Class 8 Hindi Chapter 6 भारतीय संगीत की एक झलक Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan | New Syllabus

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Class 8 Hindi Chapter 6 – भारतीय संगीत की एक झलक (ভাৰতীয় সংগীত কী এক ঝলক) – All Textual Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan (শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন)

অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৬ – भारतीय संगीत की एक झलक (ভাৰতীয় সংগীত কী এক ঝলক) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (Sankardev Sishu Vidya Niketan)

অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ ষষ্ঠ অধ্যায় ‘भारतीय संगीत की एक झलक’ এখন অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু জ্ঞানৱৰ্ধক পাঠ। শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 6 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions), বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) আৰু ব্যাকৰণৰ পুংখানুপুংখ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ সহজ, নিৰ্ভুল আৰু সম্পূৰ্ণ পৰীক্ষামুখীভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে।

‘भारतीय संगीत की एक झलक’ নামৰ এই পাঠটিত ভাৰতীয় সংগীতৰ গৌৰৱময় ইতিহাস, ইয়াৰ প্ৰকাৰ, বিভিন্ন বাদ্যযন্ত্ৰ আৰু প্ৰসিদ্ধ সংগীত সাধকসকলৰ বিষয়ে সুন্দৰভাৱে বৰ্ণনা কৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ জৰিয়তে আমাৰ চহকী সাংস্কৃতিক ঐতিহ্যৰ বিষয়ে বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে প্ৰস্তুতি চলাব পাৰে।

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এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:

  • পাঠটিৰ সাৰাংশ, ভাৰতীয় সংগীতৰ ইতিহাস আৰু ইয়াৰ গুৰুত্বৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
  • শব্দাৰ্থ, অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA) আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
  • দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
  • পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ আৰু ভাষিক জ্ঞানৰ সঠিক ধাৰণা।
  • নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ অতিৰিক্ত প্ৰশ্নসমূহৰ লগতে শেহতীয়া আৰ্হিৰ MCQ প্ৰশ্নৰ সমাধান।

অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:

  • শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
  • ১০০% নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ কৰিব পৰাকৈ সৰল ভাষাত লিখা উন্নত মানৰ নোটছ (Class 8 Hindi Notes)।
  • পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
  • পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন আৰু MCQ-ৰ বিশেষ সংকলন।

ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।

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Chapter 6 भारतीय संगीत की एक झलक

 শংকৰদেৱ বিদ্যা নিকেতন, অষ্টম শ্ৰেণী: হিন্দী

অধ্যায়-6                                                                       অস্পিন একাডেমী

भारतीय संगीत की एक झलक

পাঠভিত্তিক প্রশ্নোত্তৰ

१। निम्नलिखित प्रश्नों के नीचे दिए गए उत्तरों में से एक सही है। सही उत्तर का चयन करो :

(क) “दिल हुम हुम करे घबराए …. बरसाए।” इस गीत के रचयिता हैं —

(i) लता मंगेशकर

(ii) भूपेन हज़ारिका

(iii) किशोर कुमार

(iv) सोनू निगम

उत्तरः (ii) भूपेन हज़ारिका

(ख) अकबर के राजदरबार के संगीतज्ञ थे —

(i) तुलसीदास

(ii) कबीर

(iii) तानसेन

(iv) सूरदास

उत्तरः (iii) तानसेन

(ग) भारतीय संगीत की शुरुआत कब हुई थी ?

(i) मध्यकाल से

(ii) आधुनिक काल से

(iii) वैदिक काल से

(iv) मुगल काल से

उत्तरः (iii) वैदिक काल से

(घ) पं. रविशंकर किस वाद्य के श्रेष्ठ कलाकार हैं ?

(i) तबला

(ii) बांसुरी

(iii) हारमोनियम

(iv) सितार

उत्तरः (iv) सितार

(ङ) भारतीय संगीत की कितनी प्रचलित धाराएं हैं ?

(i) एक

(ii) दो

(iii) तीन

(iv) चार

उत्तरः (ii) दो 

२। (क) आचार्य शारंगदेव के अनुसार संगीत की परिभाषा क्या है ।

उत्तर: आचार्य शार्ङ्गदेव ने संगीत को परिभाषित करते हुए कहा है “गीतं, वाद्यं तथा नृत्यं, त्रयं संगीतमुच्यते।” इसका तात्पर्य यह है कि गायन, वादन और नृत्य—इन तीनों कलाओं के सम्मिलित रूप को ही संगीत कहा जाता है।

(ख) भारतीय शास्त्रीय संगीत की कितनी धाराएँ है ? ये क्या क्या है ?

उत्तर: भारतीय शास्त्रीय संगीत को मुख्य रूप से दो धाराओं में बाँटा गया है। ये धाराएँ हैं- हिंदुस्तानी या उत्तर भारतीय संगीत प्रणाली, और कर्नाटकी या दक्षिण भारतीय संगीत प्रणाली।

(ग) हिन्दुस्तानी संगीत की धारा का प्रचलन कहाँ-कहाँ है ?

उत्तर: हिंदुस्तानी संगीत प्रणाली का विस्तार मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में पाया जाता है।

(घ) दक्षिण भारतीय संगीत क्या है? इस धारा का संगीत कहाँ कहाँ प्रचलित है ?

उत्तर: जो संगीत प्रणाली दक्षिण भारत के राज्यों में गाई-बजाई जाती है, उसे दक्षिण भारतीय संगीत कहते हैं। इस शैली में स्वरों का उच्चारण हिंदुस्तानी संगीत से भिन्न होता है। इस संगीत धारा के अधिकतर गीत तमिल, तेलुगु और मलयालम जैसी भाषाओं में रचित होते हैं।

(ङ) नेहा ने शास्त्रीय संगीत सीखने का निश्चय क्यों किया ?

उत्तर: स्नेहा के साथ वार्तालाप के दौरान नेहा को यह ज्ञान प्राप्त हुआ कि शास्त्रीय संगीत हमारे भारतीय संगीत का एक बेहद अटूट और अनिवार्य हिस्सा है। इसी कारण से नेहा ने शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण लेने का दृढ़ संकल्प लिया।

(च) सत्रीया नृत्य के प्रवर्तक कौन है? इसे लोकप्रिय बनाने में किन कलाकारों का योगदान है ?

उत्तर: सत्रिया नृत्य की शुरुआत करने वाले प्रवर्तक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी हैं। इस नृत्य शैली को जन-जन तक पहुँचाने और लोकप्रिय बनाने में प्रसिद्ध नर्तक मणिराम बायन मुक्तियार, रसेश्वर सैकिया ‘बोरबायन’ तथा नृत्याचार्य जतिन गोस्वामी जैसे श्रेष्ठ कलाकारों का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

३। टिप्पणी लिखो :

(क) बिहु

उत्तर: बिहू हमारे असम राज्य का प्रमुख राष्ट्रीय पर्व है। बिहू के गीत और इसके नृत्य, ये दोनों ही लोक संगीत की श्रेणी में गिने जाते हैं। जिस प्रकार बाँसुरी वादन में हरिप्रसाद चौरसिया का नाम है, ठीक उसी तरह असम के प्रसिद्ध ढोल वादक मघाई ओझा और सोमनाथ बोरा ओझा जैसे महान कलाकारों ने असमिया संस्कृति के इस मुख्य अंग ‘बिहू’ को पूरे विश्व स्तर पर एक विशेष पहचान दिलाई है।

(ख) संगीत में वाद्य का स्थान

उतर: संगीत के क्षेत्र में वाद्य यंत्रों की भूमिका अत्यंत विशिष्ट होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वाद्य यंत्र ही गायन के स्वरों, रागों और ताल को और अधिक मीठा बना देते हैं। बिना साज़ के गायन और नृत्य दोनों ही अपूर्ण माने जाते हैं। आमतौर पर संगीत कला में तबला, हारमोनियम, सितार, सारंगी, मृदंग, खोल, पखावज, वायलिन, तानपुरा, वीणा और बाँसुरी जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है। इनकी शुरुआत वैदिक काल से ही हो चुकी थी। परंतु तेरहवीं और चौदहवीं शताब्दी के आसपास इनमें बदलाव आने शुरू हो गए। मुख्य रूप से, उत्तर भारत में मुगलों के शासनकाल में भारतीय संगीत कला के भीतर कई बड़े बदलाव देखने को मिले। इसका कारण यह था कि मुगल शासक संगीत और राग-रागनियों को बहुत अधिक महत्त्व दिया करते थे। मिसाल के तौर पर, बादशाह अकबर के दरबार में महान संगीतकार तानसेन ने संगीत को एक नई दिशा प्रदान की। आगे चलकर भारतीय संगीत शैली पर अरब और ईरान जैसे देशों के संगीत का भी गहरा असर पड़ा। इसी प्रकार से भारतीय संगीत निरंतर विकसित होता चला गया।

(ग) सत्रीया नृत्य

उत्तर: हमारे असम राज्य में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव जी द्वारा स्थापित किए गए सत्रों में किए जाने वाले ‘सत्रिया नृत्य’ को वर्ष 2000 ई. में भारत के शास्त्रीय नृत्य का दर्जा प्राप्त हुआ है। महापुरुष शंकरदेव जी द्वारा शुरू किए गए इस सत्रिया नृत्य की प्रसिद्धि और इसका महत्त्व आज सिर्फ हमारे देश भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बढ़ता जा रहा है। मणिराम बायन मुक्तियार, रसेश्वर सैकिया बोरबायन और नृत्याचार्य जतिन गोस्वामी जैसे सुप्रसिद्ध कलाकारों की कड़ी मेहनत की बदौलत ही आज हमारी इस सत्रिया नृत्य कला को पूरे संसार में इतना ऊँचा और बड़ा सम्मान हासिल हुआ है।

(घ) उत्तर भारतीय संगीत में और दक्षिण भारतीय संगीतमें अंतरः उत्तर भारतीय संगीत प्रणाली और दक्षिण भारतीय संगीत प्रणाली के बीच प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं –

(क) उत्तर भारतीय संगीत शैली में स्वरों का गायन हिंदुस्तानी भाषाओं के अनुरूप किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से ब्रज, हिंदी और उर्दू आदि भाषाओं का प्रयोग होता है। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण भारतीय संगीत में स्वरों का गायन मुख्य तौर पर तमिल, तेलुगु और मलयालम जैसी दक्षिणी भाषाओं के माध्यम से किया जाता है।

(ख) उत्तर भारतीय (हिंदुस्तानी) संगीत मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में अधिक गाया-बजाया जाता है। जबकि दक्षिण भारतीय (कर्नाटकी) संगीत मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में काफी प्रचलित है।

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Note – If you find any mistakes in this chapter, please let us know or correct them yourself while reading. Thank you!
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৬ (भारतीय संगीत की एक झलक) – সঘনাই সোধা প্ৰশ্ন (FAQs)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী অধ্যায় ৬ পাঠটিৰ নাম কি?
শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ ষষ্ঠ অধ্যায়টিৰ নাম হ’ল ‘भारतीय संगीत की एक झलक’ (ভাৰতীয় সংগীত কী এক ঝলক)।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কি কি অন্তৰ্ভুক্ত আছে?
ইয়াত মূল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ সকলো প্ৰশ্নোত্তৰ, পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন, MCQ আৰু পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণৰ সম্পূৰ্ণ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
এই সমাধানসমূহ নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা হৈছেনে?
হয়, এই সকলোবোৰ সমল শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰম আৰু নিৰ্দেশনা অনুসৰি প্ৰস্তুত কৰা হৈছে।
পৰীক্ষাৰ বাবে অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু MCQ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছেনে?
হয়, পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতিৰ সুবিধাৰ্থে পাঠভিত্তিক প্ৰশ্নৰ উপৰিও গুৰুত্বপূৰ্ণ অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) ইয়াত সন্নিৱিষ্ট কৰা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰিব পাৰে।

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