Class 8 Hindi Chapter 3 मैडम मेरी क्यूरी Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan | New Syllabus

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Class 8 Hindi Chapter 3 – मैडम मेरी क्यूरी (মেডাম মেৰী কিউৰী) – All Textual Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan (শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন)

অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৩ – मैडम मेरी क्यूरी (মেডাম মেৰী কিউৰী) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (Sankardev Sishu Vidya Niketan)

অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ তৃতীয় অধ্যায় ‘मैडम मेरी क्यूरी’ এখন অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ জীৱনীমূলক পাঠ। শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 3 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions), বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) আৰু ব্যাকৰণৰ পুংখানুপুংখ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ সহজ, নিৰ্ভুল আৰু সম্পূৰ্ণ পৰীক্ষামুখীভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে।

‘मैडम मेरी क्यूरी’ নামৰ এই পাঠটিত বিশ্ববিখ্যাত বিজ্ঞান বিদুষী মেডাম মেৰী কিউৰীৰ জীৱন সংগ্ৰাম, তেওঁৰ আৱিষ্কাৰসমূহ আৰু বিজ্ঞান জগতলৈ তেওঁৰ অৱদানৰ বিষয়ে বিস্তাৰিতভাৱে আলোচনা কৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ জৰিয়তে অনুপ্ৰাণিত হোৱাৰ এক সুন্দৰ সুযোগ আছে। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে প্ৰস্তুতি চলাব পাৰে।

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এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:

  • মেডাম কিউৰীৰ জীৱনীৰ সাৰাংশ আৰু বিজ্ঞানলৈ তেওঁৰ অৱদানৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
  • শব্দাৰ্থ, অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA) আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
  • দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
  • পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ আৰু ভাষিক জ্ঞানৰ সঠিক ধাৰণা।
  • নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ অতিৰিক্ত প্ৰশ্নসমূহৰ লগতে শেহতীয়া আৰ্হিৰ MCQ প্ৰশ্নৰ সমাধান।

অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:

  • শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
  • ১০০% নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ কৰিব পৰাকৈ সৰল ভাষাত লিখা উন্নত মানৰ নোটছ (Class 8 Hindi Notes)।
  • পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
  • পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন আৰু MCQ-ৰ বিশেষ সংকলন।

ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।

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Chapter 3 मैडम मेरी क्यूरी

 শংকৰদেৱ বিদ্যা নিকেতন, অষ্টম শ্ৰেণী: হিন্দী

অধ্যায়-3                                                                       অস্পিন একাডেমী

मैडम मेरी क्यूरी

পাঠভিত্তিক প্রশ্নোত্তৰ

१ । सही उत्तर चुनकर लिखो :

(क) मैडम क्यूरी की बड़ी पुत्री का नाम आइरीन/पियरे/जुलियेट था।

उत्तर: मैडम क्यूरी की बड़ी बेटी का नाम आइरीन था।

(ख) पियरे क्यूरी की मृत्यु सड़क दुर्घटना/बीमारी/बुढ़ापा के कारण हुई।

उत्तर: पियरे क्यूरी का देहांत सड़क दुर्घटना के कारण हुआ था।

(ग) मेरी को दूसरी बार भौतिक शास्त्र/रसायन शास्त्र/ अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।

उत्तर: मेरी को दूसरी दफा रसायन शास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

(घ) मैडम क्यूरी को मधुमेह/कैंसर/एनिमिया की बीमारी हुई थी।

उत्तर: मैडम क्यूरी एनिमिया नामक बीमारी से ग्रसित हो गई थीं।

(ङ) पोलैंड/फ्रांस/भारत/इटली में मैडम क्यूरी का जन्म हुआ था।

उत्तर: मैडम क्यूरी का जन्म पोलैंड देश में हुआ था।

२ । खाली जगहों को पूर्ति करो :

(क) क्यूरी पति-पत्नी का यह अनुसंधान कार्य ______, निरंतर प्रयास और आत्मबलिदान का एक अनुपम उदाहरण था।

उत्तरः क्यूरी पति-पत्नी का यह अनुसंधान कार्य धैर्य, निरंतर प्रयास और आत्मबलिदान का एक अनुपम उदाहरण था।

(ख) इस वैश्विक युद्ध के दौरान मेरी ने अपनी पुत्री आइरीन के संग मिलकर एक सचल ______ यूनिट तैयार की तथा सेविका (नर्स) के रूप में घायलों का इलाज किया।

उत्तरः इस वैश्विक युद्ध के दौरान मेरी ने अपनी पुत्री आइरीन के संग मिलकर एक सचल एक्स-रे यूनिट तैयार की तथा सेविका (नर्स) के रूप में घायलों का इलाज किया।

(ग) संपूर्ण मनुष्य जाति उनके द्वारा किए गए युग-परिवर्तक आविष्कारों और अत्यंत ______ कार्यों को सदा स्मरण रखेगी।

उत्तरः संपूर्ण मनुष्य जाति उनके द्वारा किए गए युग-परिवर्तक आविष्कारों और अत्यंत परोपकारी कार्यों को सदा स्मरण रखेगी।

३ । (क) मेरी क्यूरी का संक्षिप्त परिचय दो।

उत्तर: मेरी क्यूरी का जन्म 7 नवंबर, 1867 ई. को पोलैंड के वारसा शहर में हुआ था। बचपन में उनका नाम मारिया स्कोलोडोवस्का रखा गया था, परंतु उनके मित्र स्नेहपूर्वक उन्हें मान्या कहकर पुकारते थे। उनके माता और पिता, दोनों ही शिक्षक के पेशे से जुड़े थे। मेरी ने हाईस्कूल तथा स्नातक स्तर की परीक्षाओं को प्रथम श्रेणी से पास किया था। उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु उन्होंने पेरिस स्थित सोरबोन विश्वविद्यालय में दाखिला लेने का मन बनाया, किंतु आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते उनका प्रवेश वहाँ नहीं हो पाया।

मैडम क्यूरी ने रेडियम और पोलोनियम जैसे तत्वों का आविष्कार किया, जो चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी और क्रांतिकारी उपलब्धि सिद्ध हुई। इससे पूर्व, क्यूरी दंपति ने मशहूर वैज्ञानिक हेनरी बैकरेल के साथ काम करते हुए रेडियोधर्मिता का भी पता लगाया था।

पूरी दुनिया में मेरी क्यूरी एक ऐसी अद्भुत महिला वैज्ञानिक के रूप में जानी जाती हैं, जिनको दो अलग-अलग विषयों के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया। उन्हें अपना प्रथम नोबेल पुरस्कार सन् 1903 ई. में भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में उनके पति पियरे क्यूरी और हेनरी बैकरेल के साथ सम्मिलित रूप से प्रदान किया गया था। यह सम्मान उन्हें रेडियोधर्मिता की खोज के लिए मिला था। इसके बाद सन् 1911 ई. में रसायन शास्त्र में रेडियम को शुद्ध करने के कार्य हेतु उन्हें दूसरा नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। पहले विश्व युद्ध के समय उन्होंने एक सेविका के तौर पर घायल जवानों का उपचार किया।

रेडियोधर्मी तत्वों के अत्यधिक संपर्क में रहने की वजह से मेरी क्यूरी को थकान और एनीमिया की शिकायत रहने लगी। अंततः 4 जुलाई, 1934 ई. को उनका देहावसान हो गया। उनकी मृत्यु पर महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने शोक व्यक्त करते हुए कहा था कि विश्व की जानी-मानी हस्तियों के बीच यह इकलौता ऐसा नाम है, जिस पर जीवन भर कोई दाग नहीं लगा। संपूर्ण मानव समाज उनके इन युग-प्रवर्तक आविष्कारों और जनकल्याण के कार्यों को सर्वदा याद रखेगा।

४  मैडम क्यूरी को किस-किस विषय में और कब कब नोबेल पुरस्कार मिले थे ?

उत्तर: मैडम क्यूरी को अपना प्रथम नोबेल पुरस्कार सन् 1903 ई. में भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में अपने पति पियरे क्यूरी और हेनरी बैकरेल के साथ साझा रूप से प्राप्त हुआ था। इसके पश्चात्, सन् 1911 ई. में रेडियम के शुद्धिकरण के महान कार्य के लिए उन्हें रसायन शास्त्र के विषय में अपना दूसरा नोबेल पुरस्कार हासिल हुआ था।

५ । मेरी क्यूरी की मृत्यु पर अलवर्ट आइनस्टाइन ने क्या कहा था?

उत्तर: मेरी क्यूरी के निधन पर अल्बर्ट आइंस्टीन ने उनके सम्मान में कहा था कि विश्व की तमाम मशहूर शख्सियतों में केवल यही एक ऐसा नाम है, जो ताउम्र बिल्कुल बेदाग और पवित्र रहा।

६ । रेडियोधर्मी रश्मियों की कौन सी विशेषताएँ हैं ?

उत्तर: रेडियोधर्मी किरणों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनकी मदद से असली और नकली हीरे के बीच का अंतर आसानी से पहचाना जा सकता है। इन किरणों के इस्तेमाल से इंसानी शरीर के भीतरी अंगों को देखना भी मुमकिन हो पाया है। इन सबसे भी बढ़कर एक अहम बात यह है कि रेडियम कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारी के इलाज में भी बेहद असरदार साबित होता है।

७ । मैडम क्यूरी ने किन चीजों की खोज की? शोध कार्य के समय उन्हें कौन-सी परेशानियाँ उठानी पड़ी ?

उत्तर: मैडम क्यूरी ने मुख्य रूप से पोलोनियम और रेडियम नामक तत्वों का आविष्कार किया।

शोध कार्यों के दौरान उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने महज़ एक सामान्य से कमरे को ही अपनी प्रयोगशाला बनाकर अपने अनुसंधान की शुरुआत की थी। उन्होंने यह साबित कर दिया था कि मिश्रित यूरेनियम में पाया जाने वाला अज्ञात तत्व ‘पिचब्लेंड’ नामक खनिज में भी मौजूद होता है। परंतु पिचब्लेंड की कीमत बहुत ज्यादा होने के कारण वे उसे खरीदने में असमर्थ थीं। ऐसे वक़्त में ऑस्ट्रिया की सरकार ने शोध कार्य को आगे बढ़ाने हेतु क्यूरी दंपति को भेंट के तौर पर एक टन पिचब्लेंड देने की स्वीकृति दे दी। इसके बाद बड़े-बड़े बर्तनों में कई टन रसायनिक तत्वों को उबालने और उन्हें शुद्ध करने की प्रक्रिया आरंभ हुई। लगातार कई महीनों तक उबलते हुए रसायनों की भाप के बीच रहने की वजह से मेरी को टी.बी. और निमोनिया जैसी बीमारियाँ हो गईं। अत्यधिक शारीरिक मेहनत के पश्चात् आखिरकार मेरी ने पोलोनियम नाम के तत्व को ढूँढ निकाला। इसके कुछ ही महीनों के बाद उन्होंने रेडियम का भी पता लगा लिया। उनका यह संपूर्ण अनुसंधान कार्य अटूट धैर्य, कड़ी मेहनत और बलिदान की एक अनोखी मिसाल है।

८ । मेरी क्यूरी की खोज मानव समाज के लिए किस तरह लाभकारी सिद्ध हुई ?

उत्तर: मेरी क्यूरी द्वारा किए गए आविष्कार मनुष्य जाति के लिए बहुत ही लाभदायक साबित हुए। रेडियम की खोज चिकित्सा जगत और रोगों के उपचार की दिशा में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुई। साझा तौर पर खोजी गई रेडियोधर्मी किरणों के जरिए हीरे के असली या नकली होने का पता लगाना मुमकिन हो पाया। इन्ही किरणों की बदौलत इंसान के शरीर के अंदरूनी हिस्सों को देखना भी संभव हो सका। इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि रेडियम का उपयोग कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने में भी अत्यंत प्रभावशाली है। पहले विश्व युद्ध के वक़्त मेरी ने अपनी पुत्री आइरीन के सहयोग से एक सचल एक्स-रे इकाई स्थापित की तथा खुद सेविका बनकर घायल सैनिकों का उपचार करके उनकी जान बचाई।

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Note – If you find any mistakes in this chapter, please let us know or correct them yourself while reading. Thank you!
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৩ (मैडम मेरी क्यूरी) – সঘনাই সোধা প্ৰশ্ন (FAQs)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী অধ্যায় ৩ পাঠটিৰ নাম কি?
শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ তৃতীয় অধ্যায়টিৰ নাম হ’ল ‘मैडम मेरी क्यूरी’ (মেডাম মেৰী কিউৰী)।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কি কি অন্তৰ্ভুক্ত আছে?
ইয়াত মূল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ সকলো প্ৰশ্নোত্তৰ, পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন, MCQ আৰু পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণৰ সম্পূৰ্ণ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
এই সমাধানসমূহ নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা হৈছেনে?
হয়, এই সকলোবোৰ সমল শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰম আৰু নিৰ্দেশনা অনুসৰি প্ৰস্তুত কৰা হৈছে।
পৰীক্ষাৰ বাবে অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু MCQ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছেনে?
হয়, পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতিৰ সুবিধাৰ্থে পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নৰ উপৰিও গুৰুত্বপূৰ্ণ অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) ইয়াত সন্নিৱিষ্ট কৰা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰিব পাৰে।

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