সপ্তম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৪ – संत – वाणी – সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ | অসম জাতীয় বিদ্যালয় (AJB)

CLASS 7

Class 7 Hindi Chapter 14 संत – वाणी Solutions | AJB Assam

সপ্তম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৪ – संत – वाणी সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (AJB Assam)

সপ্তম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ চতুৰ্দশ অধ্যায় ‘संत – वाणी’ এখন অতি জ্ঞানবৰ্ধক আৰু শিক্ষামূলক পাঠ। অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 7 Hindi Chapter 14 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, ব্যাকৰণ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ অতি সহজ আৰু নিৰ্ভুলভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে ঘৰতে বহি সুন্দৰভাৱে অনুশীলন কৰিব পাৰে।

‘संत – वाणी’ নামৰ এই পাঠটিত মহান সন্ত আৰু কবিসকলৰ (যেনে— কবীৰ, ৰহিম আদি) অমূল্য দোঁহা আৰু নীতিবচনসমূহৰ জৰিয়তে জীৱনৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ নৈতিক শিক্ষা আৰু মূল্যবোধৰ বৰ্ণনা দাঙি ধৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু দোঁহাসমূহৰ তাৎপৰ্য বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে।

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এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:

  • মহান সন্তসকলৰ বাণীৰ মূল ভাৱ, নৈতিক শিক্ষা আৰু জীৱন মূল্যবোধৰ স্পষ্ট বিশ্লেষণ।
  • শব্দাৰ্থ, চমু আৰু দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ লগতে দোঁহাৰ সৰল অৰ্থৰ নিৰ্দোষ উত্তৰ।
  • পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ, বাক্য ৰচনা, সমাৰ্থক আৰু বিপৰীত শব্দৰ সঠিক জ্ঞান।
  • পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু তাৰ উত্তৰ।
  • নতুন আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ বহু-বিকল্পী প্ৰশ্নৰ (MCQs) সম্পূৰ্ণ সমাধান।

অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:

  • শেহতীয়া AJB নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
  • ১০০% নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে বুজিব পৰাকৈ সৰল ভাষাত যুগুতোৱা উন্নত মানৰ নোটছ (Class 7 Hindi Notes)।
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ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।

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Chapter 14 संत-वाणी/गोकुल लीला

 AJB Class 7: Hindi

Lesson-14                                                        Ospin Academy

संत-वाणी/गोकुल लीला

Texual Solutions

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो :

i) मीठी वाणी क्यों बोलनी चाहिए ?

उत्तरः हमें मीठी वाणी इसलिए बोलनी चाहिए क्योंकि इससे सुनने वाले व्यक्ति को तो खुशी मिलती ही है, साथ ही हमारे अपने मन को भी आनंद और शांति की अनुभूति होती है।

ii) कवि के अनुसार कौन पंडित हो सकता है?

उत्तरः कवि के मतानुसार जो व्यक्ति ‘प्रेम’ के ढाई अक्षरों को भली-भाँति पढ़ और समझ लेता है, वास्तव में वही सच्चा पंडित या ज्ञानी होता है।

iii) साधु से क्या पूछना चाहिए?

उत्तरः किसी भी साधु से उसकी जाति कभी नहीं पूछनी चाहिए, बल्कि उससे केवल ज्ञान की बातें ही पूछनी चाहिए। ठीक उसी प्रकार, जैसे लोग तलवार की धार और उसका मोल देखते हैं, उसके म्यान को नहीं।

iv) शिशु कृष्ण किसके सामने शिकायत करता है?

उत्तरः बालक श्रीकृष्ण अपनी माता यशोदा के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज करते हैं।

v) कृष्ण को कौन खिझाता हैं?

उत्तर : श्रीकृष्ण को उनके बड़े भाई दाऊ (बलराम या बलभद्र) बार-बार चिढ़ाते और खिझाते हैं।

vi) कृष्ण को किस तरह खिझाया जाता है?

उत्तरः बलराम यह कहकर कृष्ण को चिढ़ाते हैं कि नंद बाबा और माता यशोदा दोनों गोरे हैं, जबकि तुम्हारा रंग साँवला है, इसलिए तुम उनके सगे पुत्र नहीं हो सकते। यह बात सुनकर सभी ग्वाल-बाल चुटकी बजा-बजाकर नाचते हैं और हँसते हैं।

vii) यशोदा किसलिए मुग्ध हो जाती है?

उत्तरः बालक कृष्ण के मुख से गुस्से से भरी भोली-भाली और मीठी बातें सुनकर माता यशोदा पूरी तरह से मुग्ध और आनंदित हो जाती हैं।

viii) किसकी शपथ लेकर यशोदा कृष्ण को मनाने की कोशिश करती है ?

उत्तरः माता यशोदा अपनी पवित्र गायों की कसम खाकर बालक कृष्ण को यह विश्वास दिलाते हुए मनाती हैं कि मैं ही तुम्हारी असली माता हूँ और तुम ही मेरे पुत्र हो।

2. व्यख्यामूलक प्रश्न :

क) ‘मीठी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।

औरन को सीतल करै, आपहूँ सीतल होय ।।’

i) ‘मन का आपा’ का मतलब क्या है ?

उत्तरः ‘मन का आपा’ से कवि का तात्पर्य मनुष्य के मन में छिपे घमंड या अहंकार से है।

ii) ‘मन का आपा’ कब खो जाता है?

उत्तरः जब हम अपने हृदय का अहंकार त्याग कर मधुर वचनों द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को प्रसन्न करते हैं, तब हमारे मन का आपा पूरी तरह खो जाता है।

iii) हम अपने आप को किस तरह शांति दिला सकते हैं ?

उत्तरः स्वयं को वास्तविक शांति प्रदान करने के लिए हमें सबसे पहले अपनी मीठी वाणी के माध्यम से दूसरों के हृदय को शीतलता और शांति पहुँचानी होगी।

iv) क्या दरअसल मीठी बोली का महत्व है? अपनी राय दो।

उत्तरः हाँ, मीठी बोली का जीवन में अत्यधिक महत्व है। मधुर वाणी में वह शक्ति होती है जिससे कट्टर शत्रु को भी अपने वश में किया जा सकता है। मृदुभाषी होना एक श्रेष्ठ कला है जिसे अभ्यास के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। संसार के अधिकांश महापुरुषों में यह विशेष गुण मौजूद था। क्रोधित न होकर विनम्र रहना और कटु वचनों के स्थान पर मीठे शब्द बोलना ही जीवन में आगे बढ़ने की सही कला है। अतः मीठी वाणी का बहुत अधिक महत्त्व है।

ख) ‘जो तोको काँटा बुवै, ताहि बुव तू फूल। तोको फूल केफूल हैं, वाको है तिरसूल ।।’

i) किसके लिये फूल बोने की बात की गयी है?

उत्तरः यहाँ उस व्यक्ति के मार्ग में फूल बिछाने की बात कही गई है, जो हमारे रास्ते में काँटे बोता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जो व्यक्ति हमारा अहित चाहता है, हमें उसका भी भला ही सोचना चाहिए।

ii) प्रस्तुत साखी के जरिए कवि कौन-सा संदेश देना चाहते हैं ? समझाकर लिखो।

उत्तरः इस साखी के माध्यम से कवि हमें यह महान संदेश देना चाहते हैं कि जो व्यक्ति हमारा नुकसान करता है, हमें उसे भी पूरा मान-सम्मान देना चाहिए। संभव है कि हमारे इस अच्छे व्यवहार और सम्मान को देखकर एक दिन वह बुरा व्यक्ति भी बदल जाए और एक अच्छा इंसान बन जाए।

iii) ‘तिरसूल’ से कवि क्या कहना चाहते हैं?

उत्तरः ‘त्रिशूल’ शब्द के प्रयोग से कवि का आशय यह है कि यदि कोई हमारे प्रति दुर्भावना रखता है, तो भी हमें उस पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखनी चाहिए। अंततः इसका परिणाम यह होगा कि उस व्यक्ति की बुरी नज़र का फल उसे ही त्रिशूल की तरह चुभेगा, जबकि हमारी अच्छाई हमारे लिए फूलों के समान सुखदायी होगी।

iv) क्या उपर्युक्त पंक्तियों से तुम सहमत हो ? अपना विचार प्रस्तुत करो।

उत्तरः मैं इन उपर्युक्त पंक्तियों से पूर्ण रूप से सहमत नहीं हूँ, क्योंकि ऐसे आदर्श विचार महान संतों पर तो लागू हो सकते हैं, परंतु आम इंसानों के लिए ऐसा कर पाना बहुत कठिन है। इन बातों को अपने व्यवहार में ढालने के लिए असीम धैर्य की जरूरत होती है, जो आज के युग में प्रायः असंभव सा लगता है। वर्तमान समय में तो लोग ‘शठे शाठ्यं समाचरेत्’ (जैसे को तैसा) की नीति पर ही अधिक विश्वास करते हैं।

ग) ‘मोसौं कहत मोल कौ लीन्हौ, तू जसुमति कब जायौ।

कहा करौं इसि रिस के मारें खेलत हाँ नहि जात।’

i) कौन किसके सामने शिकायत करता है ?

उत्तरः यहाँ बालक श्रीकृष्ण माता यशोदा के सम्मुख शिकायत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि मैया, दाऊ मुझसे कहते हैं कि तुम्हें माता ने पैसे देकर खरीदा है। माता यशोदा ने तुम्हें जन्म नहीं दिया। इसी गुस्से के कारण मैं बाहर खेलने भी नहीं जाता।

ii) कौन किसलिए खेलने नहीं जाता है ?

उत्तरः बड़े भाई बलराम की चिढ़ाने वाली बातों से क्रोधित और नाराज़ होकर बालक कृष्ण बाहर अपने मित्रों के साथ खेलने नहीं जाते हैं।

iii) प्रस्तुत पंक्तियों को गद्यरूप में लिखो।

उत्तरः श्रीकृष्ण माता यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं- “मैया, दाऊ भैया मुझसे कहते हैं कि मैया ने तुम्हें जन्म नहीं दिया है, तुम्हें तो दाम देकर खरीदा गया है। मैं क्या करूँ, इसी क्रोध और नाराजगी की वजह से मैं बाहर खेलने के लिए भी नहीं जाता हूँ।”

घ) ‘सुनहू कान्ह, बलभद्र चबाई, जनमत ही कौ धूत। सूर स्याम मोहि गोधन की साँ, हाँ माता तू पूत ।।’

i) कौन बलभद्र को ‘चबाई’ कहती है? ‘चबाई’ का अर्थ क्या है?

उत्तरः माता यशोदा बलराम (बलभद्र) को ‘चबाई’ कहकर पुकारती हैं। यहाँ ‘चबाई’ शब्द का अर्थ है- चुगलखोर या इधर-उधर की बातें लगाने वाला।

ii) उपर्युक्त पंक्तियाँ किसके प्रति कही गयी है ?

उत्तरः ये उपर्युक्त पंक्तियाँ माता यशोदा द्वारा अपने प्रिय पुत्र श्रीकृष्ण को सांत्वना देने के लिए कही गई हैं।

iii) यशोदा कौन-सी शपथ लेती हैं ?

उत्तरः महाकवि सूरदास जी कहते हैं कि माता यशोदा अपनी पवित्र गायों (गोधन) की कसम खाकर बालक कृष्ण (श्याम) को शांत करती हैं और विश्वास दिलाती हैं।

iv) क्या दरअसल कृष्ण यशोदा की संतान हैं?

उत्तरः नहीं, वास्तविकता में देखा जाए तो श्रीकृष्ण माता यशोदा की अपनी जैविक संतान नहीं हैं।

v) कृष्ण के असली माता-पिता कौन है ?

उत्तरः श्रीकृष्ण को जन्म देने वाले उनके वास्तविक माता-पिता देवकी और वसुदेव जी हैं।

3. निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखकर वाक्य बनाओ :

आपा, मोल, प्रेम, सगुण, भक्ति, वात्सल्य, निर्गुण, अहिंसा, शिकायत ।

उत्तरः

आपा (अहंकार) : मनुष्य को अपने मन का ‘आपा’ मिटाकर ही मीठी वाणी में बात करनी चाहिए।

मोल (महत्त्व/मूल्य) : हमेशा ज्ञान का ‘मोल’ समझना चाहिए, तलवार का नहीं।

प्रेम (प्यार) : जो व्यक्ति ढाई अक्षर ‘प्रेम’ के भली-भाँति पढ़ लेता है, असल में वही पंडित है।

सगुण (साकार ब्रह्म) : महाकवि सूरदास जी ‘सगुण’ ईश्वर के अनन्य उपासक और भक्त थे।

भक्ति (भगवान के प्रति निष्ठा) : कबीरदास जी हिंदी साहित्य के ‘भक्ति’ काल के प्रमुख कवि माने जाते हैं।

वात्सल्य (बच्चों के प्रति प्रेम) : सूरदास की कृष्ण लीलाओं में ‘वात्सल्य’ रस की प्रधानता देखने को मिलती है।

निर्गुण (निराकार ब्रह्म) : संत कबीरदास जी ईश्वर के ‘निर्गुण’ रूप के महान उपासक थे।

अहिंसा (जिसमें हिंसा न हो) : हमारे शास्त्रों में ‘अहिंसा’ को सबसे परम धर्म माना गया है।

शिकायत (अभियोग) : बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से बलराम भैया की ‘शिकायत’ करते हैं।

4. निम्नलिखित अनेकार्थी शब्दो से वाक्य बनाओः

उदाहरण :

आम – एक उत्तम फल हैं।

फल – अच्छे कर्म का फल अच्छा ही निकलता हैं।

(i) आम

(ii) अंक

(iii) वर

(iv) पतंग

उत्तरः

(i) आम (फल) : गर्मियों के मौसम में ‘आम’ को फलों का राजा कहा जाता है।

आम (साधारण) : इस देश में मतदान करना हर ‘आम’ नागरिक का अधिकार है।

(ii) अंक (संख्या/मार्क्स) : मुझे गणित की परीक्षा में केवल दस ‘अंक’ ही कम मिले।

अंक (नाटक का भाग) : हमने उस प्रसिद्ध नाटक का चौथा ‘अंक’ बड़े ध्यान से देखा।

(iii) वर (दूल्हा) : विवाह के मंडप में सुचित्रा का ‘वर’ बहुत सुंदर लग रहा था।

वर (वरदान/चुनना) : माता सीता ने भगवान राम को ही अपने पति के रूप में ‘वरा’ (चुना) था।

(iv) पतंग (पक्षी) : तोता भी आकाश में उड़ने वाला एक सुंदर ‘पतंग’ (पक्षी) है।

पतंग (कागज की गुड्डी) : मकर संक्रांति के दिन बच्चे आसमान में रंग-बिरंगी ‘पतंग’ उड़ा रहे हैं।

5. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखो :

अनेक शब्द

i) मामा का भाई

ii) चाचा की बहन

iii) पिता की बहन

iv) भाई की पत्नी

v) साथ पढ़ने वाला

vi) मुसलमान सम्राट

vii) अपने भरोसे पर जीना

viii) मरते दम तक

ix) जिस पुरुष की पत्नी मर गयी हो

x) जो स्वयं पैदा हुआ हो

उत्तरः 

मामा।

फुफी।

पिसी-फुफी।

भौजाई ।

सहपाठी ।

बादशाह ।

आमरण।

आत्मनिर्भर ।

विधुर।

स्वंयभू ।

6. निम्नलिखित पुल्लिंग शब्दों को स्त्रीलिंग बनाओः

पड़ोसी, बंदर, दाता, श्रीमान, पुत्र, साधु, फूफा, विद्वान, आचार्य,

ससुर ।

उत्तरः

पड़ोसी – पड़ोसिन ।

बंदर-बंदरिया।

दाता-दात्री ।

पुत्र-पुत्री, पुत्रवधु ।

साधु-साध्वी ।

विद्वान-विदुषी ।

आयार्च-आचार्जी।

ससुर-सास ।




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সপ্তম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৪ (संत – वाणी) – সঘনাই সোধা প্ৰশ্ন (FAQs)
সপ্তম শ্ৰেণীৰ হিন্দীৰ চতুৰ্দশ অধ্যায়টোৰ নাম কি?
সপ্তম শ্ৰেণীৰ হিন্দীৰ চতুৰ্দশ অধ্যায়টোৰ নাম হ’ল ‘संत – वाणी’। এই পাঠটিত মহান সন্তসকলৰ অমূল্য দোঁহা আৰু নীতিবচনসমূহৰ জৰিয়তে জীৱনৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ নৈতিক শিক্ষা প্ৰদান কৰা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কি কি অন্তৰ্ভুক্ত আছে?
ইয়াত মূল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ সকলো প্ৰশ্নোত্তৰ, দোঁহাৰ সৰল অৰ্থ, ব্যাকৰণ, পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে।
এই সমাধানসমূহ AJB ৰ নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা হৈছেনে?
হয়, এই সকলোবোৰ সমল অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰম আৰু নিৰ্দেশনা অনুসৰি প্ৰস্তুত কৰা হৈছে।
পৰীক্ষাৰ বাবে অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু MCQs পঢ়াটো প্ৰয়োজনীয়নে?
হয়, দোঁহাসমূহৰ ওপৰত স্পষ্ট ধাৰণা ল’বলৈ আৰু পৰীক্ষাত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰিবলৈ অনুশীলনীৰ লগতে অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু MCQ সমাধান কৰাটো অতি প্ৰয়োজনীয়।

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