Class 7 Hindi Chapter 4 हिन्दी के साधक Solutions | AJB Assam
সপ্তম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৪ – हिन्दी के साधक সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (AJB Assam)
সপ্তম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ চতুৰ্থ অধ্যায় ‘हिन्दी के साधक’ হিন্দী ভাষা আৰু সাহিত্যৰ প্ৰচাৰ-প্ৰসাৰত অৱদান যোগোৱা মহান ব্যক্তিসকলৰ জীৱন আৰু কৰ্মৰ ওপৰত আধাৰিত এটা অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ পাঠ। অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 7 Hindi Chapter 4 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, ব্যাকৰণ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ অতি সহজ আৰু নিৰ্ভুলভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে ঘৰতে বহি সুন্দৰভাৱে অনুশীলন কৰিব পাৰে।
‘हिन्दी के साधक’ নামৰ এই পাঠটিত হিন্দী সাহিত্যলৈ অমূল্য বৰঙণি যোগোৱা সাহিত্যিক আৰু সাধকসকলৰ নিৰলস প্ৰচেষ্টা তথা ভাষা-প্ৰেমৰ এক সুন্দৰ বৰ্ণনা দাঙি ধৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ মূল বিষয়বস্তু, শব্দাৰ্থ আৰু তাৎপৰ্য বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- হিন্দী ভাষা আৰু সাহিত্যৰ উন্নয়নত সাধকসকলৰ অৱদান আৰু ত্যাগৰ স্পষ্ট বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, চমু আৰু দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ, বাক্য ৰচনা, সমাৰ্থক আৰু বিপৰীত শব্দৰ সঠিক জ্ঞান।
- পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু তাৰ উত্তৰ।
- নতুন আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ বহু-বিকল্পী প্ৰশ্নৰ (MCQs) সম্পূৰ্ণ সমাধান।
অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- শেহতীয়া AJB নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে বুজিব পৰাকৈ সৰল ভাষাত যুগুতোৱা উন্নত মানৰ নোটছ (Class 7 Hindi Notes)।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে প্ৰস্তুত কৰা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- হিন্দী ভাষাৰ ভয় দূৰ কৰি বিষয়টোৰ প্ৰতি আগ্ৰহ বঢ়াবলৈ ব্যৱহাৰিক উদাহৰণৰ সহায়ত বুজোৱা সমাধান।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।
Class 7 Hindi (हिन्दी) Textbook Solutions & MCQs | AJB New Syllabus
New Updated Version!
According to Latest AJB New Syllabus & Updated Book
Get comprehensive preparation for Class 7 Hindi (हिन्दी) with this complete Textual Solution & MCQs package.
Includes Chapter-wise textbook solutions, additional Q&A, and MCQs precisely structured as per the latest Assam Jatiya Bidyalay (AJB) syllabus and new version of the book.
Perfect for building a strong foundation and mastering your school assessments! Download as an easy-to-use ZIP file.
AJB Class 7: Hindi
हिन्दी का साधक
Texual Solutions
1. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर लिखोः
i) हिन्दी भाषा किस भाषा से उत्पन्न हुई है?
उत्तरः हिंदी भाषा का जन्म संस्कृत और प्राचीन खड़ीबोली से हुआ है।
ii) हिन्दी के प्राचीन रूप क्या-क्या है ?
उत्तरः संस्कृत, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश को हिंदी भाषा के प्राचीन रूप के तौर पर जाना जाता है।
iii) ‘द्विवेदी युग’ कब से कब तक माना जाता है?
उत्तरः ‘द्विवेदी युग’ की अवधि सन् 1901 ईसवी से लेकर सन् 1920 ईसवी तक मानी गई है।
iv) महावीर प्रसाद द्विवेदी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तरः महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म वर्ष 1864 ईसवी में उत्तर प्रदेश राज्य के रायबरेली जिले में स्थित दौलतपुर नामक ग्राम में हुआ था।
v) महावीर प्रसाद द्विवेदी किस पत्रिका के संपादक थे ?
उत्तरः महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ‘सरस्वती’ नामक प्रसिद्ध पत्रिका के संपादक का कार्यभार सँभालते थे।
vi) द्विवेदी जी द्वारा रचित कुल ग्रंथ कितने हैं।
उत्तरः द्विवेदी जी ने कुल मिलाकर 80 (अस्सी) ग्रंथों की रचना की है।
vii) द्विवेदी जी किन भाषाओं को जानते थे ?
उत्तरः द्विवेदी जी को हिंदी, संस्कृत, गुजराती, मराठी और बांग्ला जैसी अनेक भाषाओं का बहुत अच्छा ज्ञान था।
viii) खड़ीबोली के विकाश में महान योगदान देनेवाले दो महान साहित्यकारों के नाम लिखो।
उत्तरः खड़ीबोली का विकास करने में अपना अहम योगदान देने वाले दो प्रमुख साहित्यकार राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और रामनरेश त्रिपाठी हैं।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के व्याख्यात्मक उत्तर लिखोः
i) महावीर प्रसाद द्विवेदी का आविभीव हिन्दी साहित्य के लिए क्यों उल्लेखनीय है?
उत्तरः द्विवेदी जी ने सर्वप्रथम पहले से चली आ रही ब्रजभाषा का हमेशा के लिए त्याग कर दिया था। इसके बदले उन्होंने गद्य, पद्य और निबंध आदि सभी विधाओं की मुख्य भाषा के रूप में खड़ीबोली को अपना लिया। इसी वजह से उनको आधुनिक हिंदी का जनक माना जाता है। अतः हिंदी साहित्य के क्षेत्र में महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का आगमन अत्यंत उल्लेखनीय है।
ii) महावीर प्रसाद द्विवेदी को क्यों महान आचार्य भी कहा जाता है?
उत्तरः महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने एक सच्चे आचार्य की तरह हिंदी साहित्य में उचित नियमों की स्थापना की और रचनाकारों को एक बेहतरीन कवि तथा लेखक बनने की प्रेरणा दी। आपने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, रामनरेश त्रिपाठी और श्रीधर पाठक जैसे श्रेष्ठ कवियों का उचित मार्गदर्शन किया। मुंशी प्रेमचंद जैसे कथाकार और पंडित रामचंद्र शुक्ल व बाबू श्यामसुंदर दास जैसे प्रसिद्ध निबंधकार एवं आलोचक भी उनके विचारों से प्रेरित हुए थे। उन्होंने साहित्य के लिए एक ऐसा उपयुक्त माहौल तैयार किया जिसमें ये सभी रचनाकार उन्नति कर सकें। इन्हीं विशेषताओं के कारण महावीर प्रसाद द्विवेदी जी को महान आचार्य की उपाधि दी जाती है।
iii) द्विवेदी जी के जीवन का लक्ष्य क्या था ?
उत्तरः द्विवेदी जी के संपूर्ण जीवन का मुख्य उद्देश्य आम जनता की सेवा करना था। समाज में शिक्षा का फैलाव हो, लोगों के ज्ञान में बढ़ोतरी हो, श्रेष्ठ साहित्य के प्रति उनका लगाव बढ़े और वे अपने हकों व दायित्वों को समझें, वे इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर रचनाएँ करते थे। अतः उनकी रचनाएँ समाज को सुधारने, लोगों की पसंद को बेहतर बनाने और उत्कृष्ट साहित्य रचने की प्रेरणा प्रदान करती हैं, जो कि उनके जीवन का असली मकसद था।
iv) महावीर प्रसाद द्विवेदी को एक युग-प्रवर्तक क्यों कहा जाता है?
उत्तरः भारतेंदु जी के देहांत के पश्चात महावीर प्रसाद द्विवेदी जी वर्ष 1903 से लेकर 1920 ईसवी तक ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादक पद पर आसीन रहे। उन्होंने सिर्फ ‘सरस्वती’ पत्रिका में छपने वाली रचनाओं में ही सुधार नहीं किया, अपितु अन्य साहित्यों को भी परिमार्जित कर अपनी आलोचनाएँ प्रस्तुत कीं। इस तरह उन्होंने इस पत्रिका के जरिये साहित्य जगत में परिष्कृत रुचि, अच्छी शिक्षा और व्याकरण सम्मत हिंदी भाषा का खूब प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने समय व साहित्य के साथ-साथ साहित्य व समाज का एक अटूट रिश्ता कायम किया। इन्हीं महत्वपूर्ण कारणों से द्विवेदी जी को एक युग-प्रवर्तक माना जाता है।
v) ‘सरस्वती पत्रिका’ के संपादक के रूप में द्विवेदी जी ने क्या किया था ?
उत्तरः ‘सरस्वती’ पत्रिका के कुशल संपादक के तौर पर द्विवेदी जी ने इसमें प्रकाशित होने वाली रचनाओं में सुधार किया तथा उन पर अपनी समालोचनाएँ लिखीं। इस प्रकार उन्होंने इस पत्रिका के माध्यम से साहित्य के दायरे में परिष्कृत रुचि, अच्छी शिक्षा और व्याकरण के नियमों पर आधारित हिंदी भाषा का प्रसार किया। साथ ही, उन्होंने काल एवं साहित्य और साहित्य एवं समाज के बीच एक गहरा नाता जोड़ा।
3. महावीर प्रसाद द्विवेदी को क्यों आधुनिक हिन्दी को व्यवस्थित रूप देने का सारा श्रेय दिया जाता है?
उत्तरः द्विवेदी जी के जीवन का प्रधान लक्ष्य जनसाधारण की भलाई करना था। समाज में शिक्षा का विस्तार हो, लोगों का ज्ञानवर्धन हो, उत्तम साहित्य के प्रति उनका झुकाव हो, और वे अपने अधिकारों व दायित्वों के प्रति जागरूक हों, इसी उद्देश्य को लेकर वे लेखन कार्य करते थे। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ समाज को नई दिशा देने, लोगों की रूचि को शुद्ध करने और अच्छे साहित्य की रचना के लिए प्रेरित करती हैं। हिंदी साहित्य के इतिहास में उनके कार्यकाल (सन् 1901 से सन् 1920 ईसवी) को ‘द्विवेदी युग’ के नाम से जाना जाता है। इसी परिप्रेक्ष्य में, आधुनिक हिंदी को एक सुव्यवस्थित आकार प्रदान करने का संपूर्ण श्रेय द्विवेदी जी को ही प्राप्त है।
4. हिन्दी भाषा के विकाश में ‘सरस्वती’ पत्रिका की भूमिका पर एक टिप्पणी लिखो।
उत्तरः हिंदी भाषा के विकास क्रम में खड़ीबोली का उपयोग बेहद महत्वपूर्ण था, जिसमें भारतेंदु हरिश्चंद्र और महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का योगदान बहुत ही उल्लेखनीय है। ‘सरस्वती’ नामक पत्रिका शुरुआत में भारतेंदु जी के दिशा-निर्देशन में छपती थी और उस दौर में ब्रजभाषा का अधिक चलन था। पुरानी ब्रजभाषा को छोड़कर खड़ीबोली के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाना ही भारतेंदु जी और द्विवेदी जी का प्रधान लक्ष्य था। यह महत्वपूर्ण काम ‘सरस्वती’ पत्रिका के जरिये ही पूरा किया जा सकता था। फलस्वरूप, ‘सरस्वती’ पत्रिका के माध्यम से ही साहित्य के दायरे में परिष्कृत रुचि, अच्छी शिक्षा और व्याकरण आधारित हिंदी भाषा का प्रसार संभव हुआ। इसी पत्रिका द्वारा काल व साहित्य के साथ-साथ साहित्य व समाज के मध्य एक मजबूत रिश्ता कायम किया गया। अतः हिंदी भाषा को उन्नत बनाने में ‘सरस्वती’ पत्रिका का योगदान अत्यंत अहम है।
5. पढ़ो, समझो और लिखो :
|
कवि |
कहानीकार |
|
कबीर दास |
जयशंकर प्रसाद |
|
_______________ |
_______________ |
|
______________ |
_______________ |
|
______________ _______________ |
________________ _________________ |
उत्तरः
|
कवि |
कहानीकार |
|
रसखाना |
चपला देवी |
|
मारवनलाल चतुर्वेदी |
हरिशंकर परसाई |
|
सुमित्रानंन्दन पंत |
महादेवी वर्मा |
|
केदार नाथ अग्रवाल |
मैथिलीशरण गुप्त |
ख) निबंधकार समालोचक-उपन्यासकार
|
हजारी प्रसाद द्विवेदी |
प्रेमचन्द्र |
|
—————— —————— —————— —————— |
——————- ——————- ——————- ——————- |
उत्तरः
|
हजारी प्रसाद द्विवेदी |
प्रेमचन्द्र |
|
राहुल सांकृत्यायन श्यामाचरण दुबे जाबिर हुसैन रामचन्द्र शुक्ल |
हरिशंकर परसाई हजारीप्रसाद द्विवेदी शरतचन्द्र बंकिमचन्द्र । |
6. एक शब्द मे प्रकट करो :
i) जो अनुबाद करता है _________।
उत्तरः अनुवादक ।
ii) जो समालोचना करता है________।
उत्तरः समालोचक ।
iii) जो दूर तक देख सकता है_______।
उत्तरः दूरदर्शी।
iv) जिसका कोई दुश्मन नहीं है________।
उत्तरः अजातशत्रु ।
v) जो विदेश में रहता हैं_________।
उत्तरः प्रवासी ।
vi) जो किसी चीज का निर्माण करता है_______।
उत्तरः निर्माता, निर्माणकती।
vii) जीसे देखा नहीं जाता_______।
उत्तरः अदृश्य ।
viii) जो पढ़ा-लिखा न हो _______।
उत्तरः अशिक्षित, अनपढ़ ।
7. ध्यान से देखो और समझो:
i) विराज ने रोटी खायी।
ii) विराज ने भात खाया।
इन दोनों वाक्यों में ‘ने’ परसर्ग (विभक्ति) के इस्तेमाल के कारण ‘खाना’ क्रिया का रूप भिन्न-भिन्न हो गया है। अतः ‘ने’ विभक्ति के उपयोग से जुड़े नियम इस प्रकार हैं:
i) ‘ने’ विभक्ति कर्ता कारक के साथ जुड़ती है। परंतु इसका प्रयोग कर्ता के सभी रूपों के साथ नहीं किया जाता। सिर्फ सकर्मक क्रिया वाले भूतकाल के निम्नलिखित भेदों में ही कर्ता के साथ ‘ने’ का इस्तेमाल होता है।
उदाहरण-
सामान्य भूत: उसने भात खाया।
आसन्न भूत: उसने भात खाया है।
पूर्ण भूत : उसने भात खाया था।
संदिग्ध भूत: उसने भात खाया होगा।
ii) जब कर्ता के साथ ‘ने’ चिह्न लग जाता है, तब वाक्य की क्रिया का लिंग और वचन ‘कर्ता’ के बजाय ‘कर्म’ के आधार पर निर्धारित होता है।
उदाहरण-
(i) उसने यह ग्रंथ पढ़ा।
(ii) उसने यह किताब पढ़ी।
iii) अगर कर्ता के साथ ‘ने’ परसर्ग लगा हो और कर्म के साथ ‘को’ विभक्ति जुड़ी हो अथवा वाक्य में कर्म मौजूद ही न हो, तो ऐसी स्थिति में क्रिया हमेशा अन्य पुरुष, पुल्लिंग तथा एकवचन में ही प्रयुक्त होती है।
उदाहरण-
(i) मैंने लड़की को देखा था।
(ii) उसने खाया था।




