Class 8 Hindi Chapter 5 – उससे न कहना (উচচে ন কহনা) – All Textual Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan (শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন)
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৫ – उससे न कहना (উচচে ন কহনা) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (Sankardev Sishu Vidya Niketan)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ পঞ্চম অধ্যায় ‘उससे न कहना’ এখন অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু সংবেদনশীল গল্প। শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 5 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions), বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) আৰু ব্যাকৰণৰ পুংখানুপুংখ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ সহজ, নিৰ্ভুল আৰু সম্পূৰ্ণ পৰীক্ষামুখীভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে।
‘उससे न कहना’ নামৰ এই পাঠটিত মানৱীয় প্ৰমূল্যবোধ, গভীৰ অনুভৱ আৰু সম্পৰ্কৰ মাজত থকা সংবেদনশীলতাৰ এক সুন্দৰ নিদৰ্শন দাঙি ধৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু তাৎপৰ্য বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে প্ৰস্তুতি চলাব পাৰে।
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শংকৰদেৱ বিদ্যা নিকেতন, অষ্টম শ্ৰেণী: হিন্দী
उससे न कहना
পাঠভিত্তিক প্রশ্নোত্তৰ
१। (क) प्रस्तुत एकांकी में कुल कितने पात्र है? सभी पात्रों के नाम लिखो।
उत्तर: इस एकांकी में मुख्य रूप से तीन पात्र शामिल हैं। इन तीनों पात्रों के नाम इस प्रकार हैं- बलवीर, लाजवंती और रुक्मिणी।
(ख) बलवीर और लाजवंती में किस बात पर बहस हो रही थी ?
उत्तर: लाजवंती और बलवीर के बीच घरेलू कामकाज और सेना में शामिल होने के विषय को लेकर बहस चल रही थी।
(ग) लाजवंती बलवीर को फौज में भर्ती होने से. क्यों रोक रही थी ?
उत्तर: यदि बलवीर सेना में चला गया, तो घर के कार्यों में लाजवंती का हाथ बँटाने वाला कोई नहीं बचेगा। इसके अतिरिक्त, बलवीर का बड़ा भाई पहले से ही फौज में है और उसकी कोई भी कुशल-क्षेम अब तक नहीं मिली है। इन्हीं कारणों से लाजवंती उसे सेना में जाने से मना कर रही थी।
(घ) बलवीर के पिता की मृत्यु केसे हुई थी ?
उत्तर: अंग्रेजों के विरुद्ध हुए युद्ध में सीने पर पूरी सात गोलियाँ लगने के कारण बलवीर के पिताजी वीरगति को प्राप्त हुए थे।
(ङ) बलवीर किसलिए फौज में भर्ती होना चाहता था ?
उत्तर: बलवीर अपनी मातृभूमि से गहरा प्रेम करता था और उसके सारे मित्र सेना में जा रहे थे। इसी वजह से बलवीर भी देश की सेवा हेतु फौज में शामिल होने का इच्छुक था।
(च) हिन्दुस्तान पर किसने हमला बोल दिया था?
उत्तर: भारतवर्ष पर चीन की सेना ने आक्रमण कर दिया था।
(छ) बलवीर को फौज में भर्ती होने से रोकने के लिए लाजवंती ने क्या सोच रखा था ?
उत्तर: बलवीर को सेना में जाने से रोकने के उद्देश्य से लाजवंती ने उसकी शादी कर देने का विचार बना लिया था।
(ज) रुक्मिणी ने बलवीर को क्या खबर दी थी?
उत्तर: रुक्मिणी ने बलवीर को यह दुःखद समाचार सुनाया कि उसका बड़ा भाई शम्मी लड़ाई के मैदान में वीरगति को प्राप्त हो गया है।
(झ) बलवीर ने रुक्मिणी को बड़े भाई के शहीद हो जाने की बात माँ लाजवंती से कहने से मना क्यों किया था?
उत्तर: बलवीर ने रुक्मिणी को अपने बड़े भाई के वीरगति प्राप्त होने की खबर माँ लाजवंती को बताने से इसलिए रोका था, क्योंकि उसे डर था कि उसकी माँ अपने जेठे पुत्र के निधन का यह गहरा सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकेगी।
(ञ) लाजवंती कुएँ पर पानी भरने जाकर क्या कर आई थी ?
उत्तर: कुएँ से पानी लाने के बहाने जाकर लाजवंती नंबरदार के यहाँ अपने छोटे पुत्र बलवीर का नाम सेना के लिए दर्ज करवा आई थी।
(ट) बलबीर ने फौज में भर्ती होने का इरादा क्यों बदल दिया ?
उत्तर: बलवीर को यह सूचना मिल चुकी थी कि उसका बड़ा भाई शम्मी रणभूमि में शहीद हो गया है। ऐसे में अपनी माँ का सहारा बनने और उनकी देखभाल करने वाला उसके सिवा और कोई नहीं बचा था। इसी कारण से बलवीर ने सेना में जाने का अपना फैसला बदल लिया।
(ठ) लाजवंती को उसके बड़े बेटे के शहीद होने के समाचार कैसे प्राप्त हुए?
उत्तर: जिस समय लाजवंती कुएँ की ओर पानी लेने जा रही थी, उसी बीच रास्ते में डाकिए (तारवाले) ने उसे एक तार थमाया, जिसमें शम्मी के वीरगति प्राप्त करने की सूचना लिखी थी। इसी तरह लाजवंती को अपने बड़े पुत्र के शहीद होने का संदेश मिला।
२। प्रस्तुत एकांकी की शीर्षक उससे न कहना सार्थक है या नही ?
उत्तर: रचनाकार के लिए अपनी किसी भी रचना का शीर्षक अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। प्रायः एकांकी या नाटक का नाम उसके मुख्य पात्रों या कहानी के मूल भाव को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। एक शीर्षक की सार्थकता इस बात में निहित है कि वह पाठकों के भीतर कितनी उत्सुकता जगा पाता है। जब किसी शीर्षक को पढ़कर पाठक के मन में उस रचना को पढ़ने की ललक पैदा होती है, तब उस शीर्षक का महत्त्व और अधिक हो जाता है।
इस आधार पर देखा जाए तो प्रस्तुत एकांकी का नाम ‘उससे न कहना’ पूरी तरह से उचित और सार्थक है। यह शीर्षक पाठकों के हृदय में कौतूहल और रहस्य की भावना जगाता है। इसे पढ़ते ही शुरुआत में ही लोगों के अंदर यह जानने की प्रबल इच्छा उत्पन्न हो जाती है कि आखिर लेखक इसके द्वारा क्या संदेश देना चाहते हैं। मिसाल के तौर पर, बलवीर अपनी ताई रुक्मिणी से कहता है कि “ताई, उससे बिल्कुल जिक्र न करना।” वहीं दूसरी तरफ, लाजवंती भी शम्मी के बलिदान की बात अपने छोटे बेटे बलवीर से छिपा लेती है और रुक्मिणी से आग्रह करती है कि “देखो बल्ली अभी घर लौटेगा, उससे न कहना, मेरा बेटा यह चोट नहीं सह सकेगा।”
इस तरह इस एकांकी के नाम का रहस्य इसके खत्म होने तक बरकरार रहता है और यह पाठकों को पूरी तरह से भावुक कर देता है।
३। बलवीर और लाजवंती की चारित्रिक विशेषताओं पर चर्चा करो।
उत्तर: बलवीर का चरित्र-चित्रण: इस एकांकी ‘उससे न कहना’ का मुख्य पुरुष पात्र और नायक बलवीर ही है। वह एक युवा लड़का है, जिसे घर के कामकाज में बिल्कुल भी रुचि नहीं है। वह देश-सेवा के उद्देश्य से सेना में शामिल होना चाहता है। हालांकि, उसकी माता लाजवंती उसे इस कदम को उठाने से रोकती है, क्योंकि उसका बड़ा भाई पहले से ही सीमा पर है और उसकी कोई खोज-खबर नहीं है।
बलवीर के भीतर गहरी देशभक्ति कूट-कूट कर भरी है। जब शत्रुओं ने भारत पर हमला किया, तो वह अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए फौज में जाने को तत्पर हो जाता है। उसका कथन है कि “…हमारे देश की पवित्र धरती को दुश्मन रौंदता चला जा रहा है, माँ, तू मुझे यों बाँधकर न रख।” वह सेना में जाने की ज़िद को लेकर अपनी माता से तर्क-वितर्क भी करता है।
इसके साथ ही बलवीर बात करने में निपुण (वाक्पटु) और अत्यंत भावुक हृदय वाला व्यक्ति है। वह माँ की हर बात का जवाब बड़ी होशियारी से देता है। जब माँ उसे फौज में जाने से मना करती है, तो वह गुस्से में बोल पड़ता है कि यदि उसे सेना में जाने की अनुमति नहीं मिली, तो वह कहीं और चला जाएगा क्योंकि इस गाँव में उसका मन नहीं लगेगा। इसके बावजूद, वह अपनी माँ से अगाध प्रेम करता है। जब उसे अपने बड़े भाई के वीरगति प्राप्त होने की सूचना मिलती है, तो वह तुरंत सेना में जाने का विचार त्याग देता है ताकि वह माँ के पास रहकर उनकी देखभाल कर सके। मातृभूमि के प्रति अपने फर्ज़ से ज़्यादा उसे अपनी माँ का दुःख बड़ा लगता है और वह भावुक होकर कहता है, “माँ, मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊँगा। मैंने अपना इरादा बदल दिया है।”
लाजवंती का चरित्र-चित्रण: ‘उससे न कहना’ एकांकी की मुख्य महिला पात्र लाजवंती है। वह एक बहुत ही निडर, सौम्य, त्यागमयी और अपने कर्तव्यों का पालन करने वाली महिला है। देश की रक्षा की खातिर पहले उसके पति का बलिदान हुआ, फिर उसने अपने जेठे पुत्र को भी सेना में भेजा। बेटे के शहीद हो जाने की खबर सुनकर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और राष्ट्र की चिंता को सर्वोपरि मानते हुए अपने छोटे बेटे बलवीर को भी फौज में जाने की स्वीकृति दे दी।
उसे लगता है कि भगवान ने उस पर बड़े अत्याचार किए हैं, क्योंकि मातृभूमि की रक्षा में उसने पति और पुत्र दोनों को गँवा दिया। जब विदेशी सेना ने आक्रमण किया, तो भारत-चीन के रिश्तों पर अफ़सोस जताते हुए वह कहती है, “हिंदी-चीनी भाई-भाई अभी कल की बात है। गली-गली बच्चे यही नारे लगाते थे।” लाजवंती के अंदर भी सच्चा देशप्रेम समाहित है। जब संकट के समय सरकार सोने का दान माँगती है, तो वह अपने स्वर्गीय पति की निशानी, सोने के कंगन, राष्ट्रीय कोष में दान करने को तैयार हो जाती है। कंगन सौंपते हुए वह कहती है: “ले बेटा, मेरे ये कंगन फंड में दे दे, तेरे बाप की निशानी थी।”
शुरुआत में जिस बलवीर को वह फौज में जाने से रोक रही थी, बाद में देशहित को सर्वोपरि मानते हुए वह उसे भी सेना में जाने के लिए राजी हो जाती है। रुक्मिणी के समझाने पर वह गर्व से कहती है, “ताकि जो काम बड़े से अधूरा रह गया, उसे छोटा पूरा कर सके।”
कहानी के अंत में लाजवंती बहुत ही मार्मिक तरीके से अपने बड़े बेटे शम्मी के शहादत की खबर छोटे बेटे बलवीर से छिपा जाती है और मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने दूसरे बेटे को भी सहर्ष सेना में भर्ती करा देती है।
४। नीचे दिए गए वाक्यो को पूरा करो :
(क) घर का काम थोड़ा है।
(ख) मैंने बड़े बेटे को फौज में भेजा।
(ग) हमारे देश की पवित्र धरती को बैरी रौंदता चला जा रहा है।
(घ) मेरे देश के सूरमा जा रहे हैं।
(ङ) मैंने तुम्हारे लिए सरसों का साग बनाया है।
(च) वह अपने देश के काम आने के लिए जान पर खेल गया।
(छ) इनमें अनेक बहनों के भाई हैं।
इस संपूर्ण एकांकी में देशभक्ति की प्रबल भावना को बहुत ही सुंदर ढंग से उभारा गया है। राष्ट्र की रक्षा के लिए लोग किस तरह अपने प्राणों की बाजी लगाकर हँसते-हँसते आगे आते हैं, इसका यह एक जीवंत प्रमाण है। हमें अपनी मातृभूमि की सुरक्षा करने के लिए कभी भी कदम पीछे नहीं खींचने चाहिए, यही महान प्रेरणा हमें इस पाठ से मिलती है।




