Class 8 Hindi Chapter 11 – मेरा नया बचपन (মেৰা নয়া বচপন) – All Textual Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan (শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন)
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১১ – मेरा नया बचपन (মেৰা নয়া বচপন) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (Sankardev Sishu Vidya Niketan)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ একাদশ অধ্যায় ‘मेरा नया बचपन’ এখন অতি সুন্দৰ আৰু আৱেগিক কবিতা। শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 11 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions), বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) আৰু ব্যাকৰণৰ পুংখানুপুংখ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ সহজ, নিৰ্ভুল আৰু সম্পূৰ্ণ পৰীক্ষামুখীভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে।
‘मेरा नया बचपन’ নামৰ এই পাঠটিত শৈশৱৰ অমলিন স্মৃতি, নিৰ্দোষ আনন্দ আৰু জীৱনৰ সেই সোণালী সময়খিনিৰ প্ৰতি থকা হেঁপাহৰ এক মনোৰম বৰ্ণনা দাঙি ধৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই কবিতাৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু কবিৰ অনুভৱ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে প্ৰস্তুতি চলাব পাৰে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- কবিতাটিৰ সাৰাংশ, শৈশৱৰ স্মৃতিৰ বৰ্ণনা আৰু কবিৰ আৱেগৰ বিস্তৃত বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA) আৰু চমু প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
- দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ সহজ তথা মান্য সমাধান।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ আৰু ভাষিক জ্ঞানৰ সঠিক ধাৰণা।
- নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ অতিৰিক্ত প্ৰশ্নসমূহৰ লগতে শেহতীয়া আৰ্হিৰ MCQ প্ৰশ্নৰ সমাধান।
অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
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ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।
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শংকৰদেৱ বিদ্যা নিকেতন, অষ্টম শ্ৰেণী: হিন্দী
मेरा नया बचपन
পাঠভিত্তিক প্রশ্নোত্তৰ
१। (क) बचपन में ऐसी कौन सी विशेषता होती है, जिसकी बार-बार याद आती है ?
उत्तर: बचपन के दिनों में अपार आनंद छिपा रहता है। यह समय बिना किसी फिक्र के खेलने-कूदने और खाने-पीने का होता है, जहाँ बिना डरे आज़ादी के साथ कहीं भी घूमा जा सकता है। यह मनुष्य के जीवन का सर्वाधिक सुहाना समय होता है। लड़कपन की इन्हीं खासियतों की याद इंसान को बार-बार सताती है।
(ख) कवयित्री क्यों चाहती हैं कि उनका बचपन फिर से लौट आए ?
उत्तर: मनुष्य का लड़कपन असीम खुशियों का खजाना माना जाता है। यह अवस्था सभी दुखों को दूर करके एक पवित्र शांति का अनुभव कराती है। जब एक शिशु रोता है, तब माता अपने सब काम-काज छोड़ उसे सीने से लगा लेती है। उन आंसुओं और ज़िद में भी एक अनोखा सुख मौजूद रहता है। इस उम्र में बेफिक्र होकर खेलने-खाने के साथ-साथ निडरतापूर्वक आज़ाद ख्यालों से घूमा-फिरा जा सकता है। इसी वजह से कवयित्री यह कामना करती हैं कि उनका वह बीता हुआ बचपन दोबारा लौट आए।
(ग) वह प्यारा जीवन निष्पाप का अर्थ स्पष्ट करो।
उत्तर: कोई भी इंसान बचपन के इस सुखद एहसास से वंचित नहीं रह पाता है। बचपन की यही वह अवस्था है जो इंसान को भरपूर खुशी देती है। यह समय बहुत ही प्यारा और किसी भी प्रकार की हिंसा से मुक्त होता है। बच्चों के मन में किसी तरह का कोई छल-कपट या ईर्ष्या-द्वेष नहीं होता। यह जीवन की तमाम परेशानियों को मिटाकर एक अत्यंत पवित्र और सच्ची शांति प्रदान करता है।
(घ) मेरा नया बचपन कविता के प्रतिपाद्य को स्पष्ट करो।
उत्तर: दी गई इस कविता के भीतर कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी ने अपनी नन्ही बिटिया के रूप में स्वयं के बचपन का सुंदर चित्रण किया है। बाल्यावस्था असीमित खुशियों का एक भंडार होती है। संसार का कोई भी व्यक्ति इसके सुखद एहसास से अछूता नहीं रह पाता। कवयित्री यह महसूस करती हैं कि बालपन के दिनों में ही सच्ची पवित्रता और प्राकृतिक सुकून मौजूद होता है।
२। आशय स्पष्ट करो :
(क) बार बार …. खुशी मेरी।
उत्तर: कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी को बार-बार अपने बीते हुए लड़कपन की स्मृतियाँ सताती हैं, क्योंकि यह इंसान की उम्र का सबसे सुहाना दौर होता है। बालपन की असीम खुशियों को इंसान कभी विस्मृत नहीं कर पाता। परंतु वक़्त के साथ बड़े होकर लोग जब बचपन छोड़कर प्रौढ़ावस्था (जवानी) की ओर बढ़ते हैं, तो वह लड़कपन का सुख कहीं खो जाता है। केवल उस सुनहरे बचपन की मीठी यादें शेष रह जाती हैं। इसी कारण कवयित्री ने समय को दोष देते हुए कहा है कि समय ने उनके जीवन का सबसे आनंददायक दौर यानी उनका बचपन उनसे छीन लिया है।
(ख) मैं बचपन…. कुटिया मेरी।
उत्तर: कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जिस वक़्त अपने बालपन की हसीन यादों में डूबी हुई थीं, ठीक उसी पल उनकी छोटी सी बेटी कुछ बोल पड़ी। बच्ची की उस प्यारी सी आवाज़ से कवयित्री का पूरा घर स्वर्ग के बगीचे (नंदन वन) के समान महक उठा और हर ओर खुशी की लहर दौड़ गई। कवयित्री अपनी उस छोटी बच्ची के बालपन में ही खुद को समाहित कर लेती हैं।
३। सही कथन पर (✔) का चिह्न लगाओ :
३। सही कथन पर (✔) का चिह्न लगाओ :
(क) कवयित्री को बार-बार बचपन की याद आती है, क्योंकि —
(अ) उनकी माँ उन्हें बहुत प्यार करती थी।
(आ) बचपन अतुलित आनंद का भंडार होता है। ✔
(इ) बचपन में कोई काम नहीं करना पड़ता।
(ख) बड़े-बड़े मोती से आँसू —
(अ) झूला झुलाते थे।
(आ) जयमाला पहनाते थे। ✔
(इ) आनंद दिलाते थे।
(ग) बचपन में रोने पर कवयित्री की माँ —
(अ) उन्हें गोद में उठाकर खूब प्यार करती थी। ✔
(आ) उन्हें बिल्ली से डराती थी।
(इ) उनकी पिटाई कर देती थी।
(घ) कवयित्री की बिटिया उन्हें क्या खिलाने आई थी ?
(अ) मिठाई
(आ) चॉकलेट
(इ) मिट्टी ✔
४। रिक्त स्थानों की पूर्ति करो :
(क) जिसे खोजती थी बरसों से,
अब जाकर उसको पाया,
भाग गया था मुझे छोड़कर,
वह बचपन फिर से आया।
(ख) आ जा बचपन एक बार फिर,
दे दे अपनी निर्मल शांति,
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली,
वह अपनी प्राकृत विश्रांति ।
५। (क) मेरा नया बचपन कविता की रचयिता कौन है ?
उत्तर: ‘मेरा नया बचपन’ नामक इस कविता की रचना सुभद्रा कुमारी चौहान जी ने की है।
(ख) कवयित्री किसे बुला रही थी ?
उत्तर: कवयित्री अपने बीते हुए प्यारे और सुनहरे बचपन को वापस पुकार रही थीं।
(ग) कवयित्री को नया जीवन किस रूप में प्राप्त हुआ?
उत्तर: कवयित्री को नवजीवन अपनी नन्ही सी बच्ची के लड़कपन के रूप में हासिल हुआ।
(घ) कवयित्री को मिट्टी खिलाने कौन आई थी ?
उत्तर: कवयित्री को अपने नन्हे हाथों से मिट्टी खिलाने उनकी छोटी सी बिटिया उनके पास आई थी।
(ङ) अपनी बिटिया की किस बात से कवयित्री बहुत खुश हुई ?
उत्तर: जब कवयित्री की छोटी बच्ची उन्हें प्यार से ‘माँ’ पुकारते हुए मिट्टी खिलाने आई, तो यह देखकर कवयित्री बहुत अधिक खुश हुईं।
(च) कवयित्री के पास बचपन क्या बनकर आया ?
उत्तर: कवयित्री के जीवन में वह बीता हुआ बचपन उनकी अपनी बेटी का रूप लेकर वापस लौट आया।
(छ) किसकी मंजुल मूर्ति देखकर कवयित्री में नव-जीवन जाग उठा ?
उत्तर: अपनी प्यारी सी बिटिया का सुंदर और मोहक रूप (मंजुल मूर्ति) देखकर कवयित्री के भीतर एक नए जीवन का संचार हो उठा।
(ज) क्या तुम्हें भी बचपन प्रिय है?
उत्तर: जी हाँ, मुझे भी अपना बचपन बहुत प्यारा लगता है।
भाषा अध्ययन
६। पर्यायवाची शब्द :
आकाश – गगन, आसमान
पृथ्वी – धरती, धरा
मधुर – मीठा, प्यारा
खुशी – आनंद, हर्ष
निर्मल – शुद्ध, मलहीन
माँ – जननी, माता
मंजुल – मनोहर, सुन्दर
सरलता – सादगी, सीधापन




