Class 6 Hindi Chapter 2 दानवीर शिवि Solutions | AJB Assam
ষষ্ঠ শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ২ – दानवीर शिवि (Danveer Shivi) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (AJB Assam)
ষষ্ঠ শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ দ্বিতীয় অধ্যায় ‘दानवीर शिवि’ এখন অতি অনুপ্ৰেৰণাদায়ক আৰু শিক্ষামূলক পাঠ। অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 6 Hindi Chapter 2 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, ব্যাকৰণ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ অতি সহজ আৰু নিৰ্ভুলভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে ঘৰতে বহি অনুশীলন কৰিব পাৰে।
‘दानवीर शिवि’ নামৰ এই পাঠটিত মহাৰাজ শিৱিৰ অপৰিসীম দানশীলতা, জীৱ-জন্তুৰ প্ৰতি থকা দয়া, আৰু শৰণাগতক ৰক্ষা কৰাৰ বাবে নিজৰ প্ৰাণ পৰ্যন্ত ত্যাগ কৰিবলৈ কুণ্ঠাবোধ নকৰা মহান চৰিত্ৰৰ কাহিনী বৰ্ণনা কৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ মাজত নৈতিক প্ৰমূল্যবোধ গঢ়ি তুলিবলৈ এই পাঠৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু তাৎপৰ্য বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- মহাৰাজ শিৱিৰ ত্যাগ, কৰুণা আৰু শৰণাগতক ৰক্ষা কৰাৰ মহান আদৰ্শৰ স্পষ্ট বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, চমু আৰু দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ, বাক্য ৰচনা, সমাৰ্থক আৰু বিপৰীত শব্দৰ সঠিক জ্ঞান।
- পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু তাৰ উত্তৰ।
- নতুন আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ বহু-বিকল্পী প্ৰশ্নৰ (MCQs) সম্পূৰ্ণ সমাধান।
অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- শেহতীয়া AJB নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে বুজিব পৰাকৈ সৰল ভাষাত যুগুতোৱা উন্নত মানৰ নোটছ (Class 6 Hindi Notes)।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে প্ৰস্তুত কৰা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- হিন্দী ভাষাৰ ভয় দূৰ কৰি বিষয়টোৰ প্ৰতি আগ্ৰহ বঢ়াবলৈ ব্যৱহাৰিক উদাহৰণৰ সহায়ত বুজোৱা সমাধান।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।
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অসম জাতীয় বিদ্যালয়, ষষ্ঠ শ্ৰেণী: হিন্দী
दानवीर शिवि
Texual Solutions
1. हमारे देश के दो महान दानबीरों के नाम बताओ।
उत्तर : भारत देश के दो सबसे बड़े दानवीरों के नाम कर्ण और राजा बलि हैं।
2. प्रस्तुत कहानी को सरल हिन्दी में लिखो।
उत्तर : प्राचीन काल में शिवि नाम के एक अत्यंत धर्मनिष्ठ और दानी राजा हुआ करते थे। उनकी दानशीलता की चर्चा सुनकर स्वर्ग के देवराज इंद्र और अग्निदेव ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। इसके लिए इंद्र ने बाज का और अग्निदेव ने कबूतर का रूप धारण किया और धरती पर आ गए।
बाज रूपी इंद्र कबूतर का शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़े। भयभीत कबूतर अपनी जान बचाने के लिए उड़कर महाराज शिवि की राजसभा में पहुँच गया। उस वक्त राजा शिवि अपने दरबार में ही उपस्थित थे। कबूतर ने राजा से प्रार्थना की कि वे उसकी रक्षा करें। तब महाराज ने उसे सांत्वना दी और कहा कि वह डरे नहीं, क्योंकि शरण में आए हुए की रक्षा करना राजा का परम कर्तव्य है। तभी बाज ने आकर कहा कि हे राजन! आप मेरे मुँह का निवाला क्यों छीन रहे हैं, यह कैसा न्याय है? राजा ने उससे पूछा कि कबूतर को छोड़कर वह भोजन में क्या लेना चाहेगा। तब बाज ने इंसान का मांस माँगा। राजा कुछ पल के लिए दुविधा में पड़ गए, लेकिन उन्होंने ठान लिया कि वे अपनी जान देकर भी इस शरणागत पक्षी को बचाएंगे। उन्होंने एक तराजू मंगवाया और अपने शरीर का मांस काटकर उसमें रखने लगे, ताकि वह कबूतर के वजन के बराबर हो जाए। परंतु हैरानी की बात थी कि मांस का वजन कबूतर के बराबर नहीं हो रहा था। अंत में महाराज स्वयं तराजू के एक पलड़े पर बैठ गए।
राजा शिवि की यह महान दानवीरता देखकर देवराज इंद्र और अग्निदेव अत्यंत प्रसन्न हुए। दोनों ने अपना असली रूप धारण किया और राजा को मनचाहा वरदान देकर स्वर्ग लौट गए। आज भी महाराज शिवि का नाम बहुत आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है।
3. सम्पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखो।
(i) शिवि कैसे राजा थे ?
उत्तर : महाराज शिवि एक अत्यंत धर्मपरायण और दानी राजा थे।
(ii) स्वर्ग के कौन-कौन देवता शिवि की परीक्षा लेने आये थे ?
उत्तर : राजा शिवि की परीक्षा लेने के लिए स्वर्ग से देवराज इंद्र और अग्निदेव आए थे।
(iii) बाज और कबुतर आचल में कौन थे ?
उत्तर : असलियत में बाज का रूप देवराज इंद्र ने और कबूतर का रूप अग्निदेव ने धारण किया था।
(iv) बाज ने महाराज से क्या शिकायत की थी ?
उत्तर : बाज ने महाराज से यह शिकायत की थी कि वे उसका भोजन (कबूतर) उससे छीनकर उसके साथ अन्याय कर रहे हैं।
(v) राजा शिवि ने कौन-सा निर्णय लिया ?
उत्तर : महाराज शिवि ने अपने प्राणों का बलिदान देकर भी शरण में आए हुए की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प लिया।
4. खाली जगहों की पूर्ति करो
(i) शरणागत की रक्षा करना ही धर्म होता है।
(ii) राजा में पड़ गये।
(iii) राजा शिवि की देखकर और अग्निदेवता बहुत प्रसन्न हो गए।
उत्तर :
(i) राजा का
(ii) असमंजस
(iii) दानशीलता, देवराज इन्द्र
5. वाक्य बनाओ
दानशीलता, वरदान, संकोच, राजधर्म, असमंजस, शरणागत
उत्तर :
दानशीलता – दानशीलता का महान गुण एक साधारण मनुष्य को भी श्रेष्ठ बना देता है।
वरदान – देवताओं ने प्रसन्न होकर राजा शिवि को वरदान दिया।
संकोच – अपनी बात कहते समय हमें मन में बिल्कुल भी संकोच नहीं रखना चाहिए।
राजधर्म – महाराज शिवि ने अपने राजधर्म का बहुत अच्छे से पालन किया।
असमंजस – बाज की अजीब माँग सुनकर राजा कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गए।
शरणागत – विपत्ति के समय शरणागत की रक्षा करना हमारा सबसे पहला कर्तव्य है।
6. विपरीत शब्द लिखो
दानी, स्वर्ग, संकोच, धर्म, पाप, पुराना, देवता, डर, प्रार्थना
उत्तर :
दानी – कंजूस
स्वर्ग – नरक
संकोच – निःसंकोच
धर्म – अधर्म
पाप – पुण्य
पुराना – नया
देवता – दानव
डर – निडर
प्रार्थना – आदेश (या तिरस्कार)
7. “क्योंकि शरणागत की रक्षा करना राजधर्म है” में किस धर्म के बारे में बताया गया है? शरणागत से क्या समझते हो ?
उत्तर : शरणागत का अर्थ है वह व्यक्ति या प्राणी जो किसी मुसीबत में फँसकर किसी दूसरे की शरण या आश्रय में आ गया हो। इस वाक्य में मानवता और परोपकार के धर्म की बात की गई है। एक सच्चे राजा का परम कर्तव्य होता है कि वह अपने राज्य के सभी प्राणियों की हिफाज़त करे। अतः जो भी उसके पास आसरा लेने आता है, उसकी सुरक्षा करना राजा का मुख्य दायित्व बन जाता है।
शरणागत का सीधा सा मतलब है कि खुद को किसी दूसरे की शरण में सौंप देना। जब कोई मनुष्य या जीव संकट में घिर जाता है, तो वह अपना सब कुछ बचाने की उम्मीद में किसी सक्षम व्यक्ति के पास आश्रय के लिए पहुँचता है।



