Class 8 Hindi Chapter 3 चरित्र संगठन Solutions | Assam Jatiya Bidyalaya
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৩ – चरित्र – संगठन সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (অসম জাতীয় বিদ্যালয় – Assamese Medium)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ তৃতীয় অধ্যায় ‘चरित्र – संगठन’ অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এটা অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু আদৰ্শগত পাঠ। নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ শেহতীয়া নিৰ্দেশনা আৰু নতুন শৈক্ষিক নীতিৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 3 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন (Short Questions), দীঘলীয়া প্ৰশ্ন (Long Answers), MCQ আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
‘चरित्र – संगठन’ নামৰ এই পাঠটিত মানৱ জীৱনত সজ চৰিত্ৰ গঠন, নৈতিক মূল্যবোধ আৰু উন্নত ব্যক্তিত্বৰ গুৰুত্বৰ বিষয়ে সুন্দৰভাৱে আলোকপাত কৰা হৈছে। পৰীক্ষাৰ্থীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ সাৰাংশ, মূল বাৰ্তা আৰু শব্দাৰ্থ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই সমাধানসমূহত ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজতে বুজি পোৱাকৈ সৰল ৰূপত উত্তৰসমূহ প্ৰদান কৰা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- ‘चरित्र – संगठन’ পাঠৰ মূল সাৰাংশ, নৈতিক শিক্ষা আৰু চৰিত্ৰ গঠনৰ গুৰুত্বৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, ১ নম্বৰৰ অতি চমু প্ৰশ্ন আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্ভুল উত্তৰ।
- ৪-৫ নম্বৰৰ দীঘলীয়া প্ৰশ্ন আৰু মূলভাৱ প্ৰকাশ কৰা প্ৰশ্নসমূহৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহুবিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) সমাধান।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ অংশৰ সঠিক আৰু সহজ সমাধান।
আমাৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১00% শুদ্ধ আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ বা আয়ত্ত কৰিব পৰাকৈ প্ৰস্তুত কৰা নোটছ।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ পৰীক্ষাৰ আৰ্হিৰ সৈতে সংগতি ৰাখি প্ৰস্তুত কৰা বিশেষ সংকলন।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উন্নতিৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি এই বিশেষ সমাধান আগবঢ়োৱা হৈছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত উৎকৃষ্ট নম্বৰ লাভ কৰক।
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Class 8: Hindi Elective
चरित्र संगठन
TEXUAL SOLUTION
1. सही कथन के आगे (√)चिह्न और गलत कथन के. आगे(x) चिह्न लगाओ :
(क) मनुष्य की विशेषता उसके शरीर में है।
उत्तर : (x)
(ख) विद्या का मान सज्जन निर्णय करते हैं।
उत्तर : (√)
(ग) मनुष्य क मूल्य उसके चरित्र में है।
उत्तर : (√)
(घ) विनय मन का भूषण है।
उत्तर : (√)
(ङ) अभ्यास के लिए बाल्यकाल उपयुक्त है।
उत्तर : (√)
(च) विनयशील मनुष्य अभिमान के दोष से बचा नहीं रहता।
उत्तर : (x)
(छ) उदार पुरुष सदा दूसरों के विचारों का आदर करता है।
उत्तर : (√)
(ज) मेहनत करने वालों में कोई दैवी प्रभा नहीं रहती।
उत्तर : (x)
(झ) राजा हरिश्चन्द्र धैर्य का ज्वलंत उदाहरण है।
उत्तर : (√)
(ञ) सहकारिता से दूसरों को वंचित रखना कृतज्ञता है।
उत्तर : (x)
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) मनुष्य की विशेषता किसमें है?
उत्तर : मनुष्य की असली पहचान उसके उत्तम चरित्र में ही निहित है।
(ख) विद्या का भूषण क्या है?
उत्तर : विद्या का सच्चा आभूषण विनयशीलता है।
(ग) श्रीमद्भगवद्गीता में विनय के संबंध में क्या कहा गया है?
उत्तर : श्रीमद्भगवद्गीता के अंतर्गत विनय के विषय में श्रेष्ठ पुरुष को “विद्या-विनय सम्पन्न” बताया गया है।
(घ) विनय के अभाव में क्या प्रकट होता है?
उत्तर : विनयशीलता की कमी होने पर मनुष्य का खोखलापन स्पष्ट रूप से झलकता है।
(ङ) उदारता का अभिप्राय क्या है?
उत्तर : उदारता का अर्थ मात्र बिना संकोच के किसी को दान देना नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति सहृदय भावना रखना भी है।
(च) परम उदार लोगों की विशेषता क्या है?
उत्तर : अत्यंत उदार व्यक्तियों की मुख्य पहचान “उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना होती है।
(छ) विज्ञ लोगों को किससे दूर रहना चाहिए?
उत्तर : समझदार अथवा विज्ञ व्यक्तियों को हमेशा लालच से बचकर रहना चाहिए।
(ज) शक्ति-सम्पन्न और प्रभावशाली बनने का सामर्थ किसमें होता है?
उत्तर : जो मनुष्य लालच से दूर रहता है, उसी में शक्ति-सम्पन्न तथा प्रभावशाली बनने की क्षमता होती है।
(झ) दैर्य किसे कहते हैं?
उत्तर : विपत्तियों के समय अपने चित्त को शांत और स्थिर रखना ही धैर्य कहलाता है।
(ञ) श्रीरामचंन्द्रजी के जगद् बन्दनीय होने का कारण प्रस्तुत पाठ के आधार पर लिखो।
उत्तर : राज्याभिषेक की बात सुनकर श्रीराम को घमंड नहीं हुआ और वनवास मिलने पर वे निराश नहीं हुए, इसी समभाव के कारण वे विश्व-वंदनीय माने जाते हैं।
(ट) मनुष्य की एकता एवं समाज की स्थिति का मूल क्या है ?
उत्तर : मानव की आपसी एकता तथा सामाजिक सुदृढ़ता का मुख्य आधार सहकारिता ही है।
(ठ) सत्य बोलने के संबंध में चरित्रवान व्यक्ति को क्या करना चहिए ?
उत्तर : सच बोलने के विषय में एक चरित्रवान इंसान को अपनी आत्मा को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि वह निडर होकर सत्य प्रकट कर सके।
(ड) प्रस्तुत पाठ के अनुसार हमारा कर्त्तव्य क्या है?
उत्तर : जिन कार्यों से परहेज करना उचित हो उनसे दूर रहें, और जो कार्य अनिवार्य हों उन्हें भारी नुकसान सहकर भी पूर्ण करें। यही हमारा मुख्य दायित्व और कर्त्तव्यपरायणता है।
(ढ) कर्त्तव्य-पान के लिए क्या आवश्य है?
उत्तर : अपने कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वाह करने हेतु निरंतर अभ्यास करना नितांत आवश्यक है।
3. संक्षिप्त उत्तर दो:
(क) सच्चरित्र के लिए कैन-से गुण अवश्यक हैं? पाठ के आधर पर लिखो।
उत्तर : उत्तम चरित्र के निर्माण हेतु विनयशीलता, सहृदयता, लोभ से दूरी, सत्यवादिता, अपने वचनों का पालन तथा कर्त्तव्यनिष्ठा जैसे महान गुणों का होना बेहद जरूरी है।
(ख) ‘विद्या-विनय सम्पन्न’ का आशय स्पष्ट करते हुए यह बतओ कि चरित्र-निर्माण में विनय की क्या भूमिका है?
उत्तर : श्रीमद्भगवद्गीता में श्रेष्ठ व्यक्ति को ‘विद्या-विनय सम्पन्न’ माना गया है। यदि विद्या के साथ नम्रता न हो, तो वह ज्ञान व्यर्थ है। विनयशीलता न सिर्फ विद्या का, बल्कि धन और शक्ति का भी सच्चा आभूषण है। विनय के बिना इंसान का व्यक्तित्व पूरी तरह से खोखला प्रतीत होता है।
(ग) उदारता किस प्रकार चरित्र-निर्माम में सहायक बनती है?
उत्तर : एक उदार स्वभाव वाला व्यक्ति सदैव अन्यों की भावनाओं का सम्मान करता है तथा समाज में सेवा-भाव के साथ जीवन व्यतीत करता है। ऐसे परोपकारी लोगों के लिए ही “उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्” की उक्ति चरितार्थ होती है।
(घ) लालच के सन्दर्भ में ईसा और श्रीरामचंन्द्रजी के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर : ज्ञानी मनुष्य को हमेशा लोभ से बचना चाहिए। ईसाई धर्म के लोग लालच से दूर रहने हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि “हे प्रभु! मुझे परीक्षा में मत डाल।” वहीं श्रीराम के प्रसंग में बताया गया है कि उन्होंने विशाल साम्राज्य का मोह त्याग दिया, किंतु अपने कर्त्तव्य-पथ से कभी विमुख नहीं हुए।
(ङ) हमें अपनी आध्यात्मिकता का गौरव बनाये रखने में धैर्य किस प्रकार सहायता करता है?
उत्तर : अपनी आध्यात्मिक गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए धैर्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। संकटों का मजबूती से सामना करने में यह हमारी मदद करता है। हमें बाधाओं का डटकर मुकाबला करना चाहिए, क्योंकि विकट परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहना हमारी आत्मा की महानता को दर्शाता है।
(च) ‘आत्मा का उद्धार आत्मा से ही होता है’ इस सन्दर्भ में कर्त्तव्यपरायणता की क्या भूमिका है?
उत्तर : ‘आत्मा का उद्धार स्वयं आत्मा द्वारा होता है’, इसका अर्थ है कि हमें अपने दायित्वों से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए, चाहे संसार हमारी निंदा करे या प्रशंसा। कर्त्तव्य-निष्ठा से हमारे आत्म-गौरव में वृद्धि होती है। लोभ या आलस्यवश कर्म-पथ से भटकना ही असल पतन है। इसके लिए निरंतर अभ्यास आवश्यक है, जिससे हमारी आत्मा शुद्ध और उन्नत होकर प्रगति की ओर अग्रसर होती है।
4. भाषा-अध्ययन
(1) रखांकित शब्द का लिंग बदलकर खाली स्थान में लिखो
(क) विवाह में देवर के साथ —– ने भी नृत्य किया।
उत्तर: विवाह में देवर के साथ देवरानी ने भी नृत्य किया।
(ख) मौसी को देखकर —– नाचने लगा।
उत्तर: मौसी को देखकर मोर नाचने लगा।
(ग) दिल्ली को आते देखकर पहले —– भागा, फिर चूड़िया भागी।
उत्तर: दिल्ली को आते देखकर पहले चूहा भागा, फिर चूड़िया भागी।
(घ) सवेरे ने नाई से बाल कटवाए और प्रमिला ने —– से।
उत्तर: सवेरे ने नाई से बाल कटवाए और प्रमिला ने नाइन से।
(ड़) पंडिताइन ने सामान रखा और —– ने पूजा कराई।
उत्तर: पंडिताइन ने सामान रखा और पंडित ने पूजा कराई।
(II) लिंग-संबंधी असंगतियाँ दूर कर वाक्य फिर से लिखो :
(क) कवि कविता सुन रही है।
उत्तर: कवयित्री कविता सुन रही है।
(ख) वहाँ दो लड़कियाँ बैठे हैं।
उत्तर: वहाँ दो लड़कियाँ बैठी हैं।
(ग) मोहन बहुत अच्छी अभिनेत्री है।
उत्तर: मोहन बहुत अच्छा अभिनेता है।
(घ) गाय खेत में घुस गया।
उत्तर : बैल खेत में घुस गया।
(ङ) हमारे सम्राट अत्यंत विदुषी है।
उत्तर : हमारे सम्राट अत्यंत विद्वान हैं।
(III) अर्थ-भेद स्पष्ट करते हुए वाक्य बनाओ :
अंबर (आकाश) …………..
अंबर (वस्त्र) …………..
सोम (स्वर्ग) …………..
सोम (चंद्रमा) …………
दक्षिण (दाहिना) …………
दणिण (एक दिशा) ………..
योग (ध्यान) ………….
योग (जोड़) ……….
उत्तर :
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अंबर (आकाश) আকাশ अंबर (वस्त्र) কাপোৰ सोम (स्वर्ग) স্বর্গ सोम (चंद्रमा) জেন दक्षिण (दाहिना) বাঁও दणिण (एक दिशा) দিশ योग (ध्यान) মনোযোগ योग (जोड़) গণনা |
आकाश नीला है। शरीर ढकने के लिए वस्त्र आवश्यक हैं। इन्द्र स्वर्ग के राज हैं। चन्द्रमा की चाँन्दनी अनुठी होती है। दहिना अंग फड़क रहा है। एक दिशा दक्षिण भी है ध्यान लगाकर जाप करना चाहिए। एकसे दस तक जोड़कर दिखाओ । |




