Class 8 Hindi Chapter 13 दोहा- मुक्तावली Solutions | Assam Jatiya Bidyalaya
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৩ – दोहा- मुक्तावली সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (অসম জাতীয় বিদ্যালয় – Assamese Medium)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ ত্ৰয়োদশ অধ্যায় ‘दोहा- मुक्तावली’ অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে নীতিশিক্ষা, দোহা আৰু জ্ঞানবৰ্ধক বাৰ্তা বিষয়ক এটা অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ পাঠ। নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ শেহতীয়া নিৰ্দেশনা আৰু নতুন শৈক্ষিক নীতিৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 13 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন (Short Questions), দীঘলীয়া প্ৰশ্ন (Long Answers), MCQ আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
‘दोहा- मुक्तावली’ নামৰ এই পাঠটিত বিভিন্ন নীতিশ্লোক বা দোহার জৰিয়তে মানৱ জীৱনৰ নৈতিক মূল্যবোধ, সজ আচৰণ, পাৰদৰ্শিতা আৰু জ্ঞানৰ মহত্ত্বৰ বিষয়ে সুন্দৰভাৱে বৰ্ণনা কৰা হৈছে। পৰীক্ষাৰ্থীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ সাৰাংশ, দোহাৰ অৰ্থ (ভাৱাৰ্থ) আৰু শব্দাৰ্থ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই সমাধানসমূহত ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজতে বুজি পোৱাকৈ সৰল ৰূপত উত্তৰসমূহ প্ৰদান কৰা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- ‘दोहा- मुक्तावली’ পাঠৰ মূল সাৰাংশ, দোহাৰ ভাৱাৰ্থ আৰু নৈতিক শিক্ষাৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, ১ নম্বৰৰ অতি চমু প্ৰশ্ন আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্ভুল উত্তৰ।
- ৪-৫ নম্বৰৰ দীঘলীয়া প্ৰশ্ন আৰু প্ৰসংগ সংগতি দৰশাই ব্যাখ্যা কৰা প্ৰশ্নসমূহৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহুবিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) সমাধান।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ অংশৰ সঠিক আৰু সহজ সমাধান।
আমাৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% শুদ্ধ আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ বা আয়ত্ত কৰিব পৰাকৈ প্ৰস্তুত কৰা নোটছ।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ পৰীক্ষাৰ আৰ্হিৰ সৈতে সংগতি ৰাখি প্ৰস্তুত কৰা বিশেষ সংকলন।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উন্নতিৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি এই বিশেষ সমাধান আগবঢ়োৱা হৈছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত উৎকৃষ্ট নম্বৰ লাভ কৰক।
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Class 8: Hindi Elective
दोहा-मुक्तावली
TEXUAL SOLUTION
1. सपूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) कवि बिहारीलाल के आराध्य कौन हैं?
उत्तर : कवि बिहारीलाल जी के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण हैं।
(ख) किसके रंग में डूबने पर उज्ज्वल हुआ जा सकता है?
उत्तर : भगवान श्रीकृष्ण के ‘स्याम’ (सांवले/काले) रंग में डूबने (भक्ति करने) पर हमारा मन उज्ज्वल और पवित्र हो जाता है।
(ग) कवि रहीम ने धन किसलिए जमा करने को कहा है?
उत्तर : कवि रहीम जी का मानना है कि हमें धन का संचय गरीबों की भलाई और दूसरों का उपकार (परोपकार) करने के लिए करना चाहिए।
(घ) रहीम के अनुसार बड़े लोग कौन हैं?
उत्तर : रहीम के अनुसार वास्तव में बड़े लोग वे ही हैं, जो अपने धन और सामर्थ्य का उपयोग दूसरों के हित और कल्याण के लिए करते हैं।
(ङ) रहीम ने सूई को बड़ा कहा है या तलवार को ?
उत्तर: कवि रहीम ने सूई को बड़ा बताया है, क्योंकि उनका कहना है कि जहाँ सूई का काम होता है, वहाँ बड़ी तलवार भी कुछ नहीं कर सकती। इसलिए छोटी चीजों का भी अपना महत्त्व होता है।
(च) ‘सतसई’ का मतलब क्या है? ‘सतसई’ किसकी रचना है?
उत्तर : ‘सतसई’ का अर्थ है— सात सौ (700) दोहों का संग्रह। प्रसिद्ध ‘सतसई’ (बिहारी सतसई) कवि बिहारीलाल जी की उत्कृष्ट रचना है।
(छ) रहीम का सम्पूर्ण नाम क्या है?
उत्तर : कवि रहीम का पूरा नाम ‘अब्दुर्रहीम खानखाना’ था।
2. 25-30 शब्दों में उत्तर दो :
(क) कवि बिहारीलाल को कृष्ण का कौन-सा वेश प्रिय है?
उत्तर: कवि बिहारीलाल जी को श्रीकृष्ण का वह मनमोहक वेश अत्यंत प्रिय है, जिसमें उनके सिर पर मोर-मुकुट, कमर में करधनी (कमरबंद), हाथों में मुरली और गले में सुंदर मोतियों की माला सुशोभित हो।
(ख) कवि ने सोने को धतूरे से सौ गुना मादक, क्यों कहा है?
उत्तर : कवि के अनुसार धतूरा खाने से व्यक्ति नशे में डूबता है, किंतु सोना (धन-दौलत) तो इतना नशीला है कि उसे केवल पा लेने से ही इंसान घमंड में अंधा हो जाता है और अपना विवेक व मानवता भूल जाता है। इसलिए सोना धतूरे से सौ गुना अधिक मादक है।
(ग) रहीम के अनुसार गरीब का उपकार करनेवाला बड़े लोग है।स्पष्ट करो।
उत्तर : रहीम जी कहते हैं कि महान वही है जिसके हृदय में दया और उदारता हो। सच्चा बड़ा व्यक्ति वही है जो असहायों की मदद करे, ठीक वैसे ही जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गरीब और दीन मित्र सुदामा का उद्धार कर उन्हें अपने समान बना दिया था।
(घ) रहीम ने छोटे और बड़े लोगों से कैसा व्यवहार करने को कहा है?
उत्तर : रहीम जी का संदेश है कि हमें संसार के हर प्राणी से, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, समान भाव से व्यवहार करना चाहिए। हमें दूसरों की भलाई और गरीबों की सहायता करनी चाहिए। यही सच्ची मानवता की पहचान है।
(ङ) बिहारीलाल हिन्दी साहित्य के किस काल के कवि हैं? उनकी रचनाओं की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर : बिहारीलाल जी हिंदी साहित्य के ‘रीतिकाल’ के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषता यह है कि उन्होंने मुख्य रूप से प्रेम और श्रृंगार रस पर काव्य-रचना की है, साथ ही उनके दोहों में भक्ति और नीति की भी गहरी झलक मिलती है।
3. सप्रसंग व्याख्या करो :
(क) तरुवर फल नहीं खात है सम्पति संचहि सुजान ॥
उत्तर : प्रस्तुत दोहा हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘आओ हिन्दी सीखें (भाग चार)’ के पाठ ‘दोहा-मुक्तावली’ से लिया गया है। इसके रचयिता महान कवि रहीम हैं। इस दोहे के माध्यम से कवि परोपकार का संदेश देते हुए कहते हैं कि जिस प्रकार वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और नदियाँ व सरोवर अपना जल खुद नहीं पीते, बल्कि दूसरों को अर्पित कर देते हैं, ठीक उसी प्रकार ज्ञानी और सज्जन लोग धन का संचय केवल दूसरों की भलाई और परमार्थ के लिए ही करते हैं।
(ख) या अनुरागी चित्त की ……..त्यों त्यों उज्जलु होइ ॥
उत्तर : प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आओ हिन्दी सीखें (भाग चार)’ में संकलित पाठ ‘दोहा-मुक्तावली’ से लिया गया है। इसके रचयिता प्रसिद्ध कवि बिहारीलाल जी हैं। यहाँ कवि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का वर्णन करते हुए कहते हैं कि इस प्रेमी मन (चित्त) की गति समझना बहुत कठिन है। सामान्यतः काले रंग में डूबने से वस्तु काली होती है, परंतु यह मन जितना ही श्रीकृष्ण के ‘स्याम’ (सांवले/काले) रंग में डूबता है (भक्ति करता है), उतना ही इसके विकार दूर होते हैं और यह उज्ज्वल व पवित्र होता चला जाता है।
भाषा अध्ययन
लिंग-विचार
हम जानते हैं कि हिन्दी में सिर्फ दो ही लिंग होते हैं: पुंलिंग और स्त्रीलिंग। प्राणिवाचक अथवा अप्राणिवाचक सभी संज्ञा शब्द या तो पुंलिंग में आयेंगे अथवा स्त्रीलिंग में। दरअसल प्राणिवाचक संज्ञाओं में दो प्रकार के शब्द आते हैं। जो शारीरिक रूप से पुरुष जाति के हैं यानी पुंलिंग और जो स्त्री जाति के हैं, यानी स्त्रीलिंग। यथा—
शेर—शेरनी
घोड़ा—घोड़ी
पति—पत्नी आदि।
(क) ‘आ’ प्रत्यय जोड़ कर हम पुंलिंग से स्त्रीलिंग बना सकते हैं।
यथा :
छात्र – छात्रा
तनय – तनया
आचार्य – आचार्या
आत्मज – आत्मजा
महोदय – महोदया
प्रिय – प्रिया
(ख) हिन्दी के कुछेक पुंलिंग शब्दों में ‘ई’ प्रत्यय जोड़कर हम स्त्रीलिंग बना सकते हैं।
यथा :
नर – नारी
लड़का – लड़की
बेटा – बेटी
दादा – दादी
देव – देवी
मौसा – मौसी
(ग) हिन्दी में ‘इया’, ‘आइन’, ‘इन’ आदि प्रत्यय जोड़कर भी पुंलिंग से स्त्रीलिंग बनाया जा सकता है।
यथा :
चिड़ा – चिड़िया
बंदर – बंदरिया
पंडित – पंडिताइन
ठाकुर – ठकुराइन
सुनार – सुनारिन
नाती – नातिन
(घ) उसी तरह ‘नी’, ‘इनी’, ‘इणी’, ‘आणी’, ‘इका’ आदि प्रत्यय जोड़कर भी पुंलिंग से स्त्रीलिंग बना सकते हैं।
यथा :
नी – मोर – मोरनी
इनी – हाथी – हथिनी
इणी – आज्ञाकारी – आज्ञाकारिणी
आनी – देवर – देवरानी
आणी – इन्द्र – इन्द्राणी
इका – सम्पादक – सम्पादिका आदि।
(ङ) प्रत्यय के अलावा हम ‘मान’ को ‘मती’, ‘वान’ को ‘वती’, ‘ता’ को ‘त्री’ कर पुंलिंग से स्त्रीलिंग बना सकते हैं।
यथा :
श्रीमान – श्रीमती
बुद्धिमान – बुद्धिमती
धनवान – धनवती
अभिनेता – अभिनेत्री
भगवान – भगवती
5. निम्नलिखित खाली जगहों में पाँच नित्य पुंलिंग शब्द और पाँच नित्य स्त्रीलिंग शब्द लिखो। नित्य पुंलिंग अथवा स्त्रीलिंग शब्दों का लिंग-परिवर्तन कैसे किया जाता है उदाहरण सहित बताओं :
नित्य पुंलिंग
१. मच्छर
२. खरगोश
३. तोता
४. चीता
५. गैंडा
नित्य स्त्रीलिंग
१. मछली
२. तितली
३. मैना
४. मक्खी
५. चील
लिंग परिवर्तन करो (नियम एवं उदाहरण)
नित्य पुंलिंग और नित्य स्त्रीलिंग शब्दों का लिंग परिवर्तन करने के लिए उनके आगे आवश्यकतानुसार ‘नर’ अथवा ‘मादा’ शब्द जोड़ दिया जाता है।
उदाहरण:
नर मच्छर – मादा मच्छर
नर मैना – मादा मैना
नर चीता – मादा चीता
नर छिपकली – मादा छिपकली
6. लिंग परिवर्तन करो:
अध्यापक, नायक, दास, नौकर, सेठ, ताऊ, सम्राट, बिलाव, साला, सत्यवान, धावक, तपस्वी, देवर, पड़ोसी, लाला, बाबू।
पुंलिंग. स्त्रीलिंग
अध्यापक — अध्यापिका
दास — दासी
सेठ — सेठानी
सम्राट — सम्राज्ञी
साला — साली (या सरहज)
धावक — धाविका
देवर — देवरानी
लाला — ललाइन
नायक — नायिका
नौकर — नौकरानी
ताऊ — ताई
बिलाव — बिल्ली
सत्यवान — सत्यवती
तपस्वी — तपस्विनी
पड़ोसी — पड़ोसिन
बाबू — बबुआइन




