Class 6 Hindi Chapter 4 सच्चा चेला Solutions | AJB Assam
ষষ্ঠ শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৪ – सच्चा चेला (Sachcha Chela) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (AJB Assam)
ষষ্ঠ শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ চতুৰ্থ অধ্যায় ‘सच्चा चेला’ এখন অতি সুন্দৰ আৰু শিক্ষামূলক পাঠ। অসম জাতীয় বিদ্যালয়ৰ (AJB) শেহতীয়া নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 6 Hindi Chapter 4 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, ব্যাকৰণ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ অতি সহজ আৰু নিৰ্ভুলভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে ঘৰতে বহি অনুশীলন কৰিব পাৰে।
‘सच्चा चेला’ নামৰ এই পাঠটিত গুৰু আৰু শিষ্যৰ মাজৰ পৱিত্ৰ সম্পৰ্ক, এজন প্ৰকৃত শিষ্যৰ গুৰুভক্তি, নিষ্ঠা আৰু ত্যাগৰ মহান কাহিনী বৰ্ণনা কৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলক আদৰ্শ আৰু শ্ৰদ্ধাশীল হ’বলৈ অনুপ্ৰেৰণা যোগোৱা এই পাঠৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু তাৎপৰ্য বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- গুৰু-শিষ্যৰ সম্পৰ্ক আৰু এজন প্ৰকৃত শিষ্যৰ আদৰ্শ গুণাৱলীৰ স্পষ্ট বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, চমু আৰু দীঘলীয়া প্ৰশ্নৰ পৰীক্ষাত লিখিব পৰা নিৰ্দোষ উত্তৰ।
- পাঠভিত্তিক ব্যাকৰণ, বাক্য ৰচনা, সমাৰ্থক আৰু বিপৰীত শব্দৰ সঠিক জ্ঞান।
- পৰীক্ষাৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions) আৰু তাৰ উত্তৰ।
- নতুন আৰ্হি অনুসৰি গুৰুত্বপূৰ্ণ বহু-বিকল্পী প্ৰশ্নৰ (MCQs) সম্পূৰ্ণ সমাধান।
অস্পীন একেডেমীৰ এই প্ৰশ্নোত্তৰসমূহৰ বিশেষ সুবিধা:
- শেহতীয়া AJB নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত প্ৰস্তুত কৰা সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান।
- ১০০% নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীয়ে সহজে বুজিব পৰাকৈ সৰল ভাষাত যুগুতোৱা উন্নত মানৰ নোটছ (Class 6 Hindi Notes)।
- পৰীক্ষাৰ পূৰ্বে দ্ৰুত ৰিভিজনৰ (Quick Revision) বাবে বিশেষভাৱে প্ৰস্তুত কৰা সহজ-সৰল উত্তৰ।
- হিন্দী ভাষাৰ ভয় দূৰ কৰি বিষয়টোৰ প্ৰতি আগ্ৰহ বঢ়াবলৈ ব্যৱহাৰিক উদাহৰণৰ সহায়ত বুজোৱা সমাধান।
ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ শৈক্ষিক উত্তৰণৰ প্ৰতি লক্ষ্য ৰাখি অস্পীন একেডেমীয়ে এই বিশেষ পাঠ্যভিত্তিক সমাধান আগবঢ়াইছে। আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতি এতিয়াই আৰম্ভ কৰক আৰু হিন্দী বিষয়ত সৰ্বোচ্চ নম্বৰ লাভ কৰাৰ দিশত আগবাঢ়ক।
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অসম জাতীয় বিদ্যালয়, ষষ্ঠ শ্ৰেণী: হিন্দী
चौथा पाठ: सच्चा चेला
Texual Solutions
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखो:
(i) मथुरादास बुढ़ा आता के गुरु कौन थे ?
उत्तर : मथुरादास बूढ़ा आता के गुरुदेव हरिदेव मिश्र जी थे।
(ii) कितने भक्तों को साथ लेकर वे माधवदेव के पास पहुँचे ?
उत्तर : वे अपने साथ कुल अठारह भक्तों को लेकर माधवदेव जी के पास गए थे।
(iii) माधवदेव के गुरु कौन थे ?
उत्तर : श्री शंकरदेव जी माधवदेव के गुरु थे।
(iv) उन दिनों माधवदेव कहाँ रहते थे ?
उत्तर : उस समय माधवदेव सुंदरीदिया नामक जगह पर निवास करते थे।
2. मथुरादास बुढ़ा आता के बारे में कम से कम पाँच वाक्य लिखो।
उत्तर : मथुरादास बूढ़ा आता एक महान वैष्णव विद्वान थे। वे ज्ञान के सच्चे खोजी थे और बरपेटा सत्र के सत्राधिकार रहे थे। उनके गुरु का नाम हरिदेव मिश्र था। एक बार उन्होंने अपने गुरु से एक सच्चे गुरु के आवश्यक गुणों के बारे में जानना चाहा, तो हरिदेव मिश्र ने उन्हें श्री माधवदेव के पास भेज दिया। माधवदेव जी के पास जाकर वे उनके ज्ञान से अत्यंत प्रभावित हुए। कठिन परीक्षा में सफल होकर वे माधवदेव के सच्चे शिष्य बन गए और आगे चलकर एक श्रेष्ठ वैष्णव संत कहलाए।
3. ‘सच्चा चेला उनको मिल गया।’ किसे कैसे सच्चा चेला मिल गया था ?
उत्तर : श्री माधवदेव ने मथुरादास और उनके अठारह साथियों से कहा कि दीक्षा प्राप्त करने से पूर्व उन्हें जमीन पर अपने पहले गुरु का नाम लिखकर उसे पैरों से मिटाना होगा। मथुरादास के अलावा अन्य सभी अठारह लोगों ने वैसा ही किया, लेकिन मथुरादास ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। उनका मानना था कि जिस गुरु की कृपा से उन्हें माधवदेव जी के दर्शन हुए हैं, उनका अपमान करने से अच्छा है कि वे दीक्षा ही न लें। उनकी यह निष्ठापूर्ण बात सुनकर माधवदेव मुस्कुरा उठे और इस तरह उन्हें (माधवदेव को) एक सच्चा शिष्य प्राप्त हो गया।
4. मथुरादास की जगह तुम होते तो क्या करते ?
उत्तर : यदि मैं मथुरादास के स्थान पर होता, तो मैं भी कोई ऐसा काम बिल्कुल नहीं करता जिससे मेरे गुरु के सम्मान और मर्यादा को ठेस पहुँचे।
5. बाकी अठारह भक्त वापस चले गये थे। अगर माधवदेव की जगह तुम होते तो तुम क्या करते? क्या उन्हें जाने देते सोचो।
उत्तर : यदि मैं माधवदेव जी की जगह होता, तो मैं सबसे पहले उन अठारह भक्तों को यह समझाता कि हमें अपने गुरु का निरादर कभी नहीं करना चाहिए। उन्हें सही और गलत का अंतर स्पष्ट करता तथा अपने जीवन के आदर्शों और सिद्धांतों का पालन करने की सीख देता।
6. सजाकर लिखो:
(i) मिश्र हरिदेव था नाम उनके गुरुदेव।
उत्तर : उनके गुरुदेव का नाम हरिदेव मिश्र था।
(ii) पाकर आज्ञा गुरु प्रणाम की किया।
उत्तर : गुरु की आज्ञा पाकर प्रणाम किया।
(iii) गुरु का तिरस्कार नहीं कर मैं अपने पाऊगाँ।
उत्तर : मैं अपने गुरु का तिरस्कार नहीं कर पाऊँगा।
7. दो या तीन वाक्यों में उत्तर लिखो :
(i) मथुरादास बुढ़ा आता ने अपने गुरुदेव से कौन-सा सवाल किया था ? गुरु से उनको क्या उत्तर मिला ?
उत्तर : मथुरादास बूढ़ा आता ने अपने गुरु से यह प्रश्न किया था- “हे गुरुदेव, कृपया गुरु बनने के योग्य लक्षणों और गुणों के बारे में बताइए।” इसके जवाब में उनके गुरु ने कहा- “बेटा! तुम सद्गुरु माधवदेव की शरण में जाओ। वहीं तुम्हें सच्चा तत्वज्ञान प्राप्त होगा और तुम्हारी सभी इच्छाएं पूरी होंगी।”
(ii) मथुरादास ने माधवदेव से दीक्षा लेने से क्यों इनकार किया ?
उत्तर : मथुरादास ने माधवदेव जी से दीक्षा लेने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें अपने पुराने गुरु का नाम जमीन पर लिखकर उसे पैरों से मिटाने का आदेश दिया गया था। मथुरादास अपने गुरु का ऐसा घोर अपमान सहन नहीं कर सकते थे।
(iii) आगे चलकर मथुरादास क्या बने ?
उत्तर : समय के साथ मथुरादास एक विख्यात वैष्णव भक्त के रूप में उभरे। वे बरपेटा सत्र के सत्राधिकार बने और लोगों के बीच एक महान आदर्श पुरुष के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
8. खाली जगहों की पूर्ति करो:
(i) मथुरादास पहले पंथी थे। उनके गुरुदेव का नाम था —-।
(iii) सच्चा चेला– मिल गया।
(iv) मथुरादास आगे चलकर प्रसिद्ध भक्त बने।
(v) बहुत से शिष्य उस दिन थे।
उत्तर :
(i) चैतन्यपंथी
(ii) हरिदेव मिश्र
(iii) उनको
(iv) वैष्णव
(v) मौजूद




