Class 8 Hindi Chapter 9 – जैसे को तैसा (জৈচে কো তৈচা) – All Textual Solutions | Sankardev Sishu Vidya Niketan (শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতন)
অষ্টম শ্ৰেণী হিন্দী অধ্যায় ৯ – जैसे को तैसा (জৈচে কো তৈচা) সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ আৰু সমাধান (Sankardev Sishu Vidya Niketan)
অষ্টম শ্ৰেণীৰ হিন্দী (Hindi) পাঠ্যক্ৰমৰ নৱম অধ্যায় ‘जैसे को तैसा’ এখন অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু নীতিশিক্ষামূলক সাধুকথা। শংকৰদেৱ শিশু বিদ্যা নিকেতনৰ (SVN) নতুন পাঠ্যক্ৰমৰ আধাৰত এই অধ্যায়ৰ সম্পূৰ্ণ পাঠ্যভিত্তিক প্ৰশ্নোত্তৰ (Class 8 Hindi Chapter 9 Textual Question Answer) প্ৰস্তুত কৰা হৈছে। এই বিশেষ সংকলনটিত পাঠভিত্তিক অতি চমু প্ৰশ্ন (VSA), চমু প্ৰশ্ন, দীঘলীয়া প্ৰশ্ন, অতিৰিক্ত প্ৰশ্ন (Additional Questions), বহু-বিকল্পী প্ৰশ্ন (MCQs) আৰু ব্যাকৰণৰ পুংখানুপুংখ সমাধান অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। অস্পীন একেডেমী (Ospin Academy) ত এই সমাধানসমূহ সহজ, নিৰ্ভুল আৰু সম্পূৰ্ণ পৰীক্ষামুখীভাৱে উপলব্ধ কৰোৱা হৈছে।
‘जैसे को तैसा’ নামৰ এই পাঠটিত “যেনে কুকুৰ তেনে টাঙোন” বা অন্যায়ৰ উচিত প্ৰতিফল পোৱাৰ এক সুন্দৰ বাৰ্তা প্ৰদান কৰা হৈছে। ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলৰ বাবে এই সাধুকথাৰ মূল ভাৱ, শব্দাৰ্থ আৰু তাৎপৰ্য বুজি পোৱাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। আমাৰ এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানত (Textual Solutions) কেৱল পাঠ্যপুথিৰ অনুশীলনীৰ প্ৰশ্নসমূহেই নহয়, বৰঞ্চ পৰীক্ষাত আহিব পৰা অতিৰিক্ত গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰশ্ন-উত্তৰসমূহো সামৰি লোৱা হৈছে যাতে ছাত্ৰ-ছাত্ৰীসকলে সুন্দৰভাৱে প্ৰস্তুতি চলাব পাৰে।
এই পাঠ্যভিত্তিক সমাধানৰ পৰা আপুনি কি কি শিকিব আৰু পাব:
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শংকৰদেৱ বিদ্যা নিকেতন, অষ্টম শ্ৰেণী: হিন্দী
जैसे को तैसा
পাঠভিত্তিক প্রশ্নোত্তৰ
१। पाठ्यपुस्तक के अन्तर्गत जैसे को तैसा कहानी सरल हिन्दी में लिखो।
उत्तर: प्रस्तुत कहानी अकबर और बीरबल के मशहूर किस्सों पर आधारित है। विश्वभर में विख्यात अकबर-बीरबल की ये कहानियाँ जहाँ एक ओर बीरबल की हाज़िरजवाबी, चतुरता, अक्लमंदी और तीखे व्यंग्य को दर्शाती हैं, वहीं दूसरी ओर बादशाह अकबर की न्यायप्रियता तथा दरबारियों के प्रति उनके रवैये को भी प्रस्तुत करती हैं।
‘जैसे को तैसा’ नामक इस कथा से हमें यह शिक्षा प्राप्त होती है कि हमें भूलकर भी दूसरों का बुरा करने का विचार नहीं करना चाहिए। एक कुम्हार ने एक धोबी को मजा चखाने के लिए जाल बुना था, मगर वह स्वयं ही अपनी चाल में उलझ गया। अतः कोई भी कदम उठाने से पूर्व हमें अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए।
एक रोज़ किसी धोबी का एक गधा पास में ही रहने वाले एक कुम्हार के घर के भीतर चला गया। कुम्हार ने अपने बनाए हुए कच्चे बर्तनों को सूखने हेतु धूप में आँगन में रखा हुआ था। गधे ने उन तमाम बर्तनों के ऊपर कूद-फाँद मचाकर उन्हें चकनाचूर कर दिया। उसी वक्त कुम्हार बाहर से लौट आया और टूटे हुए बर्तनों तथा धोबी के गधे को वहाँ पाकर आगबबूला हो उठा। उसने एक लाठी उठाई और उस गधे की पिटाई शुरू कर दी। पीड़ा के कारण गधा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने (रेंकने) लगा। अपने गधे की चीख पुकार सुनकर धोबी उसे बचाने दौड़ा चला आया। उसने तेज़ आवाज़ में कहा- “अरे भाई! यह क्या माजरा है? तुम मेरे इस बेज़ुबान गधे को क्यों मार रहे हो?”
कुम्हार ने जवाब दिया- “यदि तुम्हें अपना यह गधा इतना ही प्यारा लगता है, तो इसकी ठीक से देखभाल क्यों नहीं करते? तुम्हें इसे खूँटे से बाँधकर रखना चाहिए था। ज़रा यहाँ आकर देखो, तुम्हारे इस गधे ने मेरे सारे बर्तन फोड़ डाले हैं। मैंने ये बर्तन एक सेठ के कहने पर तैयार किए थे, अब तुम खुद सोचो कि मैं इतनी जल्दी दोबारा बर्तन कैसे गढ़ सकूँगा ताकि दस दिनों के भीतर उन्हें सौंप सकूँ। मैं तुम्हारे गधे को दंड दिए बिना बिल्कुल नहीं मानूँगा।”
इस पर धोबी ने कहा- “तुम्हारे जितने भी बर्तन टूटे हैं, मैं उन सभी का मूल्य चुका दूँगा। अब इस किस्से को यहीं खत्म कर दो। आखिर इतनी मामूली सी बात पर हम दोनों को क्यों झगड़ना चाहिए?” इतना कहकर धोबी ने कुम्हार को पैसे थमाए और अपने गधे को साथ लेकर वहाँ से लौट गया। किन्तु कुम्हार का क्रोध अभी भी शांत नहीं हुआ था। अपनी मेहनत तो वह फिर से कर सकता था, लेकिन ग्राहक को निश्चित समय सीमा के भीतर बर्तन कैसे सौंपेगा? कुम्हार के सामने यह एक बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई थी। इसी वजह से गधे के द्वारा पहुँचाए गए नुकसान का बदला लेने के लिए वह धोबी को एक कड़ा सबक सिखाने की फिराक में था।
इसके अगले ही दिन कुम्हार सम्राट अकबर के दरबार में जा पहुँचा। वहाँ उपस्थित होकर उसने कहा, “जहाँपनाह! बीती शाम ही मेरा एक दोस्त ईरान से वापस लौटा है। उसने मुझे यह सूचना दी है कि ईरान के बादशाह हमारे मुल्क और यहाँ की आवाम से काफी प्रभावित रहते हैं। लेकिन उसका यह भी कहना है कि भारत के हाथी बहुत काले और मैले दिखाई देते हैं। जबकि उसकी अपनी फौज में एकदम सफेद और साफ़-सुथरे हाथी मौजूद हैं।”
बादशाह अकबर ने सवाल किया- “तो भई, इस मामले में हम क्या उपाय कर सकते हैं?”
कुम्हार ने उत्तर दिया- “हुज़ूर! ईरान के सम्राट के पास धोबियों की एक बहुत बड़ी टोली है, जो उनके हाथियों को दिन में दो दफा नहलाकर चमकाती है। यदि हम भी ईरान के शाह की भाँति अपने हाथियों की रोज़ाना धुलाई करवाएँ, तो मुमकिन है कि हमारे हाथी भी उनके हाथियों से ज्यादा उजले और निर्मल हो जाएँ।”
उसकी यह बात सुनकर सम्राट अकबर तुरंत भाँप गए कि इस कुम्हार के दिमाग में कोई न कोई खुराफात ज़रूर चल रही है, जिसे वह सामने नहीं ला रहा है। उन्होंने आदेश दिया, “शहर के तमाम धोबियों को एक जगह इकट्ठा किया जाए और उन्हें हुक्म दिया जाए कि वे रोज़ हमारे हाथियों की सफाई करें।”
कुम्हार तपाक से बोला- “महाराज! शहर के सारे धोबियों को कष्ट देने की ज़रा भी ज़रूरत नहीं है। मेरे ही घर के पास एक धोबी निवास करता है, जो कपड़े धोने के काम में बेहद निपुण है। हमारे हाथियों की सफाई के लिए वही इंसान सबसे योग्य रहेगा।” बादशाह अकबर कुम्हार की असली चाल को अच्छी तरह समझ चुके थे, अतः उन्होंने अपने प्रहरियों को आदेश दिया कि “फौरन जाओ और उस धोबी को यहाँ दरबार में हाज़िर करो।”
धोबी को दरबार में बुलवाया गया और उसे राजसी हाथियों को नहलाने का काम सौंपा गया। धोबी ने पूरा दिन पसीना बहाकर कुछ हाथियों को खूब रगड़-रगड़ कर मलकर साफ किया, लेकिन हाथियों का रंग काला ही बना रहा। शाम ढलते-ढलते थका-हारा धोबी बुरी तरह घबरा गया। वह सम्राट के गुस्से से भयभीत हो रहा था, क्योंकि इतनी मेहनत के बाद भी हाथी काले ही नज़र आ रहे थे। धोबी को यह भी एहसास हो गया था कि यह पूरी साज़िश उसी कुम्हार की है, जो उससे बदला लेना चाह रहा था। ऐसे में मदद की आस लिए वह फौरन बीरबल के निवास स्थान की तरफ भागा। बीरबल के साथ भेंट करने के बाद वह पूरी तरह बेफिक्र होकर अपने निवास पर लौट आया। अगली सुबह जब सम्राट अकबर हाथियों को गोरा न कर पाने की वजह से उसे फटकार लगा रहे थे, तो उसने नम्रतापूर्वक कहा, “जहाँपनाह! अगर मेरे पास एक ऐसा विशाल टब मौजूद हो जिसके अंदर हाथी को खड़ा करके आसानी से रगड़ा जा सके, तो मुझे पक्का यकीन है कि हमारे हाथी ईरान के बादशाह के हाथियों को भी सफेदी में पीछे छोड़ देंगे।” सम्राट अकबर भली-भांति जान गए थे कि धोबी अब उसी कुम्हार को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है। अतः उन्होंने फरमान सुनाया, “उस कुम्हार को हुक्म दिया जाए कि वह हाथियों को स्नान कराने लायक एक इतना बड़ा टब तैयार करे, जिसमें एक हाथी आराम से समा सके।”
कुम्हार को हाथियों के नहाने वाला एक विशाल टब गढ़ने का निर्देश मिला। इस काम को पूरा करने के लिए उसने पूरे एक हफ़्ते की मोहलत माँगी। जब वह उस टब को तैयार करके शाही महल में लाया, तो जैसे ही एक हाथी ने अपना भारी-भरकम पैर उस टब में डाला, वह टब हाथी का बोझ न सह सका और चकनाचूर हो गया। यह देखकर बादशाह अकबर ने गुस्से में आकर उससे कहा, “तुमने इतना कच्चा और कमज़ोर टब क्यों बनाया? फौरन जाओ और कल सुबह होने तक एक अत्यंत पक्का और मज़बूत टब बनाकर लाओ।”
अब कुम्हार को यह एहसास हो गया कि उसकी चोरी पकड़ी गई है। वह तुरंत सम्राट के चरणों में गिर पड़ा और अपना अपराध स्वीकार करते हुए बोला कि उसने यह सब केवल उस धोबी को एक सबक सिखाने के इरादे से किया था। इसके पश्चात बादशाह ने धोबी की ओर मुड़कर पूछा, “तुम्हारे दिमाग में ऐसा विशाल टब बनवाने का उपाय आखिर आया कहाँ से? मैं तुम्हारी इस समझदारी पर तुम्हें ज़रूर पुरस्कृत करूँगा।”
धोबी ने हाथ जोड़कर कहा, “हे राजन! इस पुरस्कार का असली अधिकारी मैं नहीं, बल्कि बीरबल जी हैं। मुसीबत के समय जब मैं मदद के लिए उनके दर पर गया था, तब उन्होंने ही मुझे यह युक्ति सुझाई थी।” यह सुनकर सम्राट अकबर ने बीरबल को वहाँ बुलाया और एक गरीब धोबी की इस प्रकार मदद करने के लिए उनकी खूब सराहना की।
१। (क) कुम्हार को धोबी के गधे पर इतना गुस्सा क्यों आया था ?
उत्तर: कुम्हार द्वारा मेहनत से गढ़े गए मिट्टी के तमाम कच्चे बर्तनों को धोबी के गधे ने पैरों तले रौंद कर तोड़ डाला था। ठीक इसी बात पर कुम्हार को बहुत तेज़ क्रोध आ गया था।
३। कुम्हार धोबी को क्यों सबक सिखाना चाहता था ?
उत्तर: कुम्हार के बनाए सारे बर्तनों को धोबी के गधे ने फोड़ दिया था, जिसकी वजह से वह तय वक्त पर सेठ को उनका ऑर्डर नहीं सौंप पाता। इस घटना से कुम्हार को काफी भारी आर्थिक हानि होने वाली थी। इसी कारण कुम्हार ने उस धोबी को सबक सिखाने की ठान ली थी।
४। दरबार में जाकर कुम्हार बादशाह अकबर से क्या बोला ?
उत्तर: राजदरबार में उपस्थित होकर कुम्हार ने सम्राट अकबर से निवेदन किया कि ईरान से उसका एक दोस्त आया है, और उसका मानना है कि भारत के हाथी बहुत काले और मैले-कुचैले होते हैं, जबकि ईरान की फौज के हाथी एकदम सफेद और साफ-सुथरे रहते हैं।
५। धोबी क्यो घबरा गया था ?
उत्तर: पूरा दिन कड़ी मेहनत करके हाथियों को रगड़-रगड़ कर नहलाने के बाद भी जब बादशाह अकबर की सेना के हाथियों का रंग सफेद नहीं हुआ और वे काले ही रहे, तो यह देखकर धोबी बुरी तरह घबरा गया था।
६। हाथियों को साफ न कर पाने के कारण बादशाह अकबर द्वारा धोबी को डाँटे जाने पर वह क्या बोला ?
उत्तर: हाथियों को सफेद करने में विफल रहने पर जब सम्राट अकबर ने धोबी को फटकार लगाई, तो उसने बड़ी नम्रता से कहा, “जहाँपनाह! अगर मुझे एक इतना बड़ा टब मिल जाए जिसके भीतर हाथी को खड़ा करके अच्छे से मला जा सके, तो मेरा यह पूर्ण दावा है कि हमारे हाथी ईरान के हाथियों से भी ज़्यादा साफ और उजले हो जाएँगे।”
८। ‘जैसे को तैसा’ कहानी से तुम्हें क्या सिख मिली ?
उत्तर: ‘जैसे को तैसा’ कथा हमें यह शिक्षा देती है कि मनुष्य को कभी भी दूसरे का अहित करने की योजना नहीं बनानी चाहिए। कुम्हार ने धोबी को नीचा दिखाने के लिए साज़िश रची, लेकिन अंत में वह अपनी ही बिछाई बिसात पर मात खा गया। अतः हमें कोई भी काम बहुत ही सोच-विचार करके ही करना चाहिए।
९। धोबी को सबक सीखाने के लिए कुम्हार ने कौन सी योजना बनायी ?
उत्तर: कुम्हार ने उस धोबी से अपना बदला लेने के लिए राजसी हाथियों की साफ-सफाई (धुलाई) करवाने का षड्यंत्र रचा था।
१०। क्या कुम्हार अपनी योजना से कामयाब हुआ ?
उत्तर: जी नहीं, कुम्हार अपनी उस कुटिल साज़िश में बिल्कुल भी सफल नहीं हो पाया।
११। धोबी सहायता के लिए किसके महल की ओर चल पड़ा था ?
उत्तर: मुसीबत में फँसने पर मदद माँगने के इरादे से धोबी सीधे बीरबल के निवास (महल) की तरफ निकल पड़ा था।
१२। वाक्यों को पूरा करो :
(क) पीड़ा के कारण गधा ज़ोर-ज़ोर से रेंकने लगा।
(ख) बीरबल के साथ भेंट करने के बाद वह बेफिक्र होकर अपने घर लौट आया।
(ग) कुम्हार को हाथी के स्नान हेतु एक विशाल टब बनाने का फरमान दिया गया था।
(घ) मैं तुम्हें तुम्हारी इस अक्लमंदी के लिए अवश्य पुरस्कृत करूँगा।




