Class 7 Hindi Chapter 9 चलना हमारा काम है Solutions | AJB Assam
সপ্তম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৯ – चलना हमारा काम है (Chalna Hamara Kaam Hai) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (AJB Assam)
সপ্তম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ নৱম অধ্যায় ‘चलना हमारा काम है’ কবি শিৱমঙ্গল সিং ‘সুমন’ৰ দ্বাৰা ৰচিত এখন অতি সুন্দৰ আৰু অনুপ্ৰেৰণামূলক কবিতা। অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 7 Hindi Chapter 9 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, ব্যাকৰণ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ অতি সহজ আৰু নিৰ্ভুলভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে ঘৰতে বহি সুন্দৰভাৱে অনুশীলন কৰিব পাৰে।
‘चलना हमारा काम है’ নামৰ এই কবিতাটিত জীৱনৰ পথত নিৰন্তৰ কৰ্ম কৰি যোৱা, বাধা-বিঘিনি অতিক্ৰম কৰি লক্ষ্যৰ দিশে আগবাঢ়ি যোৱা আৰু কেতিয়াও থমকি নৰোৱাৰ এক গভীৰ বাৰ্তা দাঙি ধৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই কবিতাটিৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু তাৎপৰ্য বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- কবিতাটিৰ মূল ভাৱ, জীৱন সংগ্ৰাম আৰু নিৰন্তৰ প্ৰগতিৰ বাৰ্তাৰ স্পষ্ট বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, চমু আৰু দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ, বাক্য ৰচনা, সমাৰ্থক আৰু বিপৰীত শব্দৰ সঠিক জ্ঞান।
- পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু তাৰ উত্তৰ।
- নতুন আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ বহু-বিকল্পী প্ৰশ্নৰ (MCQs) সম্পূৰ্ণ সমাধান।
অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- শেহতীয়া AJB নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
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ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।
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AJB Class 7: Hindi
चलना हमारा काम है
Texual Solutions
अभ्यास-माला
1. खाली जगहों की पूर्ति करो :
i) जीवन अपूर्ण लिए हुए
पाता कभी, ………..,
आशा-निराशा से घिरा
………….रोता कभी,
उत्तरः
जीवन अपूर्ण लिए हुए
पाता कभी, खोता, कभी
आशा-निराशा से घिरा
हँसता, कभी रोता कभी,
ii) इस विशद विश्व-प्रवाह में
किसको नहीं………..
सुख-दुख हमारी ही तरह
किसको नहीं………..
उत्तरः
इस विशद विश्व-प्रवाह में
किसको नहीं बहना पड़ा,
सुख-दुख हमारी ही तरह
किसको नहीं सहना पड़ा।
iii) कुछ साथ में………..
कुछ बीच में ही……….
पर गति न जीवन की रुकी,
जो गिर गये………..।
उत्तरः
कुछ साथ में चलते रहे
कुछ बीच में ही रह गये,
पर गति न जीवन की रुकी,
जो गिर गये सो गिर गये।
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :
i) ‘चलना हमारा काम है’ कविता के कवि कौन हैं?
उत्तरः ‘चलना हमारा काम है’ नामक कविता के रचयिता श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी हैं।
ii) कवि के अनुसार हमारे जीवन में एकमात्र काम क्या है?
उत्तरः कवि के मतानुसार हमारे जीवन का इकलौता लक्ष्य निरंतर आगे ‘चलते रहना’ है।
iii) आठों याम किस बात का ध्यान रहता हैं?
उत्तरः आठों पहर केवल इसी बात का विचार रहता है कि हमारी प्रगति अथवा आगे बढ़ने की रफ्तार में कोई बाधा न उत्पन्न हो।
iv) कवि दर-दर क्यों भटकता रहा ?
उत्तरः जीवन में पूर्णता की तलाश करने के कारण कवि को दर-दर भटकना पड़ा।
v) किसको सफलता अभिराम है ?
उत्तरः जो लोग अपने जीवन के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने का दृढ़ निश्चय कर लेते हैं, असल में उन्हीं के लिए सफलता सुखद (अभिराम) होती है।
vi) कविता का मूल संदेश क्या है?
उत्तरः इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि हमें अपने मार्ग से विचलित हुए बिना हमेशा निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
3. प्रस्तुत कविता का सारांश लिखो।
उत्तरः कृपया मूल पाठ का सारांश पढ़ें।
4. गद्य भाषा में लिखो :
i) चलना हमारा काम है।
गति प्रबल पैरों में भरी
फिर क्यों रहूँ, दर पर खड़ा,
जब आज मेरे सामने
है रास्ता इतना पड़ा।
उत्तरः जब मेरे पैरों में तीव्र गति मौजूद है, तो मैं दरवाजे पर क्यों रुका रहूँ? विशेषकर तब, जब आज मेरे सम्मुख इतना विशाल मार्ग खुला हुआ है। इसलिए निरंतर चलते रहना ही हमारा कर्तव्य है।
ii) मैं पूर्णता की खोज में
दर-दर भटकता ही रहा,
प्रत्येक पग पर कुछ न कुछ
रोड़ा अटकता ही रहा
होवे निराशा क्यों मुझे ? जीवन इसी का नाम है।
उत्तरः जब भी मैं पूर्णता की तलाश में अपने कदम आगे बढ़ाता हूँ, तो हर एक कदम पर कोई न कोई रुकावट सामने आ ही जाती है। परंतु इस बात से मैं निराश क्यों होऊँ? असल में इसी संघर्ष का नाम ही जीवन है।
5. सही विकल्प को चुनकर लिखो :
i) ‘चलना हमारा काम है’ कविता के कवि का नाम है-
क) मैथिलीशरण गुप्त
ख) कबीर दास
ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
घ) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
उत्तरः (ग) शिवमंगल सिंह ‘सुमन’।
ii) कवि के अनुसार जीवन में हमें सिर्फ-
क) खेलते रहना है
ख) पढ़ते रहना है
ग) खाते रहना है
घ) चलते रहना है
उत्तरः (घ) चलते रहना है।
iii) कवि के अनुसार हमारा नाम-
क) मधु है
ख) राही है
ग) सुमन है
घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तरः (ख) राही है।
iv) कवि के अनुसार जीवन-
क) आशा और निराशा से भरा है
ख) सुख-सान्ति से भरा है
ग) आनन्द और उल्लास से भरा है
घ) सिर्फ दुःखों से भरा है।
उत्तरः (क) आशा और निराशा से भरा है।
6. कवित्ता के आस-पास :
क) तुम गरीबों के पास जाकर क्या उपदेश देना चाहोगे ?
उत्तरः मैं निर्धन लोगों के समीप जाकर उन्हें यह शिक्षा देना चाहूँगा कि वे कभी भी अपने जीवन से हताश न हों। उन्हें अपनी किस्मत को भी दोष नहीं देना चाहिए। बस अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु उन्हें सदा अपने कर्म-मार्ग पर अग्रसर रहना चाहिए।
ख) जिसका जीवन प्रायः असफलताओं से भरा है, उसे तुम किस तरह फिर से आगे बढ़ने को कहोगे ?
उत्तरः जिस तरह रात के पश्चात दिन और दिन के पश्चात रात का आना तय है, और जिस तरह सुख के बाद दुःख तथा दुःख के बाद सुख का आना अटल है, बिल्कुल वही नियम सफलता और असफलता पर भी लागू होता है। नाकामी के बाद कामयाबी का मिलना भी निश्चित है। यदि असफलता का अस्तित्व न हो, तो सफलता का महत्व ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि हर कामयाबी के पीछे एक नाकामी छिपी होती है। अतः ये दोनों एक-दूसरे के अभिन्न अंग (पूरक) हैं।
7. भाषा-अध्ययन :
i) निम्नलिखित शब्दों से वाक्य बनाओ :
प्रबल, विराम, शाश्वत, मंजिल, अभिराम, भेद-भाव
उत्तरः
प्रबल : मेरे कदमों में प्रबल गति है, अतः मुझे दरवाजे पर रुकना नहीं चाहिए।
विराम : जब तक मुझे मेरा लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक मेरे जीवन में कोई विराम नहीं है।
शाश्वत : जीवन के मार्ग पर शाश्वत रूप से चलते रहना ही कामयाबी का मूल मंत्र है।
मंजिल : मंजिल केवल उसी व्यक्ति को प्राप्त होती है, जिसे निरंतर अपने मार्ग पर चलने का अभ्यास हो।
अभिराम : गुवाहाटी शहर की प्राकृतिक सुंदरता अत्यंत अभिराम (मनमोहक) है।
भेद-भाव : हमें अपने समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ भेद-भाव नहीं करना चाहिए।
ii) निम्नलिखित शब्दों के विलोम रूप लिखो :
आज, मिलना, जीवन, पूर्ण, आशा, पाना, सुख, सफलता, पण्डित, संयोग, उत्तीर्ण, कटु।
उत्तरः
आज – कल
जीवन – मृत्यु
मिलना – बिछड़ना
पूर्ण – अपूर्ण
आशा – निराशा
पाना – खोना
सुख – दुःख
सफलता – विफलता / असफलता
पठित – अपठित
संयोग – वियोग
उत्तीर्ण – अनुत्तीर्ण
कटु – मधु
iii) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखो :
क) जिसका कोई शत्रु न हो-
ख) अतिथि का सत्कार-
ग) उपजाऊ भूमि-
घ) अनुपजाऊ भूमि-
ङ) किए गए उपकार को माननेवाला-
च) किए गए उपकार को न माननेवाला-
छ) सदा-सदा के लिए रहना-
ज) जो बहुत बोलता हो-
झ) जो कम बोलता है-
ञ) मत देने का अधिकार-
उत्तरः
क) जिसका कोई शत्रु न हो – अजातशत्रु।
ख) अतिथि का सत्कार – आतिथ्य।
ग) उपजाऊ भूमि – उर्वर भूमि।
घ) अनुपजाऊ भूमि – मरुभूमि (या ऊसर)।
ङ) किए गए उपकार को माननेवाला – कृतज्ञ।
च) किए गए उपकार को न माननेवाला – कृतघ्न।
छ) सदा-सदा के लिए रहना – शाश्वत।
ज) जो बहुत बोलता हो – वाचाल।
झ) जो कम बोलता है – मितभाषी।
ञ) मत देने का अधिकार – मताधिकार।




