Class 6 Hindi Chapter 12 महापुरुष Solutions | AJB Assam
ষষ্ঠ শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১২ – महापुरुष (Mahapurush) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (AJB Assam)
ষষ্ঠ শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ দ্বাদশ অধ্যায় ‘महापुरुष’ এখন অতি অনুপ্ৰেৰণাদায়ক আৰু গুৰুত্বপূৰ্ণ পাঠ। অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 6 Hindi Chapter 12 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, ব্যাকৰণ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ অতি সহজ আৰু নিৰ্ভুলভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে ঘৰতে বহি অনুশীলন কৰিব পাৰে।
‘महापुरुष’ নামৰ এই পাঠটিত দেশ আৰু সমাজৰ হিতৰ বাবে নিজৰ জীৱন উচৰ্গা কৰা মহান ব্যক্তিসকলৰ জীৱন, তেওঁলোকৰ কৰ্মৰাজি আৰু আদৰ্শৰ বিষয়ে বিতংভাৱে বৰ্ণনা কৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলক এই মহান ব্যক্তিসকলৰ আদৰ্শৰে অনুপ্ৰাণিত কৰিবলৈ এই পাঠৰ মূল ভাৱ আৰু শব্দাৰ্থ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- মহাপুৰুষসকলৰ জীৱন আৰু তেওঁলোকৰ মহান আদৰ্শৰ স্পষ্ট বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, চমু আৰু দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ, বাক্য ৰচনা, সমাৰ্থক আৰু বিপৰীত শব্দৰ সঠিক জ্ঞান।
- পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু তাৰ উত্তৰ।
- নতুন আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ বহু-বিকল্পী প্ৰশ্নৰ (MCQs) সম্পূৰ্ণ সমাধান।
অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- শেহতীয়া AJB নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে বুজিব পৰাকৈ সৰল ভাষাত যুগুতোৱা উন্নত মানৰ নোটছ (Class 6 Hindi Notes)।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে প্ৰস্তুত কৰা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- হিন্দী ভাষাৰ ভয় দূৰ কৰি বিষয়টোৰ প্ৰতি আগ্ৰহ বঢ়াবলৈ ব্যৱহাৰিক উদাহৰণৰ সহায়ত বুজোৱা সমাধান।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।
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অসম জাতীয় বিদ্যালয়, ষষ্ঠ শ্ৰেণী: হিন্দী
महापुरुष
Texual Solutions
1. प्रस्तुत कविता को दोहराओ और कण्ठस्थ लिखो।
उत्तर : विद्यार्थी इस कविता का सस्वर पाठ करें और इसे याद करके अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखें।
2. संक्षेप में उत्तर दो:
(i) असम के ज्योतिपूंज से मतलब क्या है?
उत्तर : असम के ज्योतिपुंज का अर्थ उन महान और तेजस्वी महापुरुषों से है, जिन्होंने असम को ज्ञान का प्रकाश दिया और समाज के रक्षक के रूप में अवतरित हुए।
(ii) शंकरदेव का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर : महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव का जन्म सन् 1449 में नगाँव जिले के आलिपुखुरी नामक गाँव में हुआ था।
(iii) शंकरदेव के माता-पिता कौन थे ?
उत्तर : शंकरदेव की माता का नाम सत्यसंध्या और पिता का नाम कुसुम्बर भुञा था।
(iv) खेरसूती कौन थी ?
उत्तर : खेरसूती श्रीमंत शंकरदेव की दादी माँ थीं।
(v) महेन्द्र कन्दली कौन थे ?
उत्तर : महेन्द्र कन्दली श्रीमंत शंकरदेव के गुरु थे, जिनसे उन्होंने शिक्षा प्राप्त की थी।
(vi) शंकरदेव ने किस धर्म का प्रचार की थी ?
उत्तर : शंकरदेव जी ने ‘एकशरण नाम धर्म’ का प्रचार किया था।
3. प्रस्तुत कविता को गद्यभाषा में लिखो।
उत्तर : विद्यार्थी इस कविता का सारांश अपने शब्दों में सरल हिंदी गद्य में लिखें।
4. “असम का ज्योति… तिमिरों से घिरा” से कवि का आशय स्पष्ट करो।
उत्तर : इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब असम में जाति-पाँति, भेदभाव और हिंसा का अंधकार फैला हुआ था, तब श्री शंकरदेव एक उज्ज्वल ज्योति की तरह प्रकट हुए। उन्होंने अपने ज्ञान और भक्ति से समाज में व्याप्त बुराइयों के अंधेरे को दूर किया।
5. “चौदह शास्त्र, अठारह पुराण… सारा संसार हिला।” यहाँ संसार हिलने से तात्पर्य क्या है?
उत्तर : इसका तात्पर्य यह है कि श्री शंकरदेव की प्रतिभा और ज्ञान असीम था। जब उन्होंने चौदह शास्त्रों और अठारह पुराणों के सार को सरल रूप में दुनिया के सामने रखा, तो लोग उनके आध्यात्मिक ज्ञान और विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए।
6. वाक्य बनाओ:
महात्मा, बलशाली, नटखट, शास्त्र, जगमगा
उत्तर :
महात्मा – महापुरुष शंकरदेव एक महान आत्मा अर्थात् महात्मा थे।
बलशाली – शंकरदेव के व्यक्तित्व और ज्ञान के आगे बड़े-बड़े बलशाली लोग भी नतमस्तक हो जाते थे।
नटखट – बचपन में बालक शंकरदेव भगवान कृष्ण की तरह ही नटखट थे।
शास्त्र – शंकरदेव को सभी धर्म शास्त्रों का गहरा ज्ञान था।
जगमगा – उनकी ज्ञान रूपी ज्योति से पूरा देश जगमगा उठा।
7. खाली जगहों की पूर्ति करो:
उत्तर :
नगाँव का आलिपुखुरी, जन्म ग्राम उनका।
पाला पोसा दादी माँ ने, खेरसूती नाम जिनका।
8. ‘क’ अंश के साथ ‘ख’ अंश को मिलाओ:
‘क’ अंश :
नामधर्म
जैन धर्म
इस्लाम धर्म
ईसाई धर्म
बौद्ध धर्म
‘ख’ अंश :
कुरान शरीफ
अंग
बाइबिल
त्रिपिटक
कीर्तन घोषा
उत्तर :
‘क’ अंश :
नामधर्म
जैन धर्म
इस्लाम धर्म
ईसाई धर्म
बौद्ध धर्म
‘ख’ अंश :
कीर्तन घोषा
अंग
कुरान शरीफ
बाइबिल
त्रिपिटक
9. टिप्पणियाँ :
माधवदेव : श्री माधवदेव का जन्म सन् 1486 में उत्तर लखीमपुर के नारायणपुर में हुआ था। वे शंकरदेव के प्रधान शिष्य थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में नामघोषा, भक्ति-रत्नावली, रामायण (आदिकाण्ड) और कई प्रसिद्ध ‘अंकिया नाट’ शामिल हैं। पहले वे शाक्त मत के अनुयायी थे, परंतु शंकरदेव से मिलने के बाद वे उनके परम भक्त बन गए। सन् 1596 में उनका स्वर्गवास हुआ।
शंकरदेव : श्रीमंत शंकरदेव का जन्म सन् 1449 में नगाँव के आलिपुखुरी में हुआ था। उनके पिता कुसुम्बर भुञा और माता सत्यसंध्या थीं। उन्होंने अपने गुरु महेंद्र कंदली से व्याकरण, पुराण और दर्शन की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने ‘एकशरण नाम धर्म’ की स्थापना की। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘कीर्तन घोषा’, ‘रुक्मिणी हरण’ और ‘पारिजात हरण’ अत्यंत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने असमिया संस्कृति को नई दिशा दी। सन् 1568 में वे स्वर्ग सिधारे।
10. आओ, जान लें (लिंग निर्णय के नियम):
(i) घर, कल, कपड़ा, पैसा जैसे ‘अ’ और ‘आ’ स्वर पर खत्म होने वाले शब्द प्रायः पुल्लिंग होते हैं। लेकिन किताब, मेज़, आँख, जीभ, हवा और दवा जैसे शब्द स्त्रीलिंग हैं।
(ii) रोटी, कुर्सी, नदी, घड़ी जैसे ‘ई’ स्वर पर खत्म होने वाले शब्द स्त्रीलिंग होते हैं। अपवाद के रूप में पानी, घी, दही, मोती और जी पुल्लिंग शब्द हैं।
(iii) जो शब्द आकार में बड़े, भारी या कठोर होते हैं, वे अक्सर पुल्लिंग होते हैं (जैसे- पहाड़, पत्थर, जहाज)। वहीं जो शब्द कोमलता या सुंदरता का बोध कराते हैं, वे प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं।
आपकी परीक्षा की तैयारी कैसी चल रही है? क्या आपको श्रीमंत शंकरदेव के बारे में और कुछ विस्तार से जानना है?




