Class 8 Hindi Chapter 5 शक्तिपीठ: कामाख्या Solutions | Assam Jatiya Bidyalaya
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৫ – शक्तिपीठ: कामाख्या সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (অসম জাতীয় বিদ্যালয় – Assamese Medium)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ পঞ্চম অধ্যায় ‘शक्तिपीठ: कामाख्या’ অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এটা অত্যন্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু সাংস্কৃতিক দিশেৰে চহকী পাঠ। নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ শেহতীয়া নিৰ্দেশনা আৰু নতুন শৈক্ষিক নীতিৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 5 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন (Short Questions), দীঘলীয়া প্ৰশ্ন (Long Answers), MCQ আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
‘शक्तिपीठ: कामाख्या’ নামৰ এই পাঠটিত অসমৰ নীলাচল পাহাৰত অৱস্থিত বিশ্ববিখ্যাত মা কামাখ্যা মন্দিৰ, ইয়াৰ ঐতিহাসিক পটভূমি, পৌৰাণিক মহত্ত্ব আৰু সাংস্কৃতিক ঐতিহ্যৰ বিষয়ে সুন্দৰভাৱে বৰ্ণনা কৰা হৈছে। পৰীক্ষাৰ্থীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ সাৰাংশ, গুৰুত্বপূৰ্ণ তথ্য আৰু শব্দাৰ্থ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই সমাধানসমূহত ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজতে বুজি পোৱাকৈ সৰল ৰূপত উত্তৰসমূহ প্ৰদান কৰা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- ‘शक्तिपीठ: कामाख्या’ পাঠৰ মূল সাৰাংশ, ঐতিহাসিক গুৰুত্ব আৰু নীলাচল পাহাৰস্থিত কামাখ্যা মন্দিৰৰ পৰিচয়।
- শব্দাৰ্থ, ১ নম্বৰৰ অতি চমু প্ৰশ্ন আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্ভুল উত্তৰ।
- ৪-৫ নম্বৰৰ দীঘলীয়া প্ৰশ্ন আৰু বৰ্ণনাত্মক প্ৰশ্নসমূহৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহুবিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) সমাধান।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ অংশৰ সঠিক আৰু সহজ সমাধান।
আমাৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% শুদ্ধ আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ বা আয়ত্ত কৰিব পৰাকৈ প্ৰস্তুত কৰা নোটছ।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ পৰীক্ষাৰ আৰ্হিৰ সৈতে সংগতি ৰাখি প্ৰস্তুত কৰা বিশেষ সংকলন।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উন্নতিৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি এই বিশেষ সমাধান আগবঢ়োৱা হৈছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত উৎকৃষ্ট নম্বৰ লাভ কৰক।
Class 8 Hindi (हिन्दी) Textbook Solutions & MCQs | Assam Jatiya Bidyalaya New Syllabus
New Updated Version!
According to Latest Assam Jatiya Bidyalaya (AJB) New Syllabus & Updated Book
Get comprehensive preparation for Class 8 Hindi (हिन्दी) with this complete Textual Solution & MCQs package.
Includes Chapter-wise textbook solutions, additional Q&A, and MCQs precisely structured as per the latest Assam Jatiya Bidyalaya syllabus and new book.
Perfect for building a strong foundation and mastering your school assessments! Download as an easy-to-use ZIP file.
Class 8: Hindi Elective
शक्तिपीठ : कामाख्या-
TEXUAL SOLUTION
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) कामाख्या मंदिर किस पहाड़ी पर स्थित है? समुद्र-पृष्ठ मे इस मंदिर की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर : कामाख्या मंदिर गुवाहाटी शहर की नीलाचल पहाड़ी पर अवस्थित है। समुद्र-तल से इस मंदिर की कुल ऊँचाई 260 मीटर है।
(ख) ‘कामाख्या’ शब्द किस भाषा से आया है? खासी लोग देवी को किस नाम से पुकारते थे ?
उत्तर : ‘कामाख्या’ शब्द की उत्पत्ति ऑस्ट्रिक भाषा से हुई है। खासी जनजाति के लोग देवी को ‘का-मेइखा’ नाम से बुलाते थे।
(ग) कामाख्या मंदिर का निर्माण सर्वप्रथम किसने करवाया था ?
उत्तर : सबसे पहले कामाख्या मंदिर का निर्माण दैत्यराज नरकासुर द्वारा करवाया गया था।
(घ) कामाख्या मंदिर का पुनः निर्माण किसने कब करवाया था ?
उत्तर : इस कामाख्या मंदिर का पुनर्निर्माण कोच वंश के राजा नरनारायण तथा उनके अनुज चिलाराय द्वारा सन् 1565 ई. में किया गया था।
(ङ) कामाख्या मंदिर में आषाढ़ महीने में किस मेले का आयोजन किया जाता है?.
उत्तर : आषाढ़ के महीने में कामाख्या मंदिर के प्रांगण में प्रसिद्ध ‘अम्बुबाची मेले’ का भव्य आयोजन होता है।
2. सम्यक् उत्तर दो :
(क) कामाख्या मंदिर के निर्माण के संबंध में कौन-सा लोक विश्वास प्रचलित है? स्पष्ट करो।
उत्तर : जनश्रुति के अनुसार, दक्ष-यज्ञ के दौरान अपने पति शिव का अपमान सुनकर माता सती ने यज्ञ-अग्नि में प्राण त्याग दिए थे। इसके पश्चात जब भगवान शिव उनके मृत शरीर को कंधे पर उठाकर ब्रह्मांड का परिभ्रमण कर रहे थे, तब माता सती के शरीर का एक पावन अंग इस जगह पर गिरा था। ठीक उसी स्थान पर कामाख्या मंदिर स्थापित हुआ। प्रतिदिन बड़ी संख्या में हिन्दू श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थ पर देवी की पूजा-वंदना करते हैं।
(ख) कामाख्या मंदिर के निर्माण में दैत्यराज नरकासुर का काम क्यों अधूरा रह गया ?
उत्तर : पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार दैत्यराज नरकासुर ने माता कामाख्या के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा। देवी ने शर्त रखी कि यदि वह एक ही रात में मंदिर तक पहुँचने वाली सीढ़ियाँ, रास्ता और तालाब का निर्माण पूरा कर देगा, तो वे विवाह हेतु सहमत हो जाएँगी। नरकासुर रात खत्म होने से पूर्व ही यह कार्य पूर्ण करने वाला था, तभी देवी ने अपनी माया से भोर होने से पहले ही मुर्गे से बांग दिलवा दी, जो सवेरा होने का इशारा था। यह देखकर नरकासुर बहुत क्रोधित हुआ और उसने मुर्गे को मार डाला। इस तरह उसका निर्माण कार्य अधूरा ही रह गया।
(ग) कामाख्या मंदिर के साथ नरकासुर का नाम क्यों जुड़ा हुआ है?
उत्तर : देवी कामाख्या की कृपा न मिलने के कारण नरकासुर एक क्रूर और अत्याचारी शासक बन बैठा। उस युग में भगवान विष्णु कृष्ण अवतार लेकर द्वारका पर शासन कर रहे थे। सभी देवताओं की विनती सुनकर श्रीकृष्ण ने नरकासुर से युद्ध करके उसका वध कर दिया। इसी ऐतिहासिक और पौराणिक घटना के कारण आज भी कामाख्या मंदिर के इतिहास के साथ नरकासुर का नाम गहराई से जुड़ा हुआ है।
(घ) कामाख्या मंदिर के माहात्य का वर्णन अपने शब्दों में करो।
उत्तर : हमारे भारत देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में असम राज्य के गुवाहाटी महानगर के पश्चिमी छोर पर स्थित नीलाचल पर्वत पर हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थस्थल कामाख्या मंदिर विद्यमान है। यह एक अत्यंत प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जिसकी ऊँचाई समुद्र तल से 260 मीटर है। ‘कामाख्या’ नाम की उत्पत्ति ऑस्ट्रिक भाषा से मानी जाती है; प्राचीन काल में खासी जनजाति के लोग इसे ‘का-मेइखा’ पुकारते थे। पौराणिक कथा है कि सती के आत्मदाह के बाद शिव जब उनके शव को लेकर घूम रहे थे, तब उनका एक पावन अंग इसी स्थान पर गिरा था, जहाँ यह मंदिर बना। मान्यता है कि पहले दैत्यराज नरकासुर ने इसका निर्माण कराया था। कालांतर में 1553 ई. में कालापहाड़ ने इसे नष्ट कर दिया, परंतु 1565 ई. में कोच नरेश नरनारायण और उनके भ्राता चिलाराय ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। जनश्रुति है कि माता कामाख्या के दर्शन और चरणामृत पान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहाँ रोज हजारों भक्त आते हैं। मंदिर परिसर में एक सौभाग्य कुंड भी है। यह शक्तिपीठ दस महाविद्याओं से घिरा है और इसके ऊपर कुछ दूरी पर भुवनेश्वरी मंदिर स्थित है। तांत्रिक साधनाओं के लिए यह पीठ विश्वविख्यात है। प्रतिवर्ष आषाढ़ मास में यहाँ ‘अम्बुबाची मेला’ बड़े हर्षोल्लास से आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।
भाषा-अध्ययन
3. वाक्य बनाओ:
तीर्थस्थान, परिभ्रमण, पौराणिक, अवतार
उत्तर :
तीर्थस्थान: कामाख्या मंदिर को भारत का एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थान माना जाता है।
परिभ्रमण: माता सती के मृत शरीर को उठाकर भगवान शिव ने संपूर्ण ब्रह्मांड का परिभ्रमण किया था।
पौराणिक: पौराणिक कथाओं के अनुसार, कामाख्या मंदिर का प्रारंभिक निर्माण नरकासुर ने करवाया था।
अवतार: द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार धारण किया था।
4. सही विभक्ति-चिह्नों से खाली जगह भरो:
(क) बंदर पेड़……… बैठा है।
(ख) भिखारी द्वार…….. खड़ा है।
(ग) कृष्ण ……कंस…. मारा था।
(घ) मैंने रस्सी ……साँप समझ लिया।
(ङ) रमेश……. मित्र……छोटी बहन आई है।
(च) छत ……गिरने…… लड़के को बहुत चोट आई।
उत्तर :
(क) बंदर पेड़ पर बैठा है।
(ख) भिखारी द्वार पर खड़ा है।
(ग) कृष्ण ने कंस को मारा था।
(घ) मैंने रस्सी को साँप समझ लिया।
(ङ) रमेश के मित्र की छोटी बहन आई है।
(च) छत से गिरने पर लड़के को बहुत चोट आई।
5. शुद्ध करो :
(क) शरीर के अंदर शक्ति होनी चाहिए।
(ख) किसी और लड़के को बुलाओ।
(ग) वह दंड देने योग्य है।
(घ) गांधी जी पक्के ईश्वर के भक्त थे।
(ङ) उस पर घड़ों पानी गिर गया।
(च) मैं आपकी श्रद्धा करता हूँ।
उत्तर :
(क) शरीर में शक्ति होनी चाहिए।
(ख) किसी अन्य लड़के को बुलाओ। (या: किसी और लड़के को बुलाओ।)
(ग) वह दंड पाने योग्य है।
(घ) गांधीजी ईश्वर के पक्के भक्त थे।
(ङ) उस पर घड़ों पानी पड़ गया।
(च) मैं आपका सम्मान करता हूँ। (या: मैं आप पर श्रद्धा रखता हूँ।)
6. वचन परिवर्तन करो:
स्त्री, आत्मा, गौ, शीश, दरवाजा, मित्र, घड़ी, नारी, गेद, मशीन
उत्तर :
स्त्री — स्त्रियाँ
आत्मा — आत्माएँ
गौ — गौएँ
शीश — शीश (शीश का बहुवचन शीश ही रहता है)
दरवाजा — दरवाजे
मित्र — मित्र (या मित्रों)
घड़ी — घड़ियाँ
नारी — नारियाँ
गेंद — गेंदें
मशीन — मशीनें
समासः
दो या दो से अधिक शब्दों के संक्षिप्तीकरण से नया शब्द बनाने की विधि को समास कहा जाता है। इस प्रक्रिया में बीच के कारक चिह्न और अन्य योजक शब्द लुप्त हो जाते हैं।
जैसे: प्रधान है जो मन्त्री = प्रधानमन्त्री।
समास के मुख्य छः भेद होते हैं-
1. अव्ययीभाव समास
2. तत्पुरुष समास
3. कर्मधारय समास
4. द्विगु समास
5. द्वंद्व समास
6. बहुब्रीहि समास
7. अव्ययीभाव समास : इस समास में प्रथम पद प्रधान रहता है और पूरा सामासिक पद एक अव्यय का रूप ले लेता है।
जैसे : जन्म से लेकर = आजन्म, जैसी संभावना हो = यथासंभव
8. तत्पुरुष समास : इस समास में उत्तर पद (दूसरा पद, जो प्रायः संज्ञा होता है) की प्रधानता होती है। इसमें दोनों पदों के बीच के कारक चिह्नों का लोप हो जाता है।
जैसे : राष्ट्र के लिए प्रेम = राष्ट्रप्रेम, गंगा का जल = गंगाजल
9. कर्मधारय समास : इस समास के अंतर्गत दोनों पदों के मध्य विशेषण-विशेष्य अथवा उपमेय-उपमान का संबंध पाया जाता है।
जैसे : लाल है जो किला = लालकिला, कमल के समान नयन = कमलनयन
10. द्विगु समास : इस समास में प्रथम पद कोई संख्यावाचक विशेषण होता है।
जैसे : चार राहों का समूह = चौराहा, दो प्रहरों का समाहार = दोपहर
11. द्वंद्व समास : इस समास में दोनों ही पद समान रूप से प्रधान होते हैं।
जैसे : माता और पिता = माता-पिता, पाप या पुण्य = पाप-पुण्य
12. बहुब्रीहि समास : इस समास में कोई भी मूल पद प्रधान नहीं होता, अपितु दोनों पद मिलकर किसी तीसरे विशेष अर्थ (अन्य पद) की ओर संकेत करते हैं।
जैसे : तीन नयन हैं जिसके (महादेव) = त्रिलोचन, दस मुख हैं जिसके (रावण) = दशमुख
अभ्यास
7. समास-विग्रह करके उनके नाम लिखो : नीलकंठ, पीतंबर, चौराहा, भाई-बहन, चौमासा, राष्ट्रप्रेम, राजमहल, द्विपक्ष, हाथोंहाथ, संसारसागर, चरणकमल, ऊँच-नीच, महावीर, चतुर्भुज, दहीबड़ा, जलमग्न
उत्तर :
नीलकंठ : नीला है कंठ जिसका (शिव) = बहुब्रीहि समास
पीतांबर : पीला है अंबर (वस्त्र) जिनका (विष्णु) = बहुब्रीहि समास
चौराहा : चार राहों का समूह = द्विगु समास
भाई-बहन : भाई और बहन = द्वंद्व समास
चौमासा : चार मासों का समूह = द्विगु समास
राष्ट्रप्रेम : राष्ट्र के लिए प्रेम = तत्पुरुष समास
राजमहल : राजा का महल = तत्पुरुष समास
द्विपक्ष : दो पक्षों का समूह = द्विगु समास
हाथोंहाथ : हाथ ही हाथ में = अव्ययीभाव समास
संसारसागर : संसार रूपी सागर = कर्मधारय समास
चरणकमल : कमल के समान चरण = कर्मधारय समास
ऊँच-नीच : ऊँच और नीच = द्वंद्व समास
महावीर : महान है जो वीर (हनुमान) = कर्मधारय समास (या बहुब्रीहि समास)
चतुर्भुज : चार भुजाएँ हैं जिनकी (विष्णु) = बहुब्रीहि समास
दहीबड़ा : दही में डूबा हुआ बड़ा = मध्यमपदलोपी तत्पुरुष समास
जलमग्न : जल में मग्न = तत्पुरुष समास




