সপ্তম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৫ – तुम कब जाओगे, अतिथि (Tum Kab Jaoge, Atithi) – সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু MCQ | শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন (Sankardev Sishu Vidya Niketan)
সপ্তম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ১৫ – ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন আৰু সমাধান (শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন – Assamese Medium)
শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (Sankardev Sishu Vidya Niketan) সপ্তম শ্ৰেণীৰ হিন্দী পাঠ্যক্ৰমৰ ১৫শ অধ্যায় হ’ল ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’। নতুন পাঠ্যক্ৰম আৰু শিক্ষা নীতিৰ (NEP) শেহতীয়া নিৰ্দেশনাৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 7 Hindi Chapter 15 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন, চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, MCQ (বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন) আৰু অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্নসমূহ অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ সহজ, নিৰ্ভুল আৰু ছাত্ৰ-ছাত্ৰীৰ উপযোগী কৰি প্ৰস্তুত কৰা হৈছে।
‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ এক প্ৰখ্যাত ব্যংগাত্মক (Satirical) কাহিনী। এই পাঠটোৰ জৰিয়তে লেখক শৰদ যোশীয়ে আমন্ত্ৰণ নজনাকৈ অহা অতিথিসকলৰ বিড়ম্বনা আৰু সামাজিক দৃষ্টিভংগীৰ ওপৰত এক সুন্দৰ বৰ্ণনা দাঙি ধৰিছে। শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই পাঠৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু ব্যংগাত্মক দিশবোৰ বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই সমাধানত পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহৰ লগতে পৰীক্ষাত সঘনাই অহা অতিৰিক্ত প্ৰশ্নোত্তৰো সামৰি লোৱা হৈছে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
- ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ পাঠটিৰ সাৰাংশ, মূল ভাৱ আৰু ব্যংগাত্মক দিশৰ বিশদ বিশ্লেষণ।
- শব্দাৰ্থ, ১ নম্বৰৰ অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA) আৰু MCQ প্ৰশ্নৰ নিখুঁত উত্তৰ।
- পাঠভিত্তিক চমু আৰু দীঘলীয়া প্ৰশ্নসমূহৰ সৰল তথা মান্য সমাধান।
- পৰীক্ষাৰ প্ৰস্তুতিৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰ (Additional Question Answers)।
- ব্যাকৰণগত অংশ আৰু প্ৰয়োজনীয় শব্দৰ সঠিক অৰ্থ।
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শংকৰদেৱ বিদ্যা নিকেতন, সপ্তম শ্ৰেণী: হিন্দী
तुम कब जाओगे, अतिथि
পাঠভিত্তিক প্রশ্নোত্তৰ
1. (क) लेखक अतिथि को दिखाकर कैलेंडर की तारीखें क्यों बदल रहे थे?
उत्तरः लेखक अपने मेहमान के सामने ही कैलेंडर की तारीखें इसलिए बदल रहे थे, ताकि वे उन्हें इस बात का एहसास करा सकें कि उन्हें यहाँ रुके हुए काफी दिन बीत चुके हैं और अब उन्हें अपने घर लौट जाना चाहिए।
(ख) लेखक तथा उनकी पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया था ?
उत्तरः लेखक ने प्रेमपूर्ण मुस्कान के साथ अपने मेहमान को गले से लगा लिया और उनकी धर्मपत्नी ने आदरपूर्वक नमस्ते कहकर अतिथि का सत्कार किया।
(ग) मेहमान के स्वागत में दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा प्रदान की गई थी ?
उत्तरः अतिथि के सत्कार स्वरूप दोपहर के साधारण भोजन को ‘लंच’ जैसी उच्च गरिमा प्रदान की गई थी।
(घ) तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा ?
उत्तरः तीसरे दिन की प्रातःकाल मेहमान ने लेखक को बताया कि वे अपने मैले कपड़े धोबी को धुलने के लिए देना चाहते हैं।
(ङ) सत्कार की उष्मा समाप्त हो जाने पर क्या हुआ ?
उत्तरः आदर-सत्कार का उत्साह खत्म होने के बाद आहिस्ता-आहिस्ता लेखक के मन के भाव गालियों में बदलने लगे, शानदार डिनर की जगह सादी खिचड़ी ने ले ली और मेजबान-मेहमान का यह रिश्ता एक नाज़ुक दौर से गुजरने लगा।
2. (क) मेहमान के आते ही लेखक पर क्या प्रतिक्रिया हुई ?
उत्तरः अतिथि के आगमन पर लेखक का हृदय किसी अनजानी शंका से काँप गया और आर्थिक बोझ के विचार से वे घबरा गए। फिर भी, लेखक ने एक स्नेह-भरी मुस्कान के साथ मेहमान का अभिनंदन किया और उनकी पत्नी ने भी ससम्मान नमस्ते की।
(ख) मेहमान के स्वागत में रात्रि-भोज को किस प्रकार गरिमापूर्ण बनाया गया था ?
उत्तरः अतिथि के आदर में रात के खाने को ‘डिनर’ का भव्य रूप प्रदान किया गया। इस भोजन में दो प्रकार की सब्जियों व रायते के अतिरिक्त मिष्ठान का भी प्रबंध किया गया था।
(ग) लेखक के लिए कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और क्यों ?
उत्तरः मेहमान ने जब तीसरे दिन की सुबह अपने कपड़े धोबी को देने की इच्छा जताई, तो यह चोट लेखक के लिए बिल्कुल अनपेक्षित थी; क्योंकि अतिथि के सत्कार में प्रतिदिन उनका आर्थिक खर्च लगातार बढ़ता चला जा रहा था।
(ङ) तेखक का सौहार्द बोरियत में क्यों बदल गया ?
उत्तरः लेखक की आत्मीयता ऊब में इसलिए परिवर्तित हो गई, क्योंकि उनके यहाँ पधारे मेहमान को काफी दिन बीत चुके थे, परंतु वह वापस लौटने का तनिक भी विचार नहीं कर रहा था।
(च) अतिथि कब देवता होता है और कब राक्षस हो जाता है?
उत्तरः जब मेहमान अपनी सीमाओं का ध्यान रखते हुए दूसरों की खुशी के लिए कुछ समय रुकता है, तब वह देवतुल्य कहलाता है। इसके उलट, जो मेहमान दूसरों की परेशानियों को अनदेखा करके सिर्फ अपने मतलब से टिके रहते हैं, वे दानव के समान प्रतीत होने लगते हैं।
3. (क) लेखक ने अतिति को विदा लेने का संकेत किन-किन उपायों से दिया ?
उत्तरः लेखक ने मेहमान के सम्मुख ही कैलेंडर की तिथियाँ बदलनी शुरू कर दीं, अतिथि को देखकर उनकी मुस्कान फीकी हो गई, दोनों के मध्य संवाद का सिलसिला कम हो गया; और शानदार भोजन के स्थान पर सादी खिचड़ी बनने लगी। इस प्रकार मेजबान ने मेहमान को जाने के इशारे दिए।
(ख) अतिथि के अपेक्षा से अधिक रुक जाने पर लेखक के मन में क्या-क्या प्रतिक्रियाएँ हुई, उन्हें छाँटकर क्रम से लिखो।
उत्तरः उम्मीद से ज्यादा दिनों तक मेहमान के टिके रहने पर लेखक के हृदय में क्रमानुसार ये प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न हुईं-
(क) मेहमान को देखकर खिल उठने वाली मुस्कान लेखक के चेहरे से धीरे-धीरे गायब हो गई।
(ख) मेजबान और मेहमान के मध्य होने वाली बातचीत भी घटने लगी।
(ग) लेखक की मित्रता ऊब में बदलती गई और उनके मन के विचार गालियों का रूप लेने लगे।
(घ) मेहमान-नवाज़ी का जोश बिल्कुल ठंडा पड़ गया तथा शानदार दावतों की जगह अब साधारण खिचड़ी पकने लगी।
भाषा-अध्ययन
1. निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित करो :
(क) हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने जाएँगे। (नकारात्मक वाक्य)
उत्तरः हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने नहीं जाएँगे।
(ख) किसी लॉण्ड्री पर दे देते हैं, जल्दी धुल जाएँगे। (प्रश्नवाचक वाक्य)
उत्तरः क्या किसी लॉण्ड्री पर दे देने से कपड़े जल्दी धुल जाएँगे?
(ग) देवता और मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते। (सकारात्मक वाक्य)
उत्तरः देवता और मनुष्य अधिक देर तक साथ रहते हैं।
2. ‘पढ़ना’, ‘खेलना’, ‘खाना’, ‘देखना’ क्रियाओं के साथ ‘चुकना’ क्रिया का प्रयोग करके वाक्य बनाओ।
उत्तरः
‘पढ़ना’ – वे सभी अपना पाठ पढ़ चुके।
‘खेलना’ – मैदान में लड़के खेल चुके।
‘देखना’ – हम यह चलचित्र देख चुके।
‘खाना’ – घर आए मेहमान खाना खा चुके।




