तैयार नहीं था। तुम्हें सत्य और असत्य में भेद न कर पाने की भ्रांति हो गई है। इतने उत्तेजित न हो, वीरों की भाँति धैर्य रखो।”

(ङ) दुर्योधन ने युधिष्ठिर की सलाह का जवाब कैसे दिया ? संक्षेप में लिखो।

उत्तर : दुर्योधन ने युधिष्ठिर की सांत्वना का उत्तर देते हुए कहा, “घबराओ नहीं युधिष्ठिर! मेरी शांति का प्रबंध तुम कर चुके हो, बस कुछ ही पलों में मैं सदा के लिए शांत हो जाऊँगा।” उसने गर्व से कहा कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा या ग्लानि नहीं है; उसने किसी से डरकर क्षमा नहीं माँगी बल्कि अंत तक वीर की भाँति डटकर मुकाबला किया है। उसने कहा कि उसके साथ केवल एक ही दुःख जा रहा है कि उसके पिता धृतराष्ट्र अंधे क्यों थे।

भाषा अध्ययन

वाक्य-भेद

शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं। जैसे- बच्चा खेल रहा है। रचना के अनुसार वाक्य तीन प्रकार के होते हैं :

(क) सरल वाक्य या साधारण वाक्य

(ख) संयुक्त वाक्य

(ग) मिश्रित वाक्य

(क) सरल वाक्य: जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य (कर्ता) और एक ही विधेय हो, उसे सरल वाक्य कहते हैं। जैसे- हाथी घूम रहा है।

(ख) संयुक्त वाक्य: जिस वाक्य में दो या दो से अधिक उपवाक्य स्वतंत्र रूप से किसी समुच्चयबोधक अव्यय द्वारा जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं। जैसे- जोसेफ कविता पढ़ता है और अहमद चित्र बनाता है। (स्वतंत्र उपवाक्य और, तथा, किंतु, परंतु, या आदि अव्ययों से जुड़े होते हैं।)

(ग) मिश्रित वाक्य: जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य तथा अन्य उपवाक्य उस पर आश्रित या गौण हों, वह मिश्रित वाक्य कहलाता है। जैसे- रहीम मेरे घर नहीं आया क्योंकि वह सुबह से पढ़ रहा है। (आश्रित उपवाक्य कि, क्योंकि, जिसे, जो, जब, जिसने आदि अव्ययों से जुड़े होते हैं।)

6. निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार परिवर्तित करो

(क) पिता जी के डाँटते ही आशु रोन लगा। (संयुक्त वाक्य में)

उत्तर : पिताजी ने डाँटा और आशु रोने लगा।

(ख) कथा समाप्त होगी और हमें प्रसाद मिलेगा। (मिश्र वाक्य में)

उत्तर : जब कथा समाप्त होगी, तब हमें प्रसाद मिलेगा।

(ग) वर्षा थम गई और इंद्रधनुष निकल आया। (सरल वाक्य में)

उत्तर : वर्षा थमते ही इंद्रधनुष निकल आया।

(घ) बच्चे फुटबॉल खेलने मैदान में जाते हैं। (मिश्र वाक्य में)

उत्तर : बच्चे मैदान में इसलिए जाते हैं क्योंकि उन्हें फुटबॉल खेलना होता है।

(ङ) जो खाना बनाती है, वह खाना परोसेगी। (सरल वाक्य में)

उत्तर : खाना बनाने वाली ही खाना परोसेगी।

(च) सुबह होते ही बच्चे स्कूल चले जाते हैं। (संयुक्त वाक्य में)

उत्तर : सुबह होती है और बच्चे स्कूल चले जाते हैं।

7. पर्यायवाची शब्द लिखो :

अग्नि, अश्व, हाथी, गाय, कमल, पितृ, मातृ, घर, बेटा, बेटी, पंडित, गंगा, गणेश, ईश्वर, कृष्ण, चन्द्रमा, नौकर, अतिथि, पक्षी, बादल।

उत्तर :

अग्नि: अनल, पावक, आग

अश्व: घोड़ा, हय, तुरंग

हाथी: हस्ती, गज, कुंजर

गाय: धेनु, गौ, सुरभि

कमल: सरोज, पंकज, जलज

पितृ: पिता, जनक, तात

मातृ: माँ, माता, जननी

घर: गृह, भवन, आवास

बेटा: पुत्र, आत्मज, सुत

बेटी: पुत्री, आत्मजा, सुता

पंडित: विद्वान, सुधी, ज्ञानी

गंगा: देवनदी, जाह्नवी, भागीरथी

गणेश: लंबोदर, एकदंत, गजानन

ईश्वर: भगवान, प्रभु, परमात्मा

कृष्ण: केशव, माधव, गोविंद

चन्द्रमा: चाँद, चंद्र, सोम

नौकर: चाकर, दास, सेवक

अतिथि: मेहमान, आगंतुक, पाहुना

पक्षी: खग, विहंग, चिड़िया

बादल: मेघ, घन, वारिद

8. एक शब्द में प्रकट करो:

(क) जिसे जाना न जा सके

उत्तर : अज्ञेय

(ख) जिसका जन्म अभी-अभी हुआ हो

उत्तर : नवजात

(ग) जिसका अंत न हो

उत्तर : अनंत

(घ) जो कुछ भी न जानता हो

उत्तर : अज्ञ (या अज्ञानी)

(ङ) जो सबकुछ जानता हो

उत्तर : सर्वज्ञ

(च) जिसका कोई शत्रु न हो

उत्तर : अजातशत्रु

(छ) उपजाऊ भूमि

उत्तर : उर्वरा

(ज) अनुपजाऊ भूमि

उत्तर : ऊसर (या बंजर)

(झ) जो उच्च कुल में पैदा हुआ हो

उत्तर : कुलीन

(ञ) जो बहुत बोलता हो

उत्तर : वाचाल

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Note – If you find any mistakes in this chapter, please let us know or correct them yourself while reading. Thank you!
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৪ (महाभारत की एक सांझ) – সঘনাই সোধা প্ৰশ্ন (FAQs)
‘महाभारत की एक सांझ’ পাঠটি কি বিষয়ক?
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ অন্তৰ্ভুক্ত এই পাঠটিত কুৰুক্ষেত্ৰ যুদ্ধৰ পৰৱৰ্তী এক সন্ধিক্ষণ আৰু মহাভাৰতৰ বিভিন্ন চৰিত্ৰৰ মানসিক অৱস্থা তথা যুদ্ধৰ পৰিণতিৰ ওপৰত আলোকপাত কৰা হৈছে।
এই সমাধানটোত কি কি অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে?
ইয়াত পাঠ্যপুথিৰ সকলো অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নোত্তৰ, অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন, MCQ তথা ব্যাকৰণৰ সম্পূৰ্ণ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহ কি অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা হৈছে?
হয়, এই সকলোবোৰ সমল অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) নতুন পাঠ্যক্ৰম আৰু শেহতীয়া নিয়মাৱলী অনুসৰি সম্পূৰ্ণ পৰীক্ষামুখীভাৱে প্ৰস্তুত কৰা হৈছে।
এই অধ্যায়ৰ পৰা পৰীক্ষাত কেনেধৰণৰ প্ৰশ্ন আহিব পাৰে?
এই অধ্যায়ৰ পৰা চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, বহুবিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) আৰু পাঠভিত্তিক বৰ্ণনাত্মক প্ৰশ্ন সচৰাচৰ পৰীক্ষাত সোধা হয়।

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