Class 8 Hindi Chapter 9 वृक्षरोपण Solutions | Assam Jatiya Bidyalaya
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৯ – वृक्षरोपण সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (অসম জাতীয় বিদ্যালয় – Assamese Medium)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ নৱম অধ্যায় ‘वृक्षरोपण’ অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে পৰিৱেশ সুৰক্ষা আৰু গছ-গছনিৰ গুৰুত্ব বিষয়ক এটা অতি প্ৰয়োজনীয় পাঠ। নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ শেহতীয়া নিৰ্দেশনা আৰু নতুন শৈক্ষিক নীতিৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 9 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন (Short Questions), দীঘলীয়া প্ৰশ্ন (Long Answers), MCQ আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
‘वृक्षरोपण’ নামৰ এই পাঠটিত গছপুলি ৰোৱাৰ গুৰুত্ব, প্ৰকৃতিক সেউজীয়া কৰি ৰখাৰ প্ৰয়োজনীয়তা আৰু পৰিৱেশ প্ৰদূষণৰোধত গছ-গছনিৰ ভূমিকাৰ বিষয়ে সুন্দৰভাৱে বৰ্ণনা কৰা হৈছে। পৰীক্ষাৰ্থীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ সাৰাংশ, মূল বাৰ্তা আৰু শব্দাৰ্থ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই সমাধানসমূহত ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজতে বুজি পোৱাকৈ সৰল ৰূপত উত্তৰসমূহ প্ৰদান কৰা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- ‘वृक्षरोपण’ পাঠৰ মূল সাৰাংশ, পৰিৱেশ সুৰক্ষাৰ বাৰ্তা আৰু গছ-গছনিৰ গুৰুত্বৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, ১ নম্বৰৰ অতি চমু প্ৰশ্ন আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্ভুল উত্তৰ।
- ৪-৫ নম্বৰৰ দীঘলীয়া প্ৰশ্ন আৰু বৰ্ণনাত্মক প্ৰশ্নসমূহৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহুবিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQ) সমাধান।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ অংশৰ সঠিক আৰু সহজ সমাধান।
আমাৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% শুদ্ধ আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে মুখস্থ বা আয়ত্ত কৰিব পৰাকৈ প্ৰস্তুত কৰা নোটছ।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে যুগুতোৱা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ পৰীক্ষাৰ আৰ্হিৰ সৈতে সংগতি ৰাখি প্ৰস্তুত কৰা বিশেষ সংকলন।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উন্নতিৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি এই বিশেষ সমাধান আগবঢ়োৱা হৈছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত উৎকৃষ্ট নম্বৰ লাভ কৰক।
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৯ – वृक्षरोपण সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (অসম জাতীয় বিদ্যালয় – Assamese Medium)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ নৱম অধ্যায় ‘वृक्षरोपण’ অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে পৰিৱেশ সুৰক্ষা আৰু গছ-গছনিৰ গুৰুত্ব বিষয়ক এটা অতি প্ৰয়োজনীয় পাঠ। নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ শেহতীয়া নিৰ্দেশনা আৰু নতুন শৈক্ষিক নীতিৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 9 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন (Short Questions), দীঘলীয়া প্ৰশ্ন (Long Answers), MCQ আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
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আমাৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
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ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উন্নতিৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি এই বিশেষ সমাধান আগবঢ়োৱা হৈছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত উৎকৃষ্ট নম্বৰ লাভ কৰক।
Class 8 Hindi (हिन्दी) Textbook Solutions & MCQs | Assam Jatiya Bidyalaya New Syllabus
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Class 8: Hindi Elective
वृक्षारोपण
TEXUAL SOLUTION
1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर का चयन करो :
(क) वृक्ष मनुष्यों को कौन-सा गैस प्रदान करता है?
(अ) कार्बन डाइ ऑक्साइड
(आ) नाइट्रोजन
(इ) ऑक्सीजन
(ई) हिलियम
उत्तर : (इ) ऑक्सीजन गैस प्रदान करते हैं।
(ख) प्राकृतिक संतुलन बनाये रखने के लिए जरूरत होती है-
(अ) उद्योगों की स्थापना
(आ) वर्षा का अधिक होना
(इ) खेतों में अनाज उपजाना
(ई) वृक्षारोपण की
उत्तर : (ई) वृक्षारोपण की आवश्यकता होती है।
(ग) भारत सरकार ने वन महोत्सव का प्रारंभ किया था
(अ) सन् 1952 में
(आ) सन् 2010 में
(इ) सन् 1852 में
(ई) सन् 1960 में
उत्तर : (अ) सन् 1952 में की गई थी।
(घ) अतिवृष्टि और अनावृष्टि का मुख्य कारण है-
(अ) वनों का कटाव
(आ) मिट्टीाक कटाव
(इ) भूकंप
(ई) ध्वनि-प्रदूषण
उत्तर : (अ) वनों का कटाव है।
(ङ) प्रकृति के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग हैं-
(अ) चिड़िया
(आ) मनुष्य
(इ) वृक्ष
(ई) नदी
उत्तर : (इ) वृक्ष हैं।
2. सपूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
(क) पशु-पक्षियों की अनेक दुर्लभ जातियाँ-प्रजातियाँ क्यों लुप्त होती जा रही हैं?
उत्तर : जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण पशु-पक्षियों की बहुत सी दुर्लभ प्रजातियाँ और जातियाँ विलुप्त होती जा रही हैं।
(ख) मनुष्यों का प्रकृति से कैसा नाता है?
उत्तर : इंसानों का प्रकृति के साथ अत्यंत प्राचीन और गहरा नाता है।
(ग) अतिवृष्टि और अनावृष्टि क्या हैं?
उत्तर : आवश्यकता से अत्यधिक वर्षा होने को अतिवृष्टि कहते हैं, जिससे बाढ़ आती है और मनुष्यों सहित पशु-पक्षियों का जीवन तबाह हो जाता है। वहीं, वर्षा न होने को अनावृष्टि कहते हैं, जिससे अकाल पड़ता है और जीव-जंतु भूख से मरने लगते हैं।
(घ) हमारी संस्कृति में किसे पवित्र कार्य माना जाता हैं?
उत्तर : हमारी भारतीय संस्कृति के अंतर्गत पेड़-पौधे लगाना (वृक्षारोपण करना) एक अत्यंत पवित्र कर्म माना गया है।
(ङ) हमारी संस्कृति के अनुसार किन वृक्षों की पूजा की जाती है?
उत्तर : हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के मुताबिक पीपल, बरगद, तुलसी, आम और केले जैसे पेड़ों की पूजा-अर्चना की जाती है।
(च) आज कौन-सा आंदोलन ने प्रशंसनीय कार्य करा रहा है?
उत्तर : वर्तमान समय में पर्यावरण रक्षा हेतु ‘चिपको आंदोलन’ बेहद सराहनीय कार्य कर रहा है।
3. सम्यक् उत्तर दो :
(क) आदिकाल से प्रकृति किस तरह मानव की सहचरी रही है?
उत्तर : इंसान ने सदैव प्रकृति की गोद में ही जन्म लिया है। प्रकृति ने ही मनुष्य के पालन-पोषण का प्रबंध किया, उसे सुरक्षा दी और उसकी अनगिनत जरूरतों को पूरा किया। मानव ने प्राकृतिक संसाधनों से ही अपने लिए आवास का निर्माण किया, अपनी भूख-प्यास शांत की और विभिन्न प्रकार की सुख-सुविधाओं का आनंद उठाया। इसी कारण से प्राचीन काल से ही प्रकृति इंसान की सच्ची साथी रही है।
(ख) वृक्ष हमारी किन आवश्यकताओं की पूर्ति करता हैं?
उत्तर : पेड़ हमारी भूख मिटाने के लिए अनेक तरह के स्वादिष्ट फल प्रदान करते हैं। पूजा-पाठ और सुगंध के लिए वे हमें रंग-बिरंगे फूल देते हैं। घर बनाने के लिए मजबूत लकड़ियाँ भी पेड़ों से ही मिलती हैं। उन्हीं लकड़ियों से पलंग, कुर्सी, झूला, अलमारी, संदूक और खिलौने आदि बनाए जाते हैं, यहाँ तक कि वृद्धावस्था में सहारे के लिए लाठी भी इन्हीं से प्राप्त होती है। इस प्रकार पेड़ हमारी तमाम जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
(ग) वनों के कटाव के कारण धरती के सौन्दर्य पर किस तरह कुठाराघात हुआ है?
उत्तर : पेड़ों की लगातार कटाई के परिणामस्वरूप भूमि-कटाव, भूस्खलन, भयानक बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और भूकंप जैसी आपदाओं में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियाँ भी नष्ट होने की कगार पर हैं। इन सभी विनाशकारी बदलावों के कारण पृथ्वी की प्राकृतिक सुंदरता पर गहरा कुठाराघात हुआ है।
(घ) सरकार और समाजसेवी संगठनों ने किस तरह वृक्षारोपण के क्षेत्र में कदम उठाए हैं?
उत्तर : पेड़ों के महत्व को समझते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1952 में ‘वन महोत्सव’ नामक वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की थी, जिसे हर साल जुलाई महीने में संपूर्ण भारत में मनाया जाता है। वनों की कटाई रोकने हेतु कड़े कानून भी लागू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त कई समाजसेवी संस्थाएं भी इस दिशा में सक्रिय हैं, जिनमें ‘चिपको आंदोलन’ की भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय है।
4. सन्तुलित उत्तरं दो :
(क) वृक्ष हमारे लिए क्यों उपयोगी हैं? वर्णन करो।
उत्तर : पेड़ों ने हमेशा से इंसान और मानव सभ्यता पर उपकार किया है। ये हमारे सच्चे, निस्वार्थ और अभिन्न मित्र माने जाते हैं। पेड़ों की मौजूदगी से ही प्राकृतिक संतुलन बना रहता है और वर्षा समय पर होती है। वृक्षों के कारण ही सूखा, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और भयंकर बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कम हो जाता है तथा भूकंप की आशंका भी घटती है। पेड़ इंसानों को पोषणयुक्त स्वादिष्ट फल देते हैं और मकान बनाने के लिए उपयोगी लकड़ियाँ प्रदान करते हैं। दैनिक जीवन की चीजें जैसे पलंग, झूला और खिलौने भी पेड़ों की लकड़ी से ही बनते हैं। इन्हीं सब कारणों से वृक्ष हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं।
(ख) वृक्षारोपण आज मानव जीवन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण आवश्यकता क्यों बन पड़ा है?
उत्तर : आज के समय में पेड़ लगाना मनुष्य की सबसे बड़ी जरूरत इसलिए बन गया है क्योंकि केवल वृक्षारोपण के माध्यम से ही पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन को सुधारा जा सकता है। अधिक पेड़ होने से अतिवृष्टि और अनावृष्टि पर नियंत्रण लगता है, जो हमें विनाशकारी बाढ़ और जानलेवा सूखे से बचाता है। इसके अतिरिक्त, वृक्षारोपण से धरती मजबूत होती है, जिससे हमें भूकंप जैसी गंभीर आपदाओं से भी सुरक्षा प्राप्त होती है।
(ग) प्रदूषण के कारण प्राकृतिक संतुलन किस तरह बिगड़ गया है?
उत्तर : बढ़ते प्रदूषण की वजह से हमारी प्रकृति का संतुलन पूरी तरह से डगमगा गया है। वायु प्रदूषण के कारण हवा इतनी जहरीली हो गई है कि खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप अस्थमा, खांसी और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। प्रकृति का चक्र बिगड़ चुका है, जिससे अतिवृष्टि के कारण खतरनाक बाढ़ और मिट्टी का कटाव हो रहा है, तो दूसरी ओर अनावृष्टि के कारण सूखे और भूकंप जैसी विपदाएं लगातार आ रही हैं।
5. आशय स्पष्ट करो :
(क) ‘एक वृक्ष दश पुत्र सम’।
उत्तर : प्राचीन काल से ही हमारे ज्ञानी ऋषि-मुनियों ने पेड़ों की महत्ता को भली-भांति पहचान लिया था। भारतीय संस्कृति में पेड़ लगाने को अत्यंत पुण्य का काम माना गया है। हमारी परंपराओं में यह कहावत प्रसिद्ध है कि दस गुणी और आज्ञाकारी पुत्रों से जो सुख और आनंद प्राप्त होता है, वह सुख केवल एक पेड़ लगाने और पालने से ही मिल जाता है। इसी भाव को दर्शाते हुए कहा गया है- ‘एक वृक्ष दश पुत्र सम’।
(ख) वृक्षारोपण आज मानव जीवन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण आवश्यकता क्यों बन पड़ा है?
उत्तर : हमें यह बात अच्छे से समझ लेनी चाहिए कि पेड़-पौधे ही वास्तव में मनुष्यों के लिए जीवनदायिनी संजीवनी के समान हैं। अगर हम इन पेड़-पौधों को बचाएंगे और नए पौधे लगाएंगे, तो इसमें संपूर्ण मानव जाति का ही लाभ छिपा है। इसलिए यह हमारा सबसे बड़ा कर्त्तव्य और नैतिक धर्म बन जाता है कि हम ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएँ, जिससे एक स्वच्छ एवं प्रदूषण-मुक्त वातावरण तैयार हो सके और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे।
6. शुद्ध करो :
(क) राम ने भात खाये।
उत्तर : राम ने भात खाया।
(ख) गीता ने खेल खेली।
उत्तर : गीता ने खेल खेला।
(ग) मधु ने तीन आम खाया।
उत्तर : मधु ने तीन आम खाए।
(घ) माधवी ने दो सेब खायी।
उत्तर : माधवी ने दो सेब खाए।
(ङ) शीला ने हरि को पकड़े।
उत्तर : शीला ने हरि को पकड़ा।
(च) प्रवाल ने लड़कियों को पकड़े।
उत्तर : प्रवाल ने लड़कियों को पकड़ा।
(छ) महिलाओं ने चोर को पकड़े।
उत्तर : महिलाओं ने चोर को पकड़ा।
(ज) लड़कियों ने खेली।
उत्तर : लड़कियों ने खेला।
(झ) लड़कों ने लिखे।
उत्तर : लड़कों ने लिखा।
(ञ) उसने पढ़ी।
उत्तर : उसने पढ़ा।
(ट) उन्होंने गायी।
उत्तर : उन्होंने गाया।
(ठ) प्रमीला ने गायी।
उत्तर : प्रमीला ने गाया।
7. एक शब्द में प्रकट करो :
(क) जो स्वंय पैदा हुआ हो
उत्तर : स्वयंभू।
(ख) साधु स्वभाव की स्त्री
उत्तर : साध्वी।
(ग) धर्म से डरनेवाला
उत्तर : धर्मभीरु।
(घ) जो पाने योग्य हो
उत्तर : प्राप्य।
(ङ) पृथ्वी से सम्बन्ध रखनेवाला
उत्तर : पार्थिव।
(च) जो कम बोलता है
उत्तर : मितभाषी।
(छ) विष्णु का उपासक
उत्तर : वैष्णव।
(ज) शिव का उपासक
उत्तर : शैव।
(झ) शक्ति का उपासक
उत्तर : शाक्त।
(ञ) कहानी लिखने वाला
उत्तर : कहानीकार।
8. वाक्य बनाओ : (मुहावरों से)
ईद का चाँद होना, उल्लू बनाना, कलई खुलना, किताबी कीड़ा, गुड़ गोबर कना, छूटने टेकना, चंपत होना, चार-चाँद लगाना, चिकना घड़ा, छक्के छूटना।
उत्तर :
ईद का चाँद होना (बहुत दिनों बाद दिखाई देना): रमेश बहुत दिनों बाद गाँव आया, तो उसके दोस्त ने कहा, “भाई, तुम तो बिल्कुल ईद का चाँद हो गए हो!”
उल्लू बनाना (मूर्ख बनाना): चालाक दुकानदार ने खराब सामान देकर उस सीधे-सादे ग्राहक को आसानी से उल्लू बना दिया।
कलई खुलना (भेद खुल जाना): परीक्षा का परिणाम आते ही उस झूठे छात्र की सारी कलई खुल गई।
किताबी कीड़ा (पढ़ने के सिवा कुछ न करना): हमेशा केवल पढ़ाई में ही लगे रहना ठीक नहीं है, इंसान को सिर्फ किताबी कीड़ा बनकर नहीं रहना चाहिए।
गुड़ गोबर करना (काम बिगाड़ देना): बारिश के अचानक आ जाने से हमारे सारे खेल का गुड़ गोबर हो गया।
घुटने टेकना (आत्मसमर्पण करना): भारतीय सैनिकों की बहादुरी के सामने आतंकवादियों को अंततः घुटने टेकने ही पड़े।
चंपत होना (भाग जाना): मौका मिलते ही जेबकतरा भीड़ का फायदा उठाकर वहाँ से चंपत हो गया।
चार-चाँद लगाना (शोभा बढ़ा देना): तुम्हारी शानदार प्रस्तुति ने आज के इस भव्य समारोह में चार चाँद लगा दिए हैं।
चिकना घड़ा (जिसपर किसी बात का असर न हो): श्याम तो बिल्कुल चिकना घड़ा है, उसे कितना भी समझाओ, उस पर कोई असर नहीं होता।
छक्के छूटना (घबरा जाना / बुरी तरह हारना): परीक्षा का कठिन प्रश्न-पत्र देखकर कई विद्यार्थियों के छक्के छूट गए।




