Class 8 Hindi Chapter 4 – जलाशय के किनारे कुहरी थी (জলাশয় কে কিনাৰে কুহৰী থী) – All Textual Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan (শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন)
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৪ – जलाशय के किनारे कुहरी थी (জলাশয় কে কিনাৰে কুহৰী থী) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (Sankardev Sishu Vidya Niketan)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ চতুৰ্থ অধ্যায় ‘जलाशय के किनारे कुहरी थी’ এখন অতি সুন্দৰ প্ৰকৃতি বিষয়ক কবিতা। শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 4 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions), বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) আৰু ব্যাকৰণৰ পুংখানুপুংখ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ সহজ, নিৰ্ভুল আৰু সম্পূৰ্ণ পৰীক্ষামুখীভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে।
‘जलाशय के किनारे कुहरी थी’ নামৰ এই পাঠটিত প্ৰকৃতিৰ অপৰূপ সৌন্দৰ্য আৰু কুঁৱলীসনা পুৱাৰ এক মনোৰম বৰ্ণনা দাঙি ধৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই কবিতাৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু প্ৰকৃতিৰ সৈতে সম্পৰ্ক বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে প্ৰস্তুতি চলাব পাৰে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- কবিতাটিৰ সাৰাংশ, প্ৰকৃতিৰ বৰ্ণনা আৰু কবিৰ অনুভৱৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA) আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
- দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
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শংকৰদেৱ বিদ্যা নিকেতন, অষ্টম শ্ৰেণী: হিন্দী
जलाशय के किनारे कुहरी थी
পাঠভিত্তিক প্রশ্নোত্তৰ
१। (क) आम की डाल कहाँ आई हुई थी ?
(i) जलाशय के किनारे
(ii) पानी पर
(iii) नारियल के पेड़ पर
(iv) ताड़ के पेड़ पर
उत्तरः पानी पर।
(ख) किसके दल यहाँ-वहाँ चमक रहे थे?
(i) जुगनूँ के
(ii) पपीहा के
(iii) स्यार के
(iv) कोयल के
उत्तरः जुगनूँ के।
(ग) लहरें कहाँ उठ रही थी ?
(i) नदी में
(ii) जलाशय में
(iii) आकाश में
(iv) सागर में
उत्तरः जलाशय में।
३। (क) कुहासा कहाँ छाया हुआ था ?
उत्तरः कोहरा जलाशय के तट पर फैला हुआ था।
(ख) हवा में किसकी सुगंध मिली हुई थी ?
उत्तरः वायु में जंगल की महक घुली हुई थी।
(ग) पेड़ो की ओट में छिपकर कौन गा रहा था ?
उत्तरः वृक्षों की आड़ में छुपकर पपीहा गीत गा रहा था।
(घ) तारे कब छिप गए?
उत्तरः जैसे ही सवेरे का प्रकाश फैला, वैसे ही तारे अदृश्य हो गए।
(ङ) तारा कहाँ चमकने लगा ?
उत्तरः तारा मन (हृदय) के भीतर जगमगाने लगा।
३। (क) जलाशय के किनारे घना अंधकार क्यों छाया हुआ था ?
उत्तरः सरोवर के तट पर कोहरा फैला हुआ था। इसके साथ ही हर ओर घने पत्तों का आवरण था। फलों से झुकी आम की डाल भी जल के ठीक ऊपर तक आ गई थी। इन्ही कारणों से जलाशय के तट पर गहरा अँधेरा व्याप्त था।
(ख) सुबह प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन होते है ?
उत्तरः प्रातःकाल होने पर आसमान से तारे गायब हो जाते हैं और तालाब के जल में लहरें उठनी शुरू हो जाती हैं।
छायावादी युग के प्रमुख कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ माने जाते हैं। इनका जन्म सन् 1896 में पश्चिम बंगाल राज्य के मेदिनीपुर जिले में स्थित महिषादल नामक स्थान पर हुआ था। निराला जी ने काव्य, कथा, उपन्यास और जीवन-चरित्र जैसी अनेक साहित्यिक विधाओं पर अपनी लेखनी चलाई है। इन्होंने ‘समन्वय’, ‘मतवाला’ तथा ‘माधुरी’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन कार्य भी सँभाला था। ‘अनामिका’, ‘परिमल’, ‘गीतिका’, ‘तुलसीदास’, ‘बेला’, ‘कुकुरमुत्ता’, ‘नए पत्ते’ और ‘अपरा’ इनकी कुछ विशेष काव्य-कृतियाँ हैं। सन् 1961 में निराला जी का स्वर्गवास हो गया।
४। जलाशय के किनारे कुहरी थी कविता का सारांश लिखो।
उत्तरः ‘जलाशय के किनारे कुहरी थी’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की रची हुई प्रकृति से जुड़ी एक सुंदर कविता है। इस कविता में मुख्य रूप से शाम के वक़्त के प्राकृतिक सौंदर्य का मनमोहक चित्रण किया गया है। तालाब के तट पर हर ओर कोहरा छाया हुआ था और घने पत्तों का घेरा बना हुआ था। साथ ही, किनारे पर मौजूद आम के पेड़ की भारी डाल झुककर पानी की सतह तक पहुँच गई थी। इसी वजह से सरोवर के आस-पास काफी घना अँधेरा फैला हुआ था। उस शांत और सूने तट पर सिर्फ जुगनुओं के झुंड इधर-उधर अपनी रोशनी बिखेर रहे थे। उस दौरान जंगल की खुशबू से भरी मलय पवन चल रही थी, जिसकी वजह से नारियल के वृक्ष एक कतार में झूमते हुए प्रतीत हो रहे थे। वहीं, ताड़ का पेड़ एक मनुष्य की तरह खड़ा होकर इन सभी दृश्यों को निहार रहा था, जो कि कवि द्वारा किया गया प्रकृति का सुंदर मानवीकरण है। ऐसे समय में वृक्ष की डाल के पीछे छिपकर पपीहा अपनी आवाज़ लगा रहा था और सियार भी आज़ाद होकर स्वच्छंद भाव से घूम रहे थे। फिर समय आने पर प्रकाश फैलता है और आसमान के सारे तारे ओझल हो जाते हैं। तालाब के पानी में लहरें हिलोरे लेने लगती हैं, जिससे उनकी आवाज़ हर दिशा में गूँजने लगती है और आसमान के तारे हृदय में जगमगा उठते हैं।
५। ऋतु परिवर्तन से मानव जीवन पर गहरा असर पड़ता है इस कथन पर पाँच पंक्तिया लिखो।
उत्तरः मौसम के बदलाव का मनुष्य के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव होता है। यह ऋतुओं का बदलना हमारी धरती का एक शाश्वत सत्य माना गया है। मौसम में होने वाले इन्हीं बदलावों के आधार पर ही लोगों के वेशभूषा, खान-पान और सांस्कृतिक रीति-रिवाज़ अलग-अलग पाए जाते हैं। इसी कारण से हर क्षेत्र और बदलते मौसम के मुताबिक लोग तरह-तरह के वस्त्र धारण करते हैं। हमारे देश के कई हिस्सों में लोगों का मुख्य भोजन भी भिन्न है; कहीं लोग ज़्यादा चावल खाते हैं तो कहीं मुख्य रूप से रोटी खाई जाती है। इसके पीछे भी ऋतु परिवर्तन का ही मुख्य योगदान है। इन बदलती हुई ऋतुओं की वजह से ही हम पूरे साल में अलग-अलग समय पर विभिन्न प्रकार के त्योहार और उत्सव मनाते हैं।




